नक्सल-मुक्त भारत पर लोकसभा में 30 मार्च को चर्चा, जानें कौन करेंगे शुरुआत
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Naxal-Free India Updates: भारत में नक्सलवाद एक नासूर की तरह है. नक्सल प्रभावित इलाकों यानी रेड कॉरिडोर में दशकों तक खूब खून-खराबा हुआ है. लेकिन अब भारत में नक्सलवाद अपनी समाप्ति की ओर है. अमित शाह ने नक्सल मुक्त भारत के लिए मार्च 2026 की तिथि तय की है.

अमित शाह ने नक्सल मुक्त भारत के लिए मार्च 2026 की डेडलाइन तय की है. इससे पहले 30 मार्च को लोकसभा में इसपर चर्चा होगी. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. देश को नक्सलवाद से मुक्त करने के लक्ष्य की दिशा में केंद्र सरकार के प्रयासों पर 30 मार्च को लोकसभा में अहम चर्चा होने जा रही है. संसद के निचले सदन के कार्यसूची के अनुसार, इस विषय पर अल्पकालिक चर्चा नियम 193 के तहत शुरू की जाएगी, जिसकी पहल शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे करेंगे. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही कई मौकों पर यह स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करना है. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें संयुक्त रूप से रणनीति पर काम कर रही हैं, जिसमें सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ पुनर्वास और मुख्यधारा में शामिल करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है.
पिछले एक वर्ष में नक्सल विरोधी अभियानों में उल्लेखनीय सफलता मिली है. कई बड़े माओवादी नेताओं ने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण किया है. हाल ही में ओडिशा में कुख्यात माओवादी नेता सुकृ समेत चार अन्य ने 25 मार्च को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया. एडीजी (एंटी-नक्सल ऑपरेशन) संजीव पांडा के अनुसार, इन सभी पर कुल 66 लाख रुपये का इनाम घोषित था. आत्मसमर्पण के दौरान पांच हथियार भी जमा कराए गए, जिनमें एक AK-47 और एक INSAS राइफल शामिल है. पांडा ने बताया कि कंधमाल जिले में अब माओवादियों की संख्या बेहद सीमित रह गई है और यह आंकड़ा एकल अंक में सिमटकर 8-9 तक पहुंच गया है. उन्होंने भरोसा जताया कि तय समयसीमा तक ठोस परिणाम हासिल करने के लिए अभियान और तेज किए जाएंगे. साथ ही उन्होंने शेष माओवादियों से आत्मसमर्पण की अपील करते हुए आश्वासन दिया कि उन्हें सरकार की सभी पुनर्वास नीतियों का लाभ दिया जाएगा.
क्या है रूल 193?
बता दें कि गृहमंत्री अमित शाह ने 30 मार्च 2026 की तिथि को भारत को नक्सल से मुक्त करने का टार्गेट रखा है. लोकसभा कार्यसूची के अनुसार, सोमवार 30 मार्च को संसद में नक्सलवाद खात्मे पर किए गए प्रयासों पर चर्चा के लिए समय निर्धारित किया गया है. रूल 193 के तहत श्रीकांत शिंदे इस चर्चा की शुरुआत करेंगे. इस चर्चा में सरकार की ओर से सदन में जवाब दिया जाएगा कि नक्सलवाद का मुकाबला करने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं. नियम 193 के अंतर्गत चर्चा में सदन के समक्ष कोई औपचारिक प्रस्ताव प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं है. अतः इस नियम के अंतर्गत आने वाले मामलों पर चर्चा के बाद मतदान नहीं हो सकता. सूचना देने वाला सदस्य संक्षिप्त वक्तव्य दे सकता है और अध्यक्ष को पूर्व सूचना दे चुके सदस्यों को चर्चा में भाग लेने की अनुमति दी जा सकती है.
बस्तर रीजन में भी सफलता
इसी तरह छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र (जो लंबे समय से नक्सल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है) वहां भी बड़ी सफलता मिली है. दंडकारण्य वन क्षेत्र में सक्रिय दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के सदस्य पप्पा राव सहित 17 माओवादी कैडर ने 17 मार्च को आत्मसमर्पण किया. बस्तर आईजी पी. सुंदरराज ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि पहली बार इस क्षेत्र में नक्सली संगठन प्रभावी रूप से नेतृत्वविहीन हो गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा बलों की सख्ती के साथ-साथ पुनर्वास नीति और सामाजिक समावेशन की रणनीति ने नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया है. अब लोकसभा में होने वाली चर्चा के दौरान सरकार अपने प्रयासों और उपलब्धियों का ब्यौरा पेश करेगी, साथ ही आगे की रणनीति पर भी विचार किया जाएगा.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें
