चीन ने अमेरिका द्वारा लगाए गए परमाणु परीक्षण के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. बीजिंग ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन बताते हुए कहा कि यह महज एक झूठा बहाना है, जिसके जरिए अमेरिका अपने स्वयं के परमाणु परीक्षण दोबारा शुरू करने का रास्ता तैयार करना चाहता है. चीन का कहना है कि उसने हमेशा परमाणु परीक्षण पर रोक से जुड़े अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का जिम्मेदारी के साथ पालन किया है और उसने कभी भी किसी प्रकार का परमाणु परीक्षण नहीं किया.
चीन ने स्पष्ट किया कि अमेरिका द्वारा लगाए गए आरोप न केवल तथ्यों से परे हैं, बल्कि वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण और अप्रसार के प्रयासों को भी कमजोर करते हैं. उसने अमेरिका से अपील की है कि वह परमाणु परीक्षण पर लगे मोराटोरियम के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोबारा स्पष्ट करे. यह मोराटोरियम अमेरिका सहित पांच परमाणु हथियार संपन्न देशों द्वारा स्वीकार किया गया था. चीन का कहना है कि इस प्रतिबद्धता का सम्मान करना और उसका सख्ती से पालन करना वैश्विक सुरक्षा और रणनीतिक स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है.
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चीन ने जोर देकर कहा कि अमेरिका को परमाणु परीक्षण पर वैश्विक सहमति का सम्मान करना चाहिए और ऐसे किसी भी कदम से बचना चाहिए, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अविश्वास और तनाव बढ़े. उसके अनुसार, परमाणु परीक्षणों को दोबारा शुरू करना न केवल अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा होगा, बल्कि इससे परमाणु हथियारों की दौड़ को भी बढ़ावा मिल सकता है. चीन ने यह भी कहा कि अमेरिका को केवल बयानबाजी तक सीमित न रहकर ठोस और व्यावहारिक कदम उठाने चाहिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरस्त्रीकरण और परमाणु अप्रसार व्यवस्था की रक्षा की जा सके.
चीन ने दोहराया कि परमाणु हथियारों का उन्मूलन और परीक्षण पर स्थायी प्रतिबंध ही विश्व में स्थायी शांति और सुरक्षा का आधार बन सकता है. पिछले सप्ताह के अंत में, अमेरिका ने सनसनीखेज दावा किया था कि चीन गुप्त परमाणु हथियार परीक्षण की योजना बना रहा है और कम से कम एक परीक्षण कर चुका है. एक अंतरराष्ट्रीय परमाणु निगरानी संस्था ने कहा है कि उसे अमेरिका के इस दावे का समर्थन करने वाला कोई सबूत नहीं मिला है, जिसमें उन्होंने चीन पर 2020 में गुप्त परमाणु परीक्षणों की एक श्रृंखला को अंजाम देने और परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधियों का उल्लंघन करने वाली गतिविधियों को छिपाने का आरोप लगाया था.
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