नई दिल्ली: देश में बढ़ते डिजिटल लेनदेन के बीच साइबर अपराधियों ने भी नए पैंतरे अपनाए हैं. इसी खतरे को देखते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने एक बेहद महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. शाह ने स्पष्ट किया कि यदि हम साइबर अपराध के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाते, तो यह केवल अपराध नहीं बल्कि एक बड़ा राष्ट्रीय संकट बन जाता. सरकार अब आरबीआई, एनआईए और सीबीआई जैसी तमाम एजेंसियों को एक साथ लाकर एक अभेद्य सुरक्षा तंत्र बनाने पर काम कर रही है. भारत आज दुनिया में डिजिटल ट्रांजेक्शन का सिरमौर है. दुनिया का हर दूसरा डिजिटल लेनदेन भारत में होता है. गृहमंत्री ने बताया कि हमारे पास 181 बिलियन डिजिटल ट्रांजेक्शन और 57 करोड़ से अधिक जन धन खातों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है. पंचायत स्तर तक साइबर गतिविधियों का विस्तार होने से खतरा भी बढ़ा है. ऐसे में ‘आईफोरसी’ (I4C) की भूमिका को एक कदम आगे ले जाने का समय आ गया है. गृहमंत्री ने जोर देकर कहा कि अब हमें लीकेज कम करने और रियल टाइम रिपोर्टिंग पर फोकस करना होगा.
डेटा चोरी और देश के दुश्मनों की साजिश
गृहमंत्री ने एक गंभीर मुद्दे की ओर इशारा करते हुए कहा कि देश का डेटा चोरी कर दुश्मनों को बेचने का काम किया जा रहा है. यह न केवल आर्थिक अपराध है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा है. साइबर अरेस्ट और डिजिटल अरेस्ट जैसे नए दौर के अपराधों से निपटने के लिए सरकार ने आईफोरसी के जरिए समन्वय का बेहतरीन ढांचा तैयार किया है. शाह ने कहा कि क्राइम, क्रिमिनल जस्टिस और फंड रिकवरी के लिए सभी एजेंसियों को एक साथ आना होगा ताकि साइबर हाईजीन सुनिश्चित की जा सके.
कार्रवाई के चौंकाने वाले आंकड़े और रिकवरी
सरकार साइबर अपराधियों के खिलाफ किस तरह से एक्शन मोड में है, इसके आंकड़े गृहमंत्री ने कॉन्फ्रेंस में साझा किए. 30 नवंबर 2025 तक 23 करोड़ से ज्यादा साइबर शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 1.85 लाख एफआईआर दर्ज की गईं. दिसंबर 2025 तक गृह मंत्रालय ने सख्त कदम उठाते हुए 12 लाख सिम कार्ड रद्द किए और 3 लाख मोबाइल आईएमईआई (IMEI) ब्लॉक किए हैं. साइबर फ्रॉड की करीब 8,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम बरामद की जा चुकी है, जो पीड़ित जनता के लिए एक बड़ी राहत है.
1930 हेल्पलाइन और ‘म्यूल अकाउंट हंटर’ मैकेनिज्म
अमित शाह ने 1930 हेल्पलाइन को एक कारगर हथियार बताया. उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इस नंबर पर कॉल नहीं उठती है, तो विभाग की छवि खराब होती है. इसके साथ ही गृह मंत्रालय ने ‘म्यूल अकाउंट हंटर’ का मैकेनिज्म तैयार किया है. म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल साइबर ठगी के पैसे को इधर-उधर करने में किया जाता है. गृहमंत्री ने एनआईए और सीबीआई को निर्देश दिए कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा तंत्र बनाएं और पीड़ितों से सीधा संवाद करें.
हर 3 सेकंड में एक शिकार: जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
आंकड़े बताते हैं कि हर 37 सेकंड में एक व्यक्ति साइबर हमले का शिकार हो रहा है और 100 में से 93 लोग किसी न किसी रूप में इसके निशाने पर हैं. हालांकि अब तक 20,000 से ज्यादा साइबर अपराधी पकड़े गए हैं, लेकिन गृहमंत्री ने कहा कि यह पर्याप्त नहीं है. हमें लोन वुल्फ और संगठित अपराधों से निपटने के लिए साइबर योद्धा तैयार करने होंगे. प्रधानमंत्री मोदी ने खुद ‘मन की बात’ में इसका जिक्र कर जनता को जागरूक किया है, लेकिन एजेंसियों को कार्रवाई में होने वाली देरी (Delay) को खत्म करना होगा.
