Sun. Mar 29th, 2026

एविएशन में अब सबकुछ अपना होगा! फ्लाइट सेफ्टी पर भारत–यूरोप ने मिलाया हाथ, ‘मेक इन इंडिया’ को भी मिलेगी ऊंचाई

image 2026 03 27T07 56 07 556Z 2026 03 823c3cd80727b4ec215cd87f1801ffff

होमताजा खबरदेश

अब सबकुछ अपना होगा! भारत–यूरोप ने मिलाया हाथ, ‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगी ऊंचाई

Last Updated:

भारत के डीजीसीए और यूरोप के EASA के बीच एविएशन सेफ्टी को लेकर एक समझौता हुआ है. यह समझौता एयर सेफ्टी स्‍टैंडर्ड में सुधार, एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग और एमआरओ सेक्टर को बढ़ावा देने के मकसद से किया गया है.

अब सबकुछ अपना होगा! भारत–यूरोप ने मिलाया हाथ, ‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगी ऊंचाईZoom

एविएशन सेफ्टी को लेकर डीजीसीए और ईयू के बीच नया समझौता हुआ है. (एआइ्र इमेज)

नई दिल्ली. भारत के एविएशन सेक्टर को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. यूरोपियन यूनियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी (EASA) और भारत के डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के बीच एक अहम समझौता हुआ है. इस समझौते का मकसद हवाई सुरक्षा को बेहतर बनाना और एयरक्राफ्ट डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है. इससे ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी नई ताकत मिलने की उम्मीद है.

यह समझौता जनवरी 2026 में नई दिल्ली में हुए ईयू-इंडिया समिट के बाद तेजी से आगे बढ़ा था. इस समिट में एविएशन सेफ्टी को दोनों पक्षों के रिश्तों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया था. इसके बाद हाल ही में नई दिल्ली में एक हाई-लेवल वर्कशॉप आयोजित की गई, जिसमें इस साझेदारी की रूपरेखा तैयार की गई. इस वर्कशॉप में भारत के अलावा दक्षिण एशिया के कई देशों के एविएशन अधिकारी शामिल हुए हैं. इन देशों में श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देश भी शामिल हैं.

यह समझौता भारत के एविएशन सेक्टर को अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब लाने में मदद करेगा. ईएएसए के साथ सहयोग से भारत की प्‍लेन मैन्‍युफैक्‍चरिंग कैपेसिटी बढ़ेगी और मेक इन इंडिया को नई उड़ान मिलेगी. – डीजीसीए

इस समझौते के क्‍या होंगे फायदे

  1. इस समझौते का एक बड़ा फायदा कर्नाटक में बनने वाले एयरबस हेलिकॉप्‍टर के H125 और AS350 हेलीकॉप्टर से जुड़ा है.
  2. एयरबस ने भारत में इन हेलीकॉप्टरों का प्रोडक्‍शन शुरू करने का प्‍लान तैयार किया है. इससे देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
  3. इस समझौते से आधुनिक तकनीक का ट्रांसफर भी होगा. ये हेलीकॉप्टर आपदा राहत, मेडिकल इमरजेंसी और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में मददगार साबित होंगे.
  4. विशेषज्ञों का मानना है कि इस सहयोग से एमआरओ यानी मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल सुविधाओं को भी मजबूती मिलेगी. इससे भारत को एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस के लिए विदेशों पर निर्भरता कम होगी.

वर्कशॉप पर इन मुद्दों पर भी हुई बात

वर्कशॉप में रोजमर्रा की उड़ान से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा हुई. इसमें खराब मौसम के कारण होने वाली देरी, रनवे सुरक्षा और ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल जैसे मुद्दे शामिल रहे. दक्षिण एशियाई देशों के प्रतिनिधियों ने पहाड़ी इलाकों में फ्लाइट सेफ्टी और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों के दौरान आने वाली दिक्कतों को लेकर अपने अनुभव साझा किए.

एटीआर कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे भारत में ATR-72 विमानों के लिए मेंटेनेंस सेंटर खोलने की योजना बना रहे हैं. इससे क्षेत्रीय विमानन को और मजबूती मिलेगी. पिछले कुछ सालों में भारत का एविएशन सेक्टर तेजी से बढ़ा है. साल 2025 में 15 करोड़ से ज्यादा घरेलू यात्रियों ने हवाई यात्रा की, जबकि अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या में भी करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. ऐसे में सुरक्षा मानकों को और सख्त बनाना जरूरी हो गया है.

भारत दुनिया का तेजी से बढ़ता हुआ एविएशन बाजार है और यह साझेदारी सुरक्षा, नवाचार और पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा देगी. – पैट्रिक काय, कार्यकारी निदेशक, ईएएसए

About the Author

authorimg

Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें

By uttu

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *