भारतीय वायुसेना (IAF) ने अमेरिकी कंपनी GE एयरोस्पेस के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है. इस समझौते के तहत तेजस फाइटर जेट के F404-IN20 इंजन के लिए देश में ही एक डिपो सुविधा यानी मेंटेनेंस सेंटर स्थापित किया जाएगा. यह सेंटर पूरी तरह भारतीय वायुसेना चलाएगी, जबकि GE एयरोस्पेस तकनीकी सहायता, ट्रेनिंग और स्पेयर पार्ट्स देगी.
इस डिपो के बनने से तेजस के इंजनों की मरम्मत अब विदेश भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे मरम्मत का समय काफी कम हो जाएगा. तेजस की फ्लीट ज्यादा तैयार रह सकेगी. यह कदम भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
क्या होगा इस डिपो में?
यह समझौता GE एयरोस्पेस और भारतीय वायुसेना के बीच चली आ रही 40 साल पुरानी साझेदारी का अगला चरण है. GE एयरोस्पेस की वाइस प्रेसिडेंट रीटा फ्लाहर्टी ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों को सपोर्ट करना हमारी प्राथमिकता है. इस नए डिपो के जरिए हम तेजस के F404-IN20 इंजनों की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे. भारतीय वायुसेना को अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध कराएंगे.
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GE एयरोस्पेस भारत में क्या कर रही है?
GE एयरोस्पेस भारत में एयरोस्पेस इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है. कंपनी ने डिजाइन, विकास, निर्माण और रखरखाव सभी क्षेत्रों में भारत को सहयोग दे रही है. पुणे स्थित कारखाने में पिछले दस साल में 5000 से ज्यादा लोगों को मैन्युफैक्चरिंग स्किल्स का प्रशिक्षण दिया जा चुका है.

कंपनी के दो साल के एडिसन इंजीनियरिंग डेवलपमेंट प्रोग्राम से अब तक 150 इंजीनियर पास आउट हो चुके हैं. सितंबर 2025 में GE एयरोस्पेस फाउंडेशन और यूनाइटेड वे के साथ मिलकर बेंगलुरु में नेक्स्ट इंजीनियर्स प्रोग्राम शुरू किया गया, जिसके जरिए 4000 युवा इंजीनियरिंग छात्रों को कॉलेज और करियर की तैयारी में मदद मिलेगी.
तेजस के अलावा GE के इंजन कहां-कहां इस्तेमाल हो रहे हैं?
F404 इंजन सिर्फ तेजस को ही नहीं, बल्कि भारतीय नौसेना के P-8I समुद्री गश्ती विमान और MH-60R हेलिकॉप्टर को भी पावर देते हैं. भारतीय वायुसेना के AH-64 अपाचे हेलिकॉप्टर भी GE एयरोस्पेस के इंजन से चलते हैं. नौसेना के पहले स्वदेशी विमान वाहक पोत INS विक्रांत और P-17 शिवालिक क्लास फ्रिगेट्स को भी GE के LM2500 मरीन गैस टरबाइन इंजन से शक्ति मिलती है.
यह समझौता भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तेजस जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमान की रखरखाव क्षमता देश के अंदर ही बढ़ जाएगी. विदेशी निर्भरता कम होगी, समय और पैसा दोनों की बचत होगी. तेजस की ऑपरेशनल तैयारियों में काफी सुधार आएगा.
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