कश्मीर में ईरानी झंडा फहराए जाने से भड़के अशोक, देश विरोधियों पर एक्शन की मांग
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फिल्ममेकर अशोक पंडित ने कश्मीर के लाल चौक पर लोगों द्वारा ईरानी झंडा फहराए जाने और हिंसक प्रदर्शनों पर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने मौजूदा हालात की तुलना 1990 के दौर से करते हुए कहा कि दशकों बाद भी जमीनी हालात नहीं बदले हैं. शंकर पंडित ने ‘कश्मीर हिज्बुल्लाह बनेगा’ जैसे नारों और राजनीतिक दलों की चुप्पी की कड़ी निंदा की. खुद कश्मीरी पंडितों के नरसंहार का शिकार रहे शंकर पंडित ने भारत सरकार से अपील की है कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए इन कट्टरपंथी ताकतों पर तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाए.

फिल्ममेकर अशोक पंडित ने सरकार से लगाई गुहार.
नई दिल्ली: कश्मीर के लाल चौक पर हाल में हुए प्रदर्शनों ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है. प्रदर्शनकारियों द्वारा ईरानी झंडा फहराए जाने की घटना पर फिल्ममेकर और सोशल एक्टिविस्ट अशोक पंडित ने कड़ी नाराजगी जताई है. उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए भारत सरकार को आगाह किया है कि घाटी में हालात बिगड़ रहे हैं और समय रहते कड़ी कार्रवाई की जरूरत है. शंकर पंडित का मानना है कि लाल चौक जैसी संवेदनशील जगह पर विदेशी झंडा फहराना कोई छोटी बात नहीं है, बल्कि यह देश की संप्रभुता को दी गई एक खुली चुनौती है. उन्होंने साफ कहा कि इन ‘तथाकथित’ प्रदर्शनकारियों और उनके मददगारों के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना होगा, वरना देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है.
अशोक पंडित ने आज के हालातों की तुलना साल 1990 के उस दौर से की है, जब कश्मीरी पंडितों का नरसंहार और पलायन हुआ था. उन्होंने बड़े दुख के साथ कहा कि 1990 से लेकर 2026 तक जमीनी स्तर पर बहुत कुछ नहीं बदला है. उनके मुताबिक, उस दौर में जो कट्टरपंथी नारे गूंजते थे, आज उन्हीं का स्वरूप बदलकर ‘कश्मीर हिज्बुल्लाह बनेगा’ जैसे डरावने नारों में तब्दील हो गया है. एक कश्मीरी पंडित होने के नाते अशोक ने खुद जातीय सफाए का दंश झेला है, उन्होंने सरकार को याद दिलाया कि उस वक्त भी सिस्टम की चुप्पी ने तबाही मचाई थी और आज भी घाटी और लद्दाख में हो रहे हिंसक प्रदर्शनों पर राजनीतिक दलों की खामोशी उन्हें परेशान कर रही है.
चुप्पी पर सवाल और सरकार से सीधी अपील
अशोक पंडित ने लेख के आखिरी हिस्से में लोकल नेताओं और सत्तापक्ष की चुप्पी पर तीखा हमला बोला है. उनका कहना है कि जब घाटी की बड़ी आबादी सड़कों पर हिंसक प्रदर्शन कर रही है, तो बीजेपी समेत कोई भी स्थानीय नेता इसकी खुलकर निंदा क्यों नहीं कर रहा? उन्होंने इसे ‘शक्ति का हिंसक प्रदर्शन’ करार दिया और कहा कि हम अपने ही देश के खिलाफ ऐसी एक्टिविटी को चुपचाप बैठकर नहीं देख सकते. उन्होंने केंद्र सरकार से विनती की है कि कश्मीर ही नहीं, बल्कि पूरे देश में पनप रहे इस तरह के खतरों से सख्ती से निपटा जाए. उनका मानना है कि अगर अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इतिहास खुद को दोहरा सकता है, जिसे रोकना हर हाल में जरूरी है.
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अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें
