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धड़ल्‍ले से चल रही थी ड्रोन-GPS जैमर की ऑनलाइन बिक्री, CCPA ने 6 ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लिया एक्‍शन | CCPA Notice to E-Commerce Platforms Over Drone GPS Jammer Consumer Protection Act violation india

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ऑनलाइन चल रही थी ड्रोन-GPS जैमर की बिक्री, 6 ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर एक्‍शन

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सीसीपीए ने ड्रोन जैमर और जीपीएस जैमर जैसे प्रतिबंधित वायरलेस डिवाइसेस की ऑनलाइन लिस्टिंग पर 6 ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी किया है. कंपनियों से लाइसेंस, अप्रूवल और खरीदारों की पूरी जानकारी मांगी गई है.

ऑनलाइन चल रही थी ड्रोन-GPS जैमर की बिक्री, 6 ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर एक्‍शनZoom

Action Against Drone-GPS Jammer E-Sales: केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर रिस्ट्रिक्टेड ड्रोन इक्विपमेंट की बिक्री को लेकर बड़ा एक्शन लिया है. अथॉरिटी ने छह ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है कि आखिर कैसे उनकी वेबसाइट्स पर एंटी-ड्रोन सिस्टम” ड्रोन जैमर और जीपीएस जैमर जैसे रिस्ट्रिक्टेड वायरलेस ट्रांसमिटिंग डिवाइसेस खुलेआम लिस्टिंग के लिए उपलब्ध थे. सीसीपीए का कहना है कि यह मामला सीधे-सीधे कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 और टेलीकॉम रेगुलेशन के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है.

जांच में सामने आया कि कई प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे डिवाइसेस को इस तरह प्रमोट किया जा रहा था, मानो आम कंज्यूमर इन्हें आसानी से खरीद सकता है. जबकि रियलिटी यह है कि भारत में ड्रोन जैमर और सिग्नल जैमिंग इक्विपमेंट स्ट्रिक्टली रेगुलेटेड कैटेगरी में आते हैं और इनके पजेशन तथा यूज पर सख्त लीगल रिस्ट्रिक्शंस लागू हैं. अथॉरिटी के अनुसार, बिना जरूरी लाइसेंसिंग इंफॉर्मेशन और रेगुलेटरी अप्रूवल डिटेल्स के इन प्रोडक्ट्स को डिस्प्ले करना कंज्यूमर्स को गुमराह करने जैसा है.

इन ई-कॉमर्स कंपनियों को जारी किया गया है नोटिस

  1. एम/एस एवर्स,
  2. इंडिया मार्ट,
  3. एक्सबूम,
  4. जावियाट एयरोस्पेस,
  5. मेसर्स एयरवन रोबोटिक्स और
  6. मेसर्स मैवरिक ड्रोन्स एंड टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड.

जांच के बाद कंपनियों से मांगी गई ये जानकारियां

  1. बायर्स को यह जानकारी भी नहीं दी गई कि ऐसे डिवाइसेस केवल ऑथराइज्ड गवर्नमेंट एजेंसियां या लॉ एनफोर्समेंट बॉडीज़ ही लीगली इंपोर्ट और यूज कर सकती हैं.
  2. सीसीपीए ने सभी कंपनियों को डिटेल्ड इंफॉर्मेशन सबमिट करने का निर्देश दिया है. इसमें इंपोर्ट लाइसेंस, परचेज इनवॉइस और सोर्सिंग डॉक्यूमेंट्स की कॉपीज शामिल हैं.
  3. डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (डीओटी), डब्ल्यूपीसी विंग, डीजीएफटी, कैबिनेट सेक्रेटेरिएट और मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स से प्राप्त रेगुलेटरी अप्रूवल्स का पूरा रिकॉर्ड भी मांगा गया है.
  4. अथॉरिटी यह भी जानना चाहती है कि कंपनियों ने रिस्ट्रिक्टेड डिवाइसेस को कमर्शियल सेल के लिए किस लीगल बेसिस पर ऑफर किया था.
  5. नोटिस में पिछले दो वर्षों के दौरान बेची गई यूनिट्स की संख्या, बायर्स की कंप्लीट डिटेल्स और प्लेटफॉर्म पर एक्टिव थर्ड-पार्टी सेलर्स की जानकारी भी मांगी गई है.
  6. साथ ही, कंपनियों से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि इल्लीगल लिस्टिंग्स को हटाने और फ्यूचर वायलेशंस रोकने के लिए क्या करेक्टिव स्टेप्स उठाए गए हैं.

प्राइमा फेसाई यह मामला मिसलीडिंग एडवर्टाइजमेंट और अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस की कैटेगरी में आता है, क्योंकि प्रोडक्ट लिस्टिंग्स में यह साफ नहीं बताया गया कि इन उपकरणों का उपयोग आम नागरिकों के लिए प्रोहीबिटेड है. जांच के दौरान यह भी पाया गया कि कई लिस्टिंग्स में मैंडेटरी कंप्लायंस डिटेल्स जैसे इक्विपमेंट टाइप अप्रूवल (ईटीए) या वायरलेस प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन (डब्ल्यूपीसी) सर्टिफिकेशन का कोई उल्लेख नहीं था. – केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण

भारत में ड्रोन जैमर और जीपीएस जैमिंग डिवाइसेस को लेकर कानूनी नियम क्या हैं?
ड्रोन जैमर और जीपीएस जैमिंग डिवाइसेस भारत में सामान्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की तरह इस्तेमाल या इंपोर्ट नहीं किए जा सकते हैं. ये डिवाइसेस इंडियन टेलीग्राफ एक्ट 1885 और वायरलेस टेलीग्राफी एक्ट 1933 के तहत रेगुलेटेड हैं. इनके इंपोर्ट पर फॉरेन ट्रेड (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट 1992 और डीजीएफटी नोटिफिकेशंस लागू होते हैं. आम परिस्थितियों में केवल स्टैच्यूटरी अप्रूवल मिलने के बाद ही ऑथराइज्ड सरकारी या सुरक्षा एजेंसियों को इनका इस्तेमाल या आयात करने की अनुमति दी जाती है, ताकि कम्युनिकेशन सिस्टम्स पर अनियंत्रित प्रभाव न पड़े.

सिग्नल जैमर्स को सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील क्यों माना जाता है?
एक्सपर्ट्स के अनुसार सिग्नल जैमर्स रेडियो, मोबाइल नेटवर्क और जीपीएस जैसे महत्वपूर्ण कम्युनिकेशन सिस्टम्स को बाधित कर सकते हैं, जिससे नेशनल सिक्योरिटी और पब्लिक सेफ्टी दोनों प्रभावित हो सकती हैं. यदि इनका गलत इस्तेमाल किया जाए तो इमरजेंसी सर्विसेज, एयर ट्रैफिक कम्युनिकेशन या सुरक्षा एजेंसियों के ऑपरेशन तक प्रभावित हो सकते हैं. इसी वजह से टेलीकॉम अथॉरिटीज इनके लाइसेंसिंग, ऑपरेशन और डिस्ट्रीब्यूशन पर बेहद स्ट्रिक्ट कंट्रोल रखती हैं, ताकि तकनीक का उपयोग केवल वैध और नियंत्रित उद्देश्यों तक सीमित रहे.

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की इस मामले में क्या जिम्मेदारी तय की गई है?
कंज्यूमर प्रोटेक्शन (ई-कॉमर्स) रूल्स, 2020 के रूल 4 के तहत ऑनलाइन मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म्स पर यह कानूनी जिम्मेदारी डाली गई है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले प्रोडक्ट्स की ड्यू डिलिजेंस करें और सुनिश्चित करें कि वे लागू कानूनों का पालन करते हों. यदि कोई प्लेटफॉर्म बिना वेरिफिकेशन के रिस्ट्रिक्टेड वायरलेस इक्विपमेंट या जैमर डिवाइसेस की बिक्री को बढ़ावा देता है, तो उसके खिलाफ पीनल एक्शन लिया जा सकता है. सीसीपीए पहले भी एडवाइजरी जारी कर कंपनियों को चेतावनी दे चुका है कि डिजिटल मार्केटप्लेस के जरिए बैन या रेगुलेटेड प्रोडक्ट्स की इल्लीगल सेल रोकना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें

By uttu

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