असम में चुनावी माहौल के बीच विकास और पर्यटन को लेकर भी चर्चा तेज है. आजतक के खास कार्यक्रम पंचायत आजतक असम में इस विषय पर बातचीत हुई. इस दौरान मंच पर राज्य के पर्यटन क्षेत्र से जुड़े अफसर और उद्यमियों ने असम को वैश्विक पर्यटन केंद्र बनाने की संभावनाओं पर विस्तार से बात की.
चर्चा की शुरुआत कहा गया कि असम को “Land of the Red River and Blue Hills” कहा जाता है. देश में इस्तेमाल होने वाली चाय का 50 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा असम के चाय बागानों से आता है. राज्य में विश्व धरोहर स्थल भी हैं, जिनमें काजीरंगा नेशनल पार्क और मानस नेशनल पार्क शामिल हैं.
कानून-व्यवस्था और निवेश से बढ़ा पर्यटन
असम पर्यटन विकास निगम (ATDC) के चेयरमैन कुमार पद्मपानी बोरा ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में राज्य सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. उनके मुताबिक सबसे बड़ा बदलाव कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में आया है. उन्होंने कहा कि पहले लोगों के मन में पूर्वोत्तर जाने को लेकर डर रहता था, लेकिन अब स्थिति बदल रही है. बेहतर कानून-व्यवस्था और शांति समझौतों के कारण पर्यटकों का भरोसा बढ़ा है.
बोरा ने कहा कि निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की हैं, जिससे पर्यटन क्षेत्र में नए प्रोजेक्ट आ रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि असम में अब तीन यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं, जिनमें हाल ही में चराईडेम मेडम को भी सूची में शामिल किया गया है.
बोरा के मुताबिक असम की लोक संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की भी कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि बिहू जैसे पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को वैश्विक मंच पर ले जाने के लिए बड़े आयोजन किए गए हैं. उन्होंने कहा कि पर्यटन को बढ़ाने के लिए भारत और विदेशों में रोड शो आयोजित किए गए हैं. दुबई, लंदन, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, सिंगापुर और थाईलैंड जैसे देशों में असम के पर्यटन की ब्रांडिंग की गई है.
इंफ्रास्ट्रक्चर में आया बदलाव
कार्यक्रम में मौजूद उद्यमी लारसिंग मिंग साव्यान ने कहा कि पिछले दस वर्षों में असम में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है. उन्होंने बताया कि राज्य में हाईवे, पर्यटन सुविधाओं और निवेश माहौल में सुधार हुआ है.
उन्होंने कहा कि हाल ही में शुरू हुआ नया हवाईअड्डा भी असम के लिए गेम-चेंजर साबित होगा. उनके मुताबिक वैश्विक आर्थिक गतिविधियों का केंद्र धीरे-धीरे एशिया की ओर बढ़ रहा है और ऐसे में असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत बढ़ रही है.
कामाख्या कॉरिडोर और रोपवे योजना
बोरा ने बताया कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कामाख्या मंदिर के लिए ‘कामाख्या कॉरिडोर’ परियोजना पर काम चल रहा है.उन्होंने कहा कि इस परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बेहतर रास्ते, शॉपिंग एरिया और अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी. साथ ही कामाख्या रेलवे स्टेशन से मंदिर तक रोपवे बनाने की योजना भी है, जिससे यात्रियों को आसानी होगी. उन्होंने यह भी कहा कि विकास कार्यों के दौरान मंदिर और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा.
पर्यटन के नए क्षेत्र: टी-टूरिज्म और रिवर क्रूज
बोरा ने कहा कि असम सरकार पर्यटन के कई नए क्षेत्रों पर काम कर रही है. इनमें वाइल्डलाइफ टूरिज्म, टी-गार्डन टूरिज्म, ब्रह्मपुत्र नदी पर क्रूज पर्यटन, कॉन्सर्ट और इवेंट टूरिज्म शामिल हैं. उन्होंने बताया कि ब्रह्मपुत्र नदी पर डे-क्रूज और लंबी यात्राओं वाले क्रूज पहले से चल रहे हैं और इसमें निवेश भी बढ़ रहा है.
होटल सेक्टर में निवेश
बोरा ने कहा कि आने वाले तीन-चार वर्षों में असम में 10 नए फाइव-स्टार होटल बनने की संभावना है. इसके साथ ही सरकार होमस्टे मॉडल को भी बढ़ावा दे रही है. उन्होंने बताया कि होमस्टे शुरू करने वाले युवाओं को सरकार एक करोड़ रुपये तक की पूंजी सब्सिडी दे रही है. राज्य के कई जिलों में होमस्टे क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं. बोरा ने बताया कि कोविड के बाद असम में पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ी है. वर्ष 2023 में लगभग एक करोड़ घरेलू पर्यटक राज्य आए, जबकि विदेशी पर्यटकों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है.
कार्यक्रम के अंत में बोरा ने देश-विदेश के लोगों को असम आने का निमंत्रण दिया. उन्होंने कहा कि असम में जैव विविधता, संस्कृति, वन्यजीव, धार्मिक स्थल और जनजातीय परंपराओं का अनोखा संगम है. उन्होंने कहा कि अगर कोई असम को सही मायनों में समझना चाहता है तो उसे कम से कम सात दिन यहां बिताने चाहिए, तभी राज्य की संस्कृति और प्रकृति को करीब से महसूस किया जा सकता है.
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