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बाघों की गिनती में झारखंड सबसे आगे, पलामू टाइगर रिजर्व बना देश में नंबर वन, जानें टोटल संख्या

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झारखंड में बाघों की गिनती का नेतृत्व Palamau Tiger Reserve कर रहा है. यह देश का पहला टाइगर रिजर्व बन गया है, जिसने टाइगर एस्टीमेशन के पहले और दूसरे चरण का कार्य समय से पहले पूरा कर लिया है. इन दोनों चरणों का डाटा Wildlife Institute of India को भेज दिया गया है.

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देशभर में टाइगर एस्टीमेशन 2026 की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. इस अभियान के तहत पूरे भारत के 58 टाइगर रिजर्व में चार चरणों में बाघों की गणना की जानी है. झारखंड ने इस दिशा में उल्लेखनीय बढ़त बनाई है. राज्य में पहले चरण की शुरुआत 15 दिसंबर से हुई थी. इसे जून 2026 तक पूरा करना है. खास बात यह है कि झारखंड पहले और दूसरे चरण का कार्य पूरा करने वाला देश का अग्रणी राज्य बन गया है.

झारखंड में बाघों की गिनती का नेतृत्व Palamau Tiger Reserve कर रहा है. यह देश का पहला टाइगर रिजर्व बन गया है, जिसने टाइगर एस्टीमेशन के पहले और दूसरे चरण का कार्य समय से पहले पूरा कर लिया है. इन दोनों चरणों का डाटा Wildlife Institute of India को भेज दिया गया है.

पलामू टाइगर रिजर्व की अगुवाई
पलामू टाइगर रिजर्व के निदेशक सह सीएफ एसआर नटेश राज्य स्तर पर टाइगर एस्टीमेशन के नोडल अधिकारी हैं, जबकि डिप्टी डायरेक्टर प्रजेशकांत जेना पलामू क्षेत्र की निगरानी कर रहे हैं. अधिकारियों के अनुसार तीसरे चरण में कैमरा ट्रैप लगाने का कार्य शुरू हो चुका है.इसे अन्य वन क्षेत्रों में भी विस्तार दिया जाएगा.

कैमरा ट्रैप से मिले अहम सुराग
तीसरे चरण में जंगलों में कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं, जिससे बाघों और अन्य वन्यजीवों की सटीक उपस्थिति दर्ज की जा सके. यह तकनीक वन्यजीव संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. पलामू टाइगर रिजर्व में कैमरा ट्रैप की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जल्द ही अन्य जिलों में भी इसे लागू किया जाएगा.

चौंकाने वाले आंकड़े
टाइगर एस्टीमेशन के दौरान केवल बाघ ही नहीं, बल्कि अन्य मांसाहारी जीवों की भी गिनती की जा रही है. झारखंड के विभिन्न इलाकों में तेंदुओं की मौजूदगी के पुख्ता सबूत मिले हैं. अकेले पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र में करीब 150 तेंदुओं के साक्ष्य सामने आए हैं. वहीं लगभग छह बाघों की उपस्थिति की पुष्टि हुई है. इसके अलावा पलामू, गढ़वा, लातेहार, हजारीबाग और चतरा जिलों में भी बाघों की मौजूदगी के संकेत मिले हैं, जो राज्य में वन्यजीव संरक्षण के बेहतर परिणामों की ओर इशारा करते हैं.

संरक्षण की दिशा में मजबूत कदम
झारखंड का यह प्रदर्शन न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए सकारात्मक संकेत है. समयबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से हो रहा टाइगर एस्टीमेशन वन्यजीव संरक्षण को नई मजबूती दे रहा है. आने वाले चरणों के पूरा होने के बाद राज्य में बाघों की वास्तविक संख्या और संरक्षण की दिशा स्पष्ट हो सकेगा.

By uttu

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