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डेयरी फार्मिंग में कमाल: सुनील मेहला की गाय ने बनाया रिकॉर्ड, एक दिन में 78 लीटर दूध

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Published on: 13-Mar-2026

Updated on: 13-Mar-2026

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करनाल की गाय बनी चर्चा का विषय – जानें, पूरी जानकारी 

हरियाणा के करनाल में आयोजित प्रतिष्ठित नेशनल डेरी मेला करनाल में इस बार भी प्रदेश के पशुपालकों का दबदबा देखने को मिला। इस प्रतियोगिता में झंझाड़ी गांव के पशुपालक Sunil Mehla की गायों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। उनकी एक गाय ने एक दिन में 78 लीटर दूध देकर प्रतियोगिता में पहला स्थान प्राप्त किया। इतना ही नहीं, उनकी अन्य चार गायों ने भी एक दिन में 75 लीटर से अधिक दूध उत्पादन कर प्रतियोगिता में बेहतरीन प्रदर्शन किया और दूसरे तथा तीसरे स्थान पर अपनी जगह बनाई। इस उपलब्धि ने न केवल सुनील मेहला बल्कि उनके गांव और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया।

राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में दिखा दम

राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित इस डेयरी मेले में देश के कई राज्यों से पशुपालक अपने बेहतरीन दुधारू पशुओं के साथ पहुंचे थे। प्रतियोगिता काफी कड़ी थी, क्योंकि हर पशुपालक अपने उच्च उत्पादन वाले पशुओं के साथ मैदान में उतरा था। ऐसे में Sunil Mehla की गाय का 78 लीटर दूध उत्पादन करना एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस शानदार प्रदर्शन के कारण उनकी गाय ने प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया और मेले में मौजूद पशुपालकों तथा विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

पहले भी बना चुकी हैं रिकॉर्ड

पशुपालक Sunil Mehla ने बताया कि उनकी गायें पहले भी कई पशु मेलों में चैंपियन रह चुकी हैं। पिछले वर्ष National Dairy Research Institute में आयोजित डेयरी मेले में उनकी एक गाय ने एक दिन में 80 लीटर से अधिक दूध उत्पादन कर एशिया स्तर का रिकॉर्ड बनाया था। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के पशुपालकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी। उन्होंने बताया कि उनकी गायें कई राज्यों में आयोजित पशु मेलों और प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीत चुकी हैं। कई बार इन गायों के लिए लाखों रुपये तक के ऑफर भी आए, लेकिन उन्होंने अपनी गायों को बेचने का विचार नहीं किया। उनका कहना है कि इन गायों की वजह से ही उनके गांव, जिले और राज्य की पहचान दूर-दूर तक बनी है।

2016 से कर रहे हैं पशुपालन

Sunil Mehla ने बताया कि वे झंझाड़ी गांव में “शैंकी और सिल्लू डेयरी फार्म” नाम से डेयरी फार्म संचालित करते हैं। उन्होंने वर्ष 2016 में अपने भाई के साथ मिलकर पशुपालन का कार्य शुरू किया था। शुरुआत में उन्होंने सीमित संख्या में पशुओं के साथ डेयरी का काम शुरू किया, लेकिन धीरे-धीरे मेहनत और सही प्रबंधन के कारण उनका डेयरी फार्म लगातार आगे बढ़ता गया। वर्ष 2017 से वे नियमित रूप से विभिन्न पशु मेलों में अपने पशुओं को लेकर भाग ले रहे हैं और कई बार पुरस्कार भी जीत चुके हैं।

इस बार करनाल में आयोजित National Dairy Mela में वे अपनी पांच गायों को लेकर पहुंचे थे। इनमें से एक गाय ने 78 लीटर दूध देकर पहला स्थान हासिल किया, जबकि बाकी चार गायों ने भी 75 लीटर से अधिक दूध उत्पादन कर प्रतियोगिता में दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त किया।

संतुलित खुराक और अच्छी देखभाल से बढ़ता है दूध उत्पादन

सुनील मेहला का मानना है कि पशुओं की बेहतर दूध उत्पादन क्षमता के पीछे उनकी सही देखभाल और संतुलित आहार का बहुत बड़ा योगदान होता है। वे अपनी गायों को नियमित रूप से हरा चारा, सलाद, संतुलित फीड और तोड़ी देते हैं। इसके अलावा पशुओं को साफ-सुथरे वातावरण में रखा जाता है और समय-समय पर उनकी स्वास्थ्य जांच भी कराई जाती है।

उनका कहना है कि डेयरी फार्म से उन्हें अच्छी आय प्राप्त होती है। जहां खेती से साल में एक या दो बार ही आय होती है, वहीं पशुपालन ऐसा व्यवसाय है जिससे हर महीने नियमित आय होती रहती है। यही वजह है कि कई किसान अब पशुपालन को खेती के साथ जोड़कर अपनी आय बढ़ा रहे हैं।

डेयरी फार्म में 200 से अधिक पशु

सुनील मेहला के डेयरी फार्म में वर्तमान समय में करीब 200 पशु मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ महीनों में वे करीब छह पशु मेलों में भाग ले चुके हैं। इन प्रतियोगिताओं में उनकी गायों ने पांच बार पहला स्थान और एक बार दूसरा स्थान हासिल किया है। लगातार मिल रही इस सफलता के कारण उनके डेयरी फार्म की पहचान भी तेजी से बढ़ रही है और कई लोग उनके फार्म को देखने तथा पशुपालन की जानकारी लेने के लिए पहुंचते हैं।

गर्मी के मौसम में विशेष देखभाल

सुनील मेहला का कहना है कि दुधारू पशुओं की देखभाल हर मौसम में जरूरी होती है, लेकिन गर्मियों में विशेष ध्यान देना पड़ता है। इस मौसम में पशुओं को समय-समय पर नहलाना जरूरी होता है ताकि उन्हें गर्मी से राहत मिल सके। इसके अलावा उनके शेड में पंखे और कूलर लगाए जाते हैं, जिससे तापमान नियंत्रित रहता है और पशुओं को आरामदायक वातावरण मिलता है।

उन्होंने बताया कि उनकी गायों की कीमत कई बार लाखों रुपये तक लग चुकी है, लेकिन वे उन्हें बेचने का कोई इरादा नहीं रखते। उनका मानना है कि इन गायों की वजह से ही उन्हें पूरे हरियाणा और देश के कई हिस्सों में पहचान मिली है, इसलिए वे इनकी देखभाल को अपनी सबसे बड़ी जिम्मेदारी मानते हैं।

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By uttu

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