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जम्‍मू-कश्‍मीर में हर साल कितनी पैदा होती है केसर, सरकार ने बताया 5 साल का आंकड़ा, लगातार कम हो रहा उत्‍पादन

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नई दिल्‍ली. लाखों में बिकने वाली केसर का उत्‍पादन लगातार कम होता जा रहा है. जम्‍मू-कश्‍मीर सरकार ने आंकड़े जारी कर बताया है कि प्रदेश में पिछले 5 साल के दौरान महज 90 टन केसर का ही उत्‍पादन हुआ है. वैसे तो सरकार का दावा है कि उत्‍पादन में सुधार हो रहा है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में न सिर्फ केसर का रकबा कम हो रहा, बल्कि प्रति हेक्‍टेअर उत्‍पादन में भी गिरावट आ रही है. फिलहाल सारी उम्‍मीदें नेशनल मिशन ऑन सैफ्रॉन पर टिकी हैं, जो केसर का उत्‍पादन बढ़ाने के लिए एक राष्ट्रीय पहल है.

जम्मू-कश्मीर सरकार ने बताया है कि पिछले पांच वर्षों में केंद्र शासित प्रदेश में 90 मीट्रिक टन से अधिक केसर का उत्पादन हुआ है. सरकार ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में कुल उत्पादन और उत्पादकता में सुधार देखने को मिला है. नेशनल कांफ्रेंस के विधायक हसनैन मसूदी द्वारा केसर उत्पादन से जुड़े सवाल के लिखित जवाब में राज्य के कृषि मंत्री जाविद अहमद डार ने बताया कि नेशनल मिशन ऑन सैफ्रॉन शुरू होने से पहले केसर की खेती का क्षेत्र और उत्पादकता में काफी गिरावट आई थी.

कितनी केसर का निर्यात
डार ने बताया कि साल 2021 से 2025 के बीच केंद्र शासित प्रदेश में 90.28 मीट्रिक टन केसर का उत्पादन दर्ज किया गया है और 80 मीट्रिक टन से अधिक केसर का निर्यात किया गया है. 2024-25 में केसर उत्पादन का मूल्य 534.53 करोड़ रुपये आंका गया, जबकि निर्यात का मूल्य 486.43 करोड़ रुपये रहा. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2020-21 में कुल केसर उत्पादन 17.33 मीट्रिक टन, 2021-22 में 14.87 मीट्रिक टन, 2022-23 में 14.94 मीट्रिक टन, 2023-24 में 23.53 मीट्रिक टन और 2024-25 में 19.58 मीट्रिक टन रहा.

एक हेक्‍टेअर में कितना उत्‍पादन
सरकार के मुताबिक, इस अवधि के दौरान औसत उत्पादकता 4 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से 6.33 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के बीच रही. डार ने बताया कि केसर की खेती का क्षेत्र 5,707 हेक्टेयर से घटकर 3,715 हेक्टेयर रह गया, जबकि उत्पादकता 2000-01 में 1.27 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर और 2003-04 में 1.88 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के निचले स्तर पर पहुंच गई, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आई. हालांकि, 2010-11 में नेशनल मिशन ऑन सैफ्रॉन के तहत इकोनॉमिक रिवाइवल ऑफ जेके सैफ्रॉन सेक्टर प्रोजेक्ट लागू होने के बाद गिरावट का यह सिलसिला थम गया और केसर की खेती का क्षेत्र 3,715 हेक्टेयर पर स्थिर हो गया.

प्रदेश में बढ़ रहा केसर का उत्‍पादन
सरकार ने बताया कि कुल मिलाकर उत्पादकता में बढ़ोतरी का रुझान देखने को मिला है, हालांकि 2014-15, 2017-18 और 2018-19 में बाढ़ और लंबे सूखे के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ और उत्पादकता क्रमशः 1.50, 1.64 और 1.75 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक गिर गई. फिलहाल मिशन के तहत 2,598.73 हेक्टेयर क्षेत्र को पुनर्जीवित किया गया है, जहां 2023-24 में उत्पादकता 6.96 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर और 2024-25 में 5.6 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रही.

मिशन का क्‍या असर दिखा
डार ने बताया कि मिशन ने केसर की खेती के क्षेत्र में गिरावट को रोकने में सफलता पाई है, जो 2010-11 से 3,715 हेक्टेयर (कश्मीर डिवीजन में 3,665 हेक्टेयर और किश्तवाड़ में 50 हेक्टेयर) पर स्थिर है. उन्होंने बताया कि पुनर्जीवित क्षेत्रों में उत्पादकता 2009-10 में 2.50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 2023 में 4.42 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है. साथ ही सैफ्रॉन पार्क की स्थापना से किसानों को बेहतर दाम मिले हैं, जो 2021-22 में 80,000 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 2.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं.

By uttu

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