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LPG Crisis vs Meal : देश में एक तरफ तो एलपीजी संकट गहराता जा रहा है और दूसरी ओर उपभोक्ता अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए खानपान की आदतों में भी बदलाव ला रहे हैं. खासकर महानगरों में अब तैयार खाने अथवा ऐसे प्रोडक्ट जिसे पकाने में ज्यादा समय लगे, उसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है. आंकड़े बताते हैं कि एलपीजी की कमी के कारण उपभोक्ताओं ने रेडी टू ईट वाले प्रोडक्ट की खरीदारी बढ़ा दी है.

देश में एलपीजी संकट की वजह से रेडी टू ईट प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ी है.
नई दिल्ली. ईरान और इजराइल के बीच जारी युद्ध ने भारत ही नहीं पूरी दुनिया को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है. भारत में तो इस संकट का असर अब मोहल्ले की दुकानों तक दिखना शुरू हो गया है. सबसे ज्यादा मारामारी एलपीजी को लेकर दिख रही है, जो हर परिवार की मूलभूत जरूरत बन चुका है. बिजनेस इंटेलीजेंस प्लेटफॉर्म Bizom ने देश के तमाम इलाकों से एकत्र डाटा के आधार पर बताया है कि गैस संकट के बीच खुदरा दुकानदारों ने भी अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी है. उन्होंने कच्चे माल की जगह तैयार सामानों से अपना स्टॉक भरना शुरू कर दिया है.
Bizom की रिपोर्ट देखें तो पता चलता है कि खुदरा दुकानदारों ने अपने स्टॉक में रेडी टू ईट (RTE) और रेडी टू कुक (RTC) जैसे प्रोडक्ट की हिस्सेदारी बढ़ानी शुरू कर दी है. आंकड़े बताते हैं कि किराना स्टोर में अब ऐसे उत्पाद की खरीदारी मार्च के पहले दो सप्ताह में ही 2.9 फीसदी बढ़ा दी है, जो फरवरी के पूरे महीने में 3 फीसदी के आसपास थी, जबकि जनवरी में तो इसमें 0.3 फीसदी की गिरावट दिखी थी. पिछले साल के आंकड़े देखें तो मार्च के पहले पखवाड़े में ऐसे उत्पादों की किराना स्टोर में डिमांड ग्रोथ 2.6 फीसदी दिखी थी. पूरे साल के आंकड़े भी इसी के आसपास ही रहे थे.
आगे क्या है अनुमान
Bizom का मानना है कि आने वाले समय में जबकि ईरान युद्ध तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, ऐसे प्रोडक्ट की डिमांड और सप्लाई के बीच गैप और बढ़ सकता है. एलपीजी की कमी के कारण उपभोक्ताओं ने अपने खाना पकाने की आदतों में भी बदलाव लाना शुरू कर दिया है. अब उपभोक्ता कम गैस खपत वाले खाने और जल्दी तैयार होने वाले मील की तरफ बढ़ रहे हैं. Bizom के एनालिटिक्स हेड हर्षित बोरा का कहना है कि रेस्तरां के मेन्यू में भी लगातार कटौती हो रही है, जिससे उपभोक्ता इस तरह के रेडी टू ईट प्रोडक्ट की तरफ बढ़ रहे हैं. यही वजह है कि अब ऐसे प्रोडक्ट की डिमांड में 10.6 फीसदी से भी ज्यादा की ग्रोथ देखी जा रही है.
अनाज की डिमांड में आ रही गिरावट
Bizom देश के करीब 80 लाख आउटलेट पर एफएमसीजी प्रोडक्ट में आने वाली डिमांड और सप्लाई के आंकड़ों पर नजर रखता है. उसके आंकड़े बताते हैं कि मार्च के पहले पखवाड़े में चावल, गेहूं और दालों जैसे अनाज की डिमांड में कमी आई है. इस दौरान इन कमोडिटी की डिमांड ग्रोथ 16 फीसदी रही, जो पिछले साल की समान अवधि में 21 फीसदी से भी ज्यादा दिखी थी. फरवरी में भी ऐसी कमोडिटी की ग्रोथ 4 फीसदी थी, जबकि तैयार खाने की डिमांड ग्रोथ 4.9 फीसदी पहुंच गई थी.
खाने की आदतों में भी आ रहा बदलाव
सुपरमार्केट और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से किए जाने वाले ऑर्डर के आंकड़े भी बताते हैं कि लोगों के खाने-पीने की आदतों में तेजी से बदलाव आ रहा है. ग्राहक ऐसे उत्पाद खरीद रहे हैं, जिसे पकाने में ज्यादा समय न लगे. अमेजन पर पिछले कुछ समय में नूडल्स, पैकेट वाले खाने, स्नैक्स और बेवरेज की बिक्री में 15 फीसदी का उछाल देखा गया है, जबकि दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बैंगलुरु जैसे महानगरों में रेडी टू ईट प्रोडक्ट की डिमांड में 20 फीसदी उछाल दिख रहा है. इससे साफ जाहिर है कि एलपीजी संकट ने खरीदारों और विक्रेता दोनों को ही पारंपरिक प्रोडक्ट से अलग सोचने पर मजबूर कर दिया है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
