नई दिल्ली. भारतीय सेना ने भविष्य के युद्ध की तैयारी और अपनी आधुनिक सैन्य क्षमता का बड़ा प्रदर्शन करते हुए सदर्न कमांड के तहत 6 मार्च से 18 मार्च 2026 तक बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में एक्सरसाइज AMOGH JWALA का आयोजन किया. इस युद्धाभ्यास की सबसे अहम बात यह रही कि पहली बार मैकेनाइज्ड फोर्सेस के साथ अटैक हेलिकॉप्टर्स के इंटीग्रेटेड ऑपरेशन को वैलिडेट किया गया, जिसे भारतीय सेना की नई युद्ध रणनीति की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
मैकेनाइज्ड फोर्सेस यानी सेना की वह ताकत जो टैंकों, बख्तरबंद गाड़ियों और तेज़ी से आगे बढ़ने वाली भारी सैन्य यूनिट्स के साथ जमीन पर लड़ती है. वहीं अटैक हेलिकॉप्टर्स दुश्मन के टैंक, बंकर, ठिकाने और आगे बढ़ती फौज पर ऊपर से हमला करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. अब तक ये दोनों ताकतें अक्सर अलग-अलग भूमिकाओं में काम करती दिखती थीं, लेकिन AMOGH JWALA में पहली बार यह परखा गया कि जमीन पर आगे बढ़ रही मैकेनाइज्ड फोर्स और आसमान से हमला करने वाले अटैक हेलिकॉप्टर्स एक ही कमांड, एक ही योजना और एक ही समय पर मिलकर कैसे लड़ सकते हैं. आसान भाषा में कहें तो अगर युद्ध के मैदान में भारतीय सेना के टैंक आगे बढ़ रहे हों, तो ऊपर से अटैक हेलिकॉप्टर दुश्मन के टैंकों और ठिकानों को पहले ही निशाना बना सकते हैं, जमीन पर बढ़ रही सेना को सुरक्षा दे सकते हैं और दुश्मन की जवाबी कार्रवाई को कमजोर कर सकते हैं. यानी जमीन और हवा, दोनों से एक साथ, ज्यादा तेज़ और ज्यादा घातक हमला.
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सिर्फ एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि भारतीय सेना के युद्ध लड़ने के तरीके में बड़ा बदलाव है. आज का युद्ध सिर्फ टैंक बनाम टैंक या सैनिक बनाम सैनिक नहीं रह गया है. अब लड़ाई में ड्रोन, रियल-टाइम इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, एयर सपोर्ट और नेटवर्क-आधारित कमांड सिस्टम भी उतने ही अहम हो गए हैं. ऐसे में मैकेनाइज्ड फोर्सेस और अटैक हेलिकॉप्टर्स का साथ काम करना सेना को ज्यादा तेज़ हमला करने की क्षमता देता है, दुश्मन पर कई दिशाओं से दबाव बनाता है, बेहतर टारगेट हिट करने की ताकत देता है और जमीन पर लड़ रही यूनिट्स को ज्यादा सुरक्षा भी देता है. एक लाइन में समझें तो पहले टैंक और हेलिकॉप्टर अलग-अलग लड़ते दिखते थे, अब दोनों एक टीम की तरह लड़ने की तैयारी हो रही है.
इस बड़े युद्धाभ्यास में भारतीय सेना ने टेक्नोलॉजी-ड्रिवन मैकेनाइज्ड वॉरफेयर की कई क्षमताओं को परखा. इसमें मैकेनाइज्ड फोर्सेस, अटैक हेलिकॉप्टर्स, फाइटर एयरक्राफ्ट, अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (UAS), काउंटर-ड्रोन सिस्टम्स और नेटवर्क-इनेबल्ड बैटलफील्ड प्लेटफॉर्म्स को एक मजबूत कमांड एंड कंट्रोल आर्किटेक्चर के तहत साथ संचालित किया गया. अभ्यास के दौरान हाई-टेम्पो मैकेनाइज्ड ऑपरेशंस, सिंक्रोनाइज़्ड फायर एंड मैन्युवर, रीयल-टाइम ड्रोन-इनेबल्ड सर्विलांस, टारगेट एक्विजिशन, प्रिसिशन एंगेजमेंट और एडवांस्ड बैटलफील्ड टेक्नोलॉजी के इंटीग्रेशन का प्रदर्शन किया गया. इसके अलावा एडवांस्ड सर्विलांस सिस्टम्स, सिक्योर कम्युनिकेशन नेटवर्क्स और प्रिसिशन फायरपावर के जरिए बैटलफील्ड ट्रांसपेरेंसी बढ़ाई गई, जिससे रीयल-टाइम और तेज़ डिसीजन मेकिंग संभव हो सकी.
एक्सरसाइज के दौरान इंटीग्रेटेड एयर-लैंड मैन्युवर्स, UAS के लिए बैटलफील्ड एयरस्पेस मैनेजमेंट और काउंटर-UAS ऑपरेशंस को भी वैलिडेट किया गया. साथ ही उभरती तकनीकों के अनुरूप नए फोर्स स्ट्रक्चर्स, प्रक्रियाओं और प्रोटोकॉल्स का भी परीक्षण हुआ. ड्रिल्स में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW), एयर डिफेंस (AD), नाइट-फाइटिंग क्षमताओं और इंटेलिजेंस, सर्विलांस एवं रिकॉनिसेंस (ISR) एसेट्स के प्रभावी समन्वय को भी दिखाया गया.
इस अभ्यास का समापन लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, PVSM, UYSM, AVSM, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, सदर्न कमांड की मौजूदगी में हुआ. उन्होंने भाग लेने वाले सैनिकों की प्रोफेशनलिज़्म, ऑपरेशनल एक्सीलेंस और बैटल रेडीनेस की सराहना की. उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी एब्जॉर्प्शन, जॉइंटनेस और थल, वायु, साइबर, स्पेस, इंटेलिजेंस, सर्विलांस एंड रिकॉनिसेंस (ISR) तथा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) क्षमताओं का seamless integration ही ऐसी सेना की बुनियाद है, जो बदलते युद्धक्षेत्र में मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस के पूरे स्पेक्ट्रम में बढ़त बना सके.
AMOGH JWALA को भारतीय सेना की नेटवर्क्ड और फ्यूचर-रेडी फोर्स बनने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. इस अभ्यास ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में युद्ध सिर्फ जमीन पर नहीं लड़ा जाएगा, बल्कि जमीन, हवा, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और रीयल-टाइम इंटेलिजेंस के संयुक्त इस्तेमाल से लड़ा जाएगा. पहली बार मैकेनाइज्ड फोर्सेस के साथ अटैक हेलिकॉप्टर्स के सफल इंटीग्रेशन ने यह दिखा दिया है कि भारतीय सेना अब भविष्य के युद्ध के लिए अपनी रणनीति को नए सिरे से गढ़ रही है.
