भारत ही बुरे वक्त का साथी, यूनुस के जाते ही बांग्लादेश को आई अक्ल
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मोहम्म यूनुस के बाद अब भारत और बांग्लादेश के संबंध सुधरने लगे हैं. प्रधानमंत्री तारिक रहमान इस बात को अच्छी तरह से समझ चुके हैं कि बुरे वक्त में भारत ही ढाका का विश्वसनीय साथी है. चीन और पाकिस्तान बस मौसमी साथी हैं.

मोहम्मद यूनुस ने अपने कार्यकाल के दौरान जिस तरह से भारत के साथ दुश्मनी बढ़ाई थी, लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई तारिक रहमान की सरकार ने उसे खारिज कर दिया है.
नई दिल्ली. ग्लोबल सप्लाई चेन के बाधित होने के बीच बांग्लादेश के लिए भारत की अहमियत काफी बढ़ गई है. हालांकि, दोनों देशों के बीच व्यापार और कनेक्टिविटी पर व्यापक बातचीत हुई है, लेकिन आपातकालीन आपूर्ति सुरक्षा को लेकर अभी तक कोई औपचारिक और बाध्यकारी समझौता नहीं हुआ है. ‘यूरेशिया टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2020 से 2022 के बीच कंटेनर फ्रेट दरों में तेज वृद्धि और बंदरगाहों पर बढ़ते बैकलॉग के कारण बांग्लादेश को यह महसूस हुआ कि उसकी मौजूदा सप्लाई चेन क्राइसिस के समय के लिए तैयार नहीं थीं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दौरान दवाइयों के कच्चे माल और औद्योगिक इनपुट की कमी हो गई या उनकी आपूर्ति में देरी हुई. कई जरूरी सामान दूर-दराज के बंदरगाहों पर फंस गए, जबकि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी इजाफा हुआ. ऐसे में सबसे तेज आपूर्ति देने वाला देश वही था, जिसकी सीमा बांग्लादेश से लगी हुई है यानी भारत. रिपोर्ट के मुताबिक, महामारी से पहले बांग्लादेश हर साल चीन और भारत से बड़ी मात्रा में दवाओं के लिए जरूरी एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) आयात करता था. लेकिन जब चीन में फैक्ट्रियां बंद हुईं और वैश्विक लॉजिस्टिक्स बाधित हुआ, तब भारत की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई.
48 घंटे में आपूर्ति
रिपोर्ट में बताया गया कि भारतीय कंपनियों ने घरेलू चुनौतियों के बावजूद प्रतिबंध हटने के बाद सीमा पार आपूर्ति को तेजी से बहाल किया. बेनापोल या पेट्रापोल के रास्ते ट्रक से दवाइयों का कच्चा माल 2 दिन के भीतर ढाका पहुंच सकता है, जबकि शंघाई या रॉटरडैम से समुद्री मार्ग के जरिए आने में कहीं ज्यादा समय लगता है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बांग्लादेश का दवा उद्योग, जो दक्षिण एशिया में मजबूत माना जाता है, मुख्य रूप से तैयार दवाइयां बनाता है. लेकिन इन दवाओं के लिए जरूरी कच्चे रसायन (एपीआई) आयात पर निर्भर हैं, जिनके प्रमुख आपूर्तिकर्ता भारत और चीन हैं. ऐसे में चीन से आपूर्ति में व्यवधान के दौरान भारत एक विश्वसनीय विकल्प बनकर उभरा.
भारत ही एकमात्र सहारा
ऊर्जा जरूरतों को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अपने रिफाइनरी नेटवर्क और बांग्लादेश-भारत मैत्री पाइपलाइन के जरिए आपात स्थिति में डीजल आपूर्ति करने की क्षमता रखता है. हालांकि, कुछ मौकों पर ऐसा किया भी गया है, लेकिन इसे अब तक औपचारिक समझौते का रूप नहीं दिया गया है. रिपोर्ट ने सुझाव दिया है कि दोनों देशों को आपातकालीन आपूर्ति सुरक्षा के लिए एक स्पष्ट, संरचित और कानूनी रूप से बाध्यकारी व्यवस्था बनानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट के दौरान आपूर्ति बाधित न हो.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें
