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उत्तर में ‘पुर’ तो दक्षिण में ‘पुरम्’ क्यों? आखिर साउथ के राज्यों ने कैसे बचाया संस्कृत का वजूद?

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नई दिल्ली (Sanskrit Suffix in Indian Cities and States Names). केरल सरकार के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब ‘केरल’ आधिकारिक रूप से अपनी मूल पहचान ‘केरलम’ की तरफ लौट चुका है. यह बदलाव भारतीय भूगोल और संस्कृत व्याकरण का वह अटूट रिश्ता बयां करता है, जो सदियों से हमारी जड़ों में है. क्या आपने कभी सोचा है कि तिरुवनंतपुरम, रामेश्वरम, कांचीपुरम, केरलम आदि के नाम के आखिर में ‘म’ (मकार) क्यों आता है?

संस्कृत में जब हम किसी स्थान या नगर का नाम लेते हैं तो व्याकरण के हिसाब से उसके आखिर में ‘अम’ (म) जोड़ना उसे पूर्ण और शुद्ध बनाता है. यह ‘म’ असल में संस्कृत के नपुंसकलिंग और शब्दों को पूर्णता प्रदान करने वाले प्रत्ययों से आता है. जहां उत्तर भारत में समय के साथ भाषाई सरलीकरण के कारण ये नाम ‘पुर’ या ‘नगर’ बनकर रह गए, वहीं दक्षिण ने इनके मूल तत्सम स्वरूप को ‘पुरम्’ और ‘नगरम्’ के रूप में आज भी जीवित बचाकर रखा है. केरल का केरलम होना भी इसी का उदाहरण है.

संस्कृत का ‘मकार’ और व्याकरण का नियम

संस्कृत व्याकरण में किसी भी संज्ञा शब्द को जब ‘नपुंसकलिंग’ (Neuter Gender) के रूप में इस्तेमाल किया जाता है तो उसके अंत में ‘म’ (अम्) प्रत्यय जुड़ जाता है. स्थानवाचक शब्द जैसे ‘पुर’ (शहर), ‘वन’ (जंगल) या ‘राज्य’ (प्रदेश) इसी श्रेणी में आते हैं.

नियम: शब्द + अम् = पूर्ण स्थानवाचक संज्ञा

उदाहरण: पुर + अम् = पुरम् (जैसे: कांचीपुरम), स्थान + अम् = स्थानम्

उत्तर vs दक्षिण: भाषाई बदलाव का सफर

एक दौर में लगभग पूरे भारत में ‘पुरम्’ और ‘नगरम्’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था. लेकिन समय के साथ उत्तर भारत में बोलचाल की भाषाएं (जैसे हिंदी और पंजाबी) बदलती रहीं, जिससे भारी-भरकम शब्द बोलने में आसान और छोटे कर दिए गए. इसी शॉर्टकट के चक्कर में नामों के अंत से ‘म’ गायब हो गया और ‘पुरम्’ का सिर्फ ‘पुर’ रह गया- जैसे जयपुर, कानपुर और नागपुर. वहीं, दक्षिण भारत की भाषाओं, विशेषकर मलयालम और तमिल ने संस्कृत के तत्सम (मूल) रूप को सुरक्षित रखा.

‘केरलम’ और ‘भारतम’ का सांस्कृतिक संदर्भ क्या है?

केरल को स्थानीय भाषा में ‘केरलम’ कहना उनके भाषाई गौरव का प्रतीक है. संस्कृत के प्राचीन श्लोकों में भी भारत को ‘भारतम’ कहा गया है (उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्. वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र संततिः॥). यहां ‘म’ प्रत्यय न केवल व्याकरणिक शुद्धता लाता है, बल्कि उस जगह को पूजनीय और पूर्ण इकाई के रूप में स्थापित भी करता है.

प्रमुख उदाहरण और उनके अर्थ

  • रामेश्वरम: राम + ईश्वर + म. यह उस स्थान को दर्शाता है जहां भगवान राम ने ईश्वर (शिव) की आराधना की.
  • कुंभकोणम: यह प्राचीन शहर अपने मंदिर और आध्यात्मिक महत्व के लिए जाना जाता है, जहां ‘अम’ प्रत्यय इसे खास बनाता है.

नामों में संस्कृत की प्रधानता क्यों?

भारत में स्थानों के नाम रखने के पीछे अक्सर 3 मुख्य आधार रहे हैं- प्रकृति, देवता और इतिहास. संस्कृत इन तीनों का संगम रही है, इसलिए ‘हिम’ से हिमाचल, ‘अरुण’ से अरुणाचल और ‘उत्तर’ से उत्तराखंड जैसे नाम बने. ‘म’ प्रत्यय इन नामों को शास्त्रीय गरिमा प्रदान करता है, जो सुनने में आदरपूर्ण और आध्यात्मिक लगता है. ‘म’ प्रत्यय वाले नाम याद भारत की गहरी जड़ें याद दिलाते हैं. केरलम का नाम बदलने का प्रस्ताव इसी प्राचीन कड़ी को दोबारा जोड़ने की एक कोशिश है.

केरल’ कहने पर वह अधूरा लगता था, लेकिन ‘म’ जुड़ते ही वह अपनी भाषाई और संस्कृत गरिमा को वापस पा लेता है.

By uttu

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