Thu. Mar 5th, 2026

किसानों के लिए खुशखबरी रबी सीजन 2025-26 के लिए उर्वरक सब्सिडी को मंजूरी

16c151fc2318a0e0969b1062cbb161a7.webp

Published on: 01-Nov-2025

विषय सूची

पोषक तत्व आधारित सब्सिडी से किसानों को क्या फायदे होंगे

आपकी जानकारी के लिए बता दे की केंद्र सरकार ने किसानों के लिए एक राहत की घोसणा की है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में रबी सीजन 2025-26 (1 अक्टूबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक) के लिए फॉस्फेटिक और पोटाशिक (P&K) उर्वरकों पर पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (Nutrient Based Subsidy – NBS) दरों को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत देशभर के किसानों को डाई अमोनियम फॉस्फेट (DAP), एनपीकेएस (नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सल्फर) ग्रेड तथा अन्य P&K (फॉस्फेटिक और पोटाशिक) आधारित उर्वरक सस्ती दरों पर उपलब्ध होंगे।  

बजटीय प्रावधान और खर्च का अनुमान  

रबी 2025-26 सीजन के लिए इस योजना पर अनुमानित कुल खर्च लगभग 37,952.29 करोड़ रुपये रहेगा, जो खरीफ सीजन 2025 की तुलना में लगभग 736 करोड़ रुपये अधिक है। यह बढ़ोतरी उर्वरकों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आए उतार-चढ़ाव और विनिर्माण लागत में बढ़ोतरी को संतुलित करने के उद्देश्य से की गई है।  

पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना का उद्देश्य   

‘पोषक तत्व आधारित सब्सिडी’ योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को संतुलित और किफायती दर पर उर्वरक उपलब्ध कराना है, ताकि वे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हुए उत्पादन बढ़ा सकें। इस योजना के तहत सब्सिडी की दरें प्रत्येक पोषक तत्व — नाइट्रोजन (N), फास्फोरस (P), पोटाश (K) और सल्फर (S) — के आधार पर तय की जाती हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि किसान अपनी फसलों की आवश्यकता के अनुसार सही पोषक तत्वों का प्रयोग करें।  

पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना का मुख्य लाभ:

  • किसानों को सब्सिडी युक्त दरों पर उच्च गुणवत्ता वाले उर्वरकों की पहुंच।  
  • कृषि उत्पादन लागत में कमी से आय में वृद्धि।  
  • संतुलित पोषण द्वारा भूमि की दीर्घकालिक उत्पादकता में सुधार।  
  • वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों के उतार-चढ़ाव के बीच किसानों की सुरक्षा।  

उर्वरक आपूर्ति और कार्यान्वयन व्यवस्था  

सरकार यह सब्सिडी सीधे उर्वरक निर्माताओं और आयातकों को प्रदान करती है, ताकि वे किसानों को 28 विभिन्न ग्रेड के P&K उर्वरक रियायती दरों पर उपलब्ध करवा सकें। यह योजना 1 अप्रैल 2010 से लागू है और तब से भारत में फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरकों की आपूर्ति का प्रमुख आधार बनी हुई है।  

वैश्विक कीमतों का प्रभाव और सब्सिडी दरों का समायोजन  

हाल के महीनों में यूरिया, डीएपी, एमओपी (म्यूरिएट ऑफ पोटाश), और सल्फर जैसे उर्वरकों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि देखने को मिली है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने DAP और NPKS (नाइट्रोजन, फॉस्फेटिक, पोटाशिक और सल्फर )ग्रेड सहित P&K उर्वरकों पर 1 अक्टूबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक प्रभावी नई NBS दरों को मंजूरी दी है।  इन दरों के आधार पर सब्सिडी की राशि तय होगी, जो उर्वरक कंपनियों को दी जाएगी ताकि बाजार में कीमतें स्थिर और किसानों की सामर्थ्य के अनुरूप बनी रहें।  

किसानों के लिए दीर्घकालिक लाभ  

सरकार की यह पहल केवल तत्काल राहत के लिए नहीं, बल्कि दीर्घकालिक कृषि स्थिरता की दिशा में एक कदम है। इससे कृषि क्षेत्र को निम्नलिखित लाभ होंगे:  

  • किसानों की लागत पर सीधा नियंत्रण और लाभांश में सुधार।
  • मिट्टी परीक्षण आधारित संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा।
  • घरेलू खाद्य-सुरक्षा को मजबूत करने में सहयोग।  
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रियाशीलता और रोजगार में वृद्धि।  

Merikheti आपको कृषि से जुड़ी हर नई जानकारी से अवगत कराते रहते हैं। इसके तहत ट्रैक्टरों के नए मॉडलों और उनके खेतों में उपयोग से संबंधित अपडेट लगातार साझा किए जाते हैं। साथ ही, स्वराज, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, वीएसटी, और मैसी फर्ग्यूसन  प्रमुख ट्रैक्टर निर्माताओं की मासिक बिक्री रिपोर्ट भी प्रकाशित की जाती है, जिसमें थोक व खुदरा बिक्री के आंकड़ों का विस्तृत विवरण शामिल होता है। 

By uttu

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *