थार में अग्नि वर्षा: टी-90-अपाचे का कहर, तस्वीरें देख थर्राएगा दुश्मन का कलेजा
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भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने राजस्थान के पोखरण में अभ्यास अग्नि वर्षा के जरिए अपनी विध्वंसक मारक क्षमता का प्रदर्शन किया. इस संयुक्त युद्धाभ्यास में टी-90 टैंक, के-9 वज्र, और अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर जैसे हाई-टेक हथियारों ने सटीक प्रहार किए. ड्रोन तकनीक और नेटवर्क-आधारित कमांड सिस्टम के सफल परीक्षण ने सेना के आधुनिक युद्ध कौशल को दर्शाया. 25 देशों के पत्रकारों की उपस्थिति में हुआ यह अभ्यास भारत की आत्मनिर्भरता और सीमा सुरक्षा के प्रति अडिग संकल्प का प्रतीक है.

रेगिस्तान में संयुक्त मारक क्षमता का प्रदर्शन: भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने थार के रेगिस्तान में ‘अभ्यास अग्नि वर्षा’ के माध्यम से अपनी ऑपरेशनल तैयारियों को धार दी. इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में थल और वायु सेना के बीच सटीक तालमेल और संयुक्त युद्ध क्षमता का परीक्षण करना था, जिसमें भारतीय जांबाजों ने अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की. (PTI)

स्वदेशी और आधुनिक हथियारों का संगम: इस सैन्य अभ्यास में भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति की झलक दिखाई दी. रेगिस्तान की रेतीली पिचों पर टी-90 टैंक, इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल और के-9 वज्र होवित्जर ने अपनी गर्जना से दुश्मनों को कड़ा संदेश दिया. इसके साथ ही बोफोर्स और स्वदेशी शारंग तोप प्रणालियों ने लंबी दूरी तक अचूक निशाना साधने की अपनी क्षमता का सफल प्रदर्शन किया.

अपाचे और एएलएच की हवाई ताकत: जमीन पर तोपों की गूंज के साथ आसमान में भी भारतीय सेना का दबदबा दिखा. एएलएच डब्ल्यूएसआई (रुद्र) और दुनिया के सबसे खतरनाक अटैक हेलीकॉप्टर ‘अपाचे’ ने कृत्रिम ठिकानों पर जोरदार हमले किए. हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों और रॉकेट प्लेटफॉर्म्स ने इस इंटीग्रेटेड अभ्यास में अपनी बहु-आयामी मारक शक्ति का लोहा मनवाया.
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ड्रोन और हाई-टेक युद्ध कौशल: ‘अग्नि वर्षा’ में भविष्य के युद्धों को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम का बड़े पैमाने पर परीक्षण किया गया. निगरानी और स्ट्राइक ड्रोन की मदद से दुश्मन की लोकेशन ट्रेस करना और प्रिसिजन स्ट्राइक रॉकेट के जरिए उन्हें पलक झपकते ही तबाह करने की तकनीक ने भारतीय सेना के तकनीकी आधुनिकीकरण को स्पष्ट रूप से दर्शाया. (PTI)

नेटवर्क-आधारित कमांड एवं कंट्रोल: इस युद्धाभ्यास की सबसे बड़ी विशेषता इसका डिजिटल और नेटवर्क-केंद्रित होना था. मैकेनाइज्ड फोर्सेज ने नेटवर्क-आधारित कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम का उपयोग कर युद्ध के मैदान में सटीक सूचनाओं के आदान-प्रदान और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता का परीक्षण किया. यह तकनीक युद्ध के दौरान सैनिकों के बीच बेहतर तालमेल और न्यूनतम क्षति सुनिश्चित करती है. (PTI)

आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशीकरण की छाप: अभ्यास में उपयोग किए गए अधिकांश हथियार और प्रणालियां भारत की ‘आत्मनिर्भर’ बनने की दिशा में बढ़ते कदमों को दर्शाती हैं. स्वदेशी तकनीकों, उन्नत आर्टिलरी प्लेटफॉर्म और आधुनिक संचार उपकरणों के सफल उपयोग ने यह साबित कर दिया कि भारतीय सेना अब विदेशी निर्भरता को कम करते हुए घरेलू तकनीक के साथ निर्णायक युद्ध लड़ने के लिए पूरी तरह सक्षम है. (PTI)

त्वरित और निर्णायक सैन्य कार्रवाई: ‘अग्नि वर्षा’ केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि किसी भी संभावित संघर्ष की स्थिति में त्वरित और निर्णायक सैन्य कार्रवाई का एक संदेश है. इस युद्धाभ्यास के सफल समापन ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि भारतीय सेना की दक्षिणी कमान किसी भी चुनौती का सामना करने और देश की सीमाओं की रक्षा करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है. (PTI)
