Mon. Mar 30th, 2026

प्रवासी मजदूरों पर सियासी दांव: ममता की ‘श्रमश्री’ बनाम बीजेपी का ‘वापसी’ प्लान, 2026 में किसका होगा बंगाल?

bengal 2026 03 e894f629f92b133a8c0a1f306ec35de8

कोलकाता. पश्चिम बंगाल में जैसे-जैसे मतदान की तारीखें नजदीक आ रही हैं, राज्य के ‘प्रवासी वोटर’ (Migrant Voters) राजनीति के केंद्र में आ गए हैं. पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, बंगाल के लगभग 22.40 लाख लोग दूसरे राज्यों में काम कर रहे हैं. 2026 के इस चुनाव में ये प्रवासी केवल श्रमिक नहीं, बल्कि एक ऐसा ‘वोटिंग ब्लॉक’ हैं जो कई सीटों पर हार-जीत का अंतर तय करेंगे. 2011 की जनगणना के आंकड़ों को देखें तो भारत के कुल 5.43 करोड़ अंतर-राज्यीय प्रवासियों में बंगाल की हिस्सेदारी 2.63% थी. हालांकि उत्तर प्रदेश 1.23 करोड़ और बिहार 74.53 लाख के मुकाबले बंगाल पलायन के मामले में सातवें स्थान था, लेकिन हाल के वर्षों में यह संख्या तेजी से बढ़ी है.

बंगाल के प्रवासी सबसे ज्यादा झारखंड 4.95 लाख, महाराष्ट्र 3.1 लाख, उत्तर प्रदेश 2.34 लाख और दिल्ली 1.82 लाख में बसे हैं. एक हालिया अध्ययन के अनुसार, 62.87% लोग बेहतर रोजगार की तलाश में राज्य छोड़ते हैं. पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में चुनाव आयोग द्वारा किए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) ने प्रवासियों के बीच हलचल पैदा कर दी है. इस प्रक्रिया के दौरान लगभग 58 लाख नामों को हटाया गया है, जिनमें से कई ‘प्रवासी’ या ‘लापता’ श्रेणी में थे. वर्तमान में करीब 13 लाख से अधिक नाम न्यायिक जांच के दायरे में हैं. विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रवासियों को ‘घुसपैठिया’ बताकर उनके वोटिंग अधिकार छीने जा रहे हैं.

राजनीतिक दलों की रणनीतियां

तृणमूल कांग्रेस (TMC): ममता बनर्जी ने ‘श्रमश्री’ योजना के तहत हर महीने 5000 रुपये देने की शुरुआत कर दी है. टीएमसी का आरोप है कि बीजेपी शासित राज्यों में बंगाली मजदूरों को ‘संदिग्ध’ मानकर प्रताड़ित किया जा रहा है.

भारतीय जनता पार्टी (BJP): बीजेपी प्रवासियों की आड़ में हो रही अवैध घुसपैठ को मुद्दा बना रही है. पीएम मोदी ने मालदा और मुर्शिदाबाद में पलायन के लिए टीएमसी के ‘सिंडिकेट राज’ को जिम्मेदार ठहराया है.

कांग्रेस और वामदल: कांग्रेस प्रवासी मजदूरों के लिए कानूनी सुरक्षा और उनके बच्चों की शिक्षा (जो पलायन से 60% प्रभावित होती है) को मुद्दा बना रही है.

क्या प्रवासी आएंगे वोट देने बंगाल?

मुंबई या दिल्ली में काम करने वाला मजदूर केवल वोट देने के लिए 4000-5000 खर्च कर घर नहीं आ पाता. यही कारण है कि ‘रिमोट वोटिंग’ या प्रवासियों के लिए विशेष व्यवस्था की मांग इस चुनाव में जोर पकड़ रही है. ऐसे में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की रणभेरी बजते ही राज्य के उन लाखों चेहरों पर सियासत गरमा गई है, जो रोजी-रोटी के लिए अपने घर से दूर दूसरे राज्यों में पसीना बहा रहे हैं. बंगाल के लाखों प्रवासी मजदूर इस बार चुनाव का रुख मोड़ने की ताकत रखते हैं. यही कारण है कि तृणमूल कांग्रेस, बीजेपी और कांग्रेस-वामदल गठबंधन ने इन ‘साइलेंट वोटर्स’ को साधने के लिए अपने पिटारे खोल दिए हैं.

प्रवासियों को लेकर पार्टियों का रुख

भारतीय जनता पार्टी ने प्रवासियों के मुद्दे को ‘अस्मिता’ और ‘सुरक्षा’ से जोड़ा है. पार्टी का मुख्य फोकस उन मजदूरों पर है जो दिल्ली, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में काम कर रहे हैं. बीजेपी ने दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों के 40,000 से अधिक दुर्गा पूजा पंडालों के जरिए प्रवासियों से संपर्क साधने का ‘मिशन मोड’ प्लान बनाया है. सुवेंदु अधिकारी का वादा है कि बीजेपी की सरकार बनने पर ‘सिंडिकेट राज’ खत्म होगा, जिससे मजदूरों को बंगाल के बाहर नहीं जाना पड़ेगा. बीजेपी ने वादा किया है कि दूसरे राज्यों में बंगाली मजदूरों के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए एक ‘सेंट्रल हेल्पलाइन’ और कानूनी सेल बनाया जाएगा. बीजेपी ‘भारतीय बंगाली प्रवासी’ और ‘अवैध घुसपैठियों’ के बीच अंतर स्पष्ट कर प्रवासियों को नागरिकता और पहचान का भरोसा दे रही है.
पश्चिम बंगाल चुनाव में तीसरी सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी.

क्या प्रवासियों का वोट गेमचेंजर साबित होगा?

वहीं टीएमसी इस बार बंगाल चुनाव में इन प्रवासियों को अपने पाले में करने के लिए बड़ा दांव चला है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रवासियों के लिए अब तक की सबसे बड़ी घोषणा ‘श्रमश्री’ योजना के रूप में की है. टीएमसी के 2026 के घोषणापत्र में इसे प्रमुखता दी गई है. अन्य राज्यों से लौटने वाले प्रवासी मजदूरों को ₹5,000 प्रति माह की आर्थिक मदद दी जाएगी. यह सहायता तब तक मिलेगी जब तक उन्हें रोजगार नहीं मिल जाता यह राशि अधिकतम 5 वर्ष तक के लिए है. लौटने पर यात्रा खर्च के लिए ₹5,000 का एकमुश्त अनुदान भी मिलेगा. प्रवासियों को ‘खाद्य साथी’ कार्ड के जरिए मुफ्त राशन, ‘स्वास्थ्य साथी’ के तहत ₹5 लाख का बीमा और बच्चों को सरकारी स्कूलों में तत्काल दाखिला देने का वादा किया गया है.

कांग्रेस ने भी काम के दिनों को 100 से बढ़ाकर 150 करने और न्यूनतम दिहाड़ी 400 रुपये करने का प्रस्ताव रखा है ताकि पलायन रुके. इसके साथ ही प्रवासियों के लिए ‘इंटर-स्टेट माइग्रेंट वर्कमैन एक्ट’ को सख्ती से लागू करने का वादा किया गया है. कांग्रेस ने प्रवासियों के बच्चों के लिए विशेष ‘ब्रिज स्कूल’ खोलने का ऐलान किया है ताकि माता-पिता के पलायन से उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो. मालदा, मुर्शिदाबाद और बीरभूम जैसे जिलों में, जहां लगभग हर घर से एक सदस्य बाहर काम करता है, वहां ‘श्रमश्री’ बनाम ‘रोजगार की गारंटी’ मुख्य मुद्दा है. टीएमसी की सीधी नकदी योजना महिलाओं और गरीब परिवारों को आकर्षित कर रही है, जबकि बीजेपी का ‘परिवर्तन’ का नारा उन युवाओं को लुभा रहा है जो बंगाल में ही सम्मानजनक नौकरी चाहते हैं.

By uttu

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *