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आसमान में ही जलकर राख होंगे दुश्मन, भारत बना ड्रोन और क्रूज मिसाइलों का काल, चीन और पाकिस्तान की उड़ी नींद

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आसमान में ही जलकर राख होंगे दुश्मन, भारत बना ड्रोन और क्रूज मिसाइलों का काल

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रक्षा मंत्रालय ने कुल ₹858 करोड़ के दो अहम समझौते किए हैं. ये समझौते 27 मार्च 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में साइन हुए. इसके जरिए भारत का एयर डिफेंस सिस्टम इतना मजबूत हो जाएगा कि दुश्मन देश का कोई भी क्रूज मिसाइल और ड्रोन भारत की सुरक्षा को भेद नहीं पाएगा.

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एयर डिफेंस सिस्टम और निगरानी विमान से भारत की ताकत में दोगुना इजाफा होगा. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. भारत की रक्षा ताकत में अब एक और बड़ा और खतरनाक इजाफा हो गया है. रक्षा मंत्रालय ने नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में 858 करोड़ रुपए के दो बड़े एग्रीमेंट साइन किए हैं. ये समझौते 27 मार्च 2026 को हुए हैं. इनका सीधा मकसद भारत के आसमान और समंदर की सुरक्षा को पूरी तरह से अभेद्य बनाना है. इंडियन आर्मी को रूस का टुंगुस्का एयर डिफेंस सिस्टम मिलने वाला है.

यह सिस्टम दुश्मन के विमानों, ड्रोन्स और क्रूज मिसाइलों को पलक झपकते ही हवा में खाक कर देगा. इसके साथ ही इंडियन नेवी के P8I एयरक्राफ्ट के मेंटेनेंस के लिए भी एक बड़ी डील हुई है. बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ यह करार भारत में ही होगा. इससे देश के आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया विजन को एक बहुत बड़ा बूस्ट मिलेगा. भारत अब हर तरह के खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है.

‘445 करोड़ में रूस से मिला एयर डिफेंस सिस्टम’
भारतीय सेना को अब टुंगुस्का एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम मिलेगा. इसके लिए रूस की कंपनी के साथ 445 करोड़ रुपए का बड़ा एग्रीमेंट साइन हुआ है. यह आधुनिक मिसाइल सिस्टम भारत की एयर डिफेंस पावर को कई गुना बढ़ा देगा. दुश्मन का कोई भी विमान, ड्रोन या क्रूज मिसाइल अब भारत की सीमा में घुस नहीं पाएगा. इससे रूस और भारत का रक्षा सहयोग भी और ज्यादा मजबूत हुआ है.

‘नेवी के P8I एयरक्राफ्ट के लिए बोइंग से हुई डील’
भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए भी बड़ा कदम उठाया गया है. नौसेना के P8I विमान की जांच और मेंटेनेंस के लिए एक अहम समझौता हुआ है. यह एग्रीमेंट 413 करोड़ रुपए में बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ साइन किया गया है. यह काम पूरी तरह से भारत में ही किया जाएगा.

‘मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को मिला बूस्ट’
P8I विमानों का मेंटेनेंस देश के अंदर ही होने से बहुत बड़ा फायदा होगा. इससे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को भारी ताकत मिलेगी. देश में ही मेंटेनेंस की आधुनिक सुविधाएं काफी मजबूत होंगी. भारत अब रक्षा उपकरणों के रखरखाव के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहेगा. यह डिफेंस सेक्टर में स्वदेशीकरण की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है.

By uttu

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