पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को लेकर खुली चेतावनी दी है। ईरान की सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा कि अगर ईरानी नेताओं पर हमले जारी रहे, तो वह पश्चिम एशिया में अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाएगा। इस बयान से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है और वैश्विक स्तर पर चिंता गहरा गई है।
ईरान ने साफ कहा है कि 1 अप्रैल से तेहरान समय के अनुसार रात 8 बजे के बाद अमेरिकी कंपनियों के ठिकानों पर हमले शुरू किए जा सकते हैं। भारत के समय के अनुसार यह रात 10:30 बजे होगा। ईरान ने कहा है कि हर हमले के बदले इन कंपनियों की यूनिट्स को तबाह किया जाएगा। इसके साथ ही कर्मचारियों को तुरंत अपने कार्यस्थलों से हटने की चेतावनी भी दी गई है।
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क्या अमेरिकी कंपनियां सीधे निशाने पर हैं?
ईरान ने 15 बड़ी अमेरिकी कंपनियों की सूची जारी की है। इसमें माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एपल, इंटेल, आईबीएम, टेस्ला और बोइंग जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा डेल, एचपी, सिस्को, ओरेकल और जेपी मॉर्गन जैसी कंपनियों के नाम भी सामने आए हैं। इससे साफ है कि ईरान अब सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहना चाहता। आइए जानते हैं कौन-कौन सी कंपनियां आईआरजीसी के निशाने पर हैं।
- माइक्रोसॉफ्ट
- गूगल
- एपल
- इंटेल
- आईबीएम (इंटरनेशनल बिजनेस मशीन)
- टेस्ला
- बोइंग
- डेल टेक्नोलॉजीज
- हेवलेट पैकार्ड (एचपी)
- सिस्को
- ओरेकल
- मेटा प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम)
- जेपी मॉर्गन चेस
- जनरल इलेक्ट्रिक
- हेवलेट पैकार्ड एंटरप्राइज
क्या यह सिर्फ चेतावनी है या बड़ा खतरा?
आईआरजीसी ने पहले भी ऐसी चेतावनियां दी हैं, लेकिन इस बार समय सीमा तय करने से खतरा ज्यादा गंभीर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह धमकी सच में लागू होती है, तो इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है। ईरान ने अपने बयान में कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियां युद्ध में अहम भूमिका निभा रही हैं। उनका आरोप है कि ये कंपनियां अमेरिका को ऑपरेशन की योजना बनाने और हमले करने में मदद करती हैं। इसी वजह से इन्हें भी निशाना बनाया जा सकता है।
क्या कर्मचारियों के लिए खतरा बढ़ गया है?
ईरान ने कंपनियों के कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि वे तुरंत अपने दफ्तर छोड़ दें। इससे साफ है कि खतरा सिर्फ कंपनियों के ढांचों तक सीमित नहीं है, बल्कि वहां काम करने वाले लोगों की सुरक्षा भी सवालों में है।
क्या इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा?
अगर इन कंपनियों पर हमला होता है, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। ये सभी कंपनियां वैश्विक स्तर पर काम करती हैं। ऐसे में आईटी, टेक्नोलॉजी और व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है। इससे बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है और निवेशकों की चिंता भी बढ़ेगी। इस धमकी के बाद अमेरिका और उसके सहयोगियों की प्रतिक्रिया अहम होगी। अगर जवाबी कार्रवाई होती है, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। साफ है कि मध्य पूर्व में तनाव अब नए स्तर पर पहुंच चुका है और आने वाले दिन बेहद संवेदनशील हो सकते हैं।
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