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बालाकोट 2.0: जगह भी तय और आतंकियों की संख्या भी पता, अब एक सर्जिकल स्ट्राइक और… फिर तबाह हो जाएंगे सारे आतंकी ठिकाने

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पाकिस्तानी सरजमीं पर मौजूद आतंकी ठिकानों पर क्या भारतीय सेना एक और सर्जिकल स्ट्राइक करने की तैयारी में है. इंडियन आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी के ताजा बयान से बालाकोट एयर स्ट्राइक दोहराने की अटकलें तेज हो गई हैं. दरअसल जनरल द्विवेदी ने मंगलवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ-साफ कहा कि भारत न सिर्फ सीमा पार मौजूद आतंकी ढांचे पर पूरी नजर रखे हुए है, बल्कि जरूरत पड़ने पर निर्णायक कार्रवाई के लिए भी पूरी तरह तैयार है.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना प्रमुख ने पहली बार इतने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों में अब भी आठ आतंकी कैंप एक्टिव हैं, जिनकी लोकेशन, गतिविधियों और वहां मौजूद आतंकियों की संख्या तक भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के पास मौजूद है. यही वजह है कि रणनीतिक हलकों में इसे ‘बालाकोट 2.0’ की पुख्ता आहट के तौर पर देखा जा रहा है.

सेना प्रमुख ने टेरर कैंप्स पर क्या कहा?

जनरल द्विवेदी ने बताया कि भारतीय सेना की जानकारी के मुताबिक सीमा पार कुल आठ आतंकी कैंप इस वक्त एक्टिव हैं. इनमें से छह कैंप्स लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के उस पार हैं, जबकि दो कैंप अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) की दूसरी स्थित हैं. सेना प्रमुख के मुताबिक इन कैंपों में अभी भी आतंकियों की मौजूदगी है और वहां ट्रेनिंग जैसी गतिविधियां चल रही हैं. उन्होंने साफ कहा कि भारतीय सेना इन सभी कैंप्स पर कड़ी नजर रखे हुए है और हर गतिविधि को बारीकी से मॉनिटर किया जा रहा है. अगर दोबारा किसी भी तरह की आतंकी हरकत होती है, तो भारत अपने इरादे को जरूर अंजाम देगा.

सेना प्रमुख के इस बयान को इसलिए भी बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने न सिर्फ आतंकी कैंप्स की संख्या बताई, बल्कि वहां मौजूद आतंकियों के आंकड़े भी सामने रख दिए. उनके मुताबिक, इन कैंप्स में करीब 100 से 150 आतंकी मौजूद हो सकते हैं. यानी भारतीय एजेंसियों के पास सिर्फ लोकेशन ही नहीं, बल्कि ग्राउंड रियलिटी की भी सटीक जानकारी है. यही वह स्थिति है, जिसे सैन्य रणनीति की भाषा में ‘एक्शन-रेडी इंटेलिजेंस’ कहा जाता है.

आसमान के बाद जमीन से हमले की तैयारी

ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने बड़े पैमाने पर मोबिलाइजेशन किया था और जमीनी हमले के लिए तैयार थी. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस मोबिलाइजेशन का पूरा ब्योरा क्लासिफाइड है, लेकिन इतना जरूर बताया कि सेना ने पर्याप्त स्तर तक अपनी तैयारियों को अंजाम दिया. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जो फॉरवर्ड मूवमेंट हुआ था, उसे डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) एग्रीमेंट के तहत चरणबद्ध तरीके से कम किया गया. यह प्रक्रिया अचानक नहीं, बल्कि एक तय समय-सीमा के भीतर पूरी की गई, जिसे मई के अंत तक पूरा करने की योजना थी.
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जनरल द्विवेदी ने दो टूक शब्दों में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी ‘जारी’ है. इसका सीधा मतलब है कि भारतीय सेना की ‘आंख और कान’ यानी खुफिया निगरानी पूरी तरह एक्टिव है. लाइन ऑफ कंट्रोल से लेकर अंतरराष्ट्रीय सीमा तक हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत जो भी कार्रवाई करनी है, उसकी पूरी तैयारी पहले से कर रखी गई है. यानी अगर हालात बिगड़ते हैं, तो भारत को किसी तरह की तात्कालिक तैयारी की जरूरत नहीं पड़ेगी.

बालाकोट 2.0 की क्यों अटकलें?

ऑपरेशन सिंदूर के असर पर बात करते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि इसके बाद से जम्मू-कश्मीर में आतंकियों द्वारा शुरू किए जाने वाले हमलों में लगभग कमी आ चुकी है. उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकी इनिशिएटेड इंसिडेंट्स लगभग खत्म हो गए हैं और कुल मिलाकर आतंकी गतिविधियां काफी कम हुई हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसका यह मतलब नहीं है कि जम्मू-कश्मीर में सेना की तैनाती या दबाव में कोई कमी की गई है. भारतीय सेना ने उतना ही दबाव बनाए रखा है, जितना पहले था.

सेना प्रमुख ने यह भी संकेत दिए कि पाकिस्तान की तरफ से राजनीतिक बयानबाजी और कट्टरपंथी संगठनों को शह देने की प्रक्रिया अब भी जारी है. उन्होंने कहा कि उनके हिसाब से पाकिस्तान पूरी तैयारी कर रहा है. जनरल द्विवेदी ने साफ तौर पर कहा कि पाकिस्तान उन लोगों को शह दे रहा है, जो भारत में घुसपैठ कर आतंक फैलाने और स्थानीय युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने की कोशिश करते हैं.

इन तमाम बयानों से तस्वीर बिल्कुल साफ हो जाती है कि भारत के पास आज वह स्थिति है, जो बालाकोट एयर स्ट्राइक से पहले बनी थी, बल्कि उससे भी ज्यादा मजबूत. तब भी भारत के पास आतंकियों के ठिकानों की पुख्ता जानकारी थी, और अब तो सेना प्रमुख खुद यह कह रहे हैं कि कैंप्स की संख्या, लोकेशन और वहां मौजूद आतंकियों का अनुमान तक मौजूद है. यही वजह है कि रक्षा विशेषज्ञ इसे ‘बालाकोट 2.0’ की तैयारी मान रहे हैं.

बालाकोट एयर स्ट्राइक में क्या हुआ था?

बालाकोट एयर स्ट्राइक में भारत ने पाकिस्तान को दिखा दिया था कि वह सीमा पार जाकर आतंक के अड्डों पर वार कर सकता है. यह एयर स्ट्राइक जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 जनवरी 2019 को हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें CRPF के 40 जवान शहीद हो गए थे. पुलवामा हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने ली थी. इस हमले के ठीक 12 दिन बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के भीतर घुसकर आतंकियों के ठिकानों पर सटीक हमला किया और उनके लॉन्च पैड तबाह कर दिए.

26 फरवरी 2019 को तड़के करीब 3:30 बजे भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 लड़ाकू विमान LoC पार कर बालाकोट इलाके में पहुंचे. यह इलाका पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से आगे पाकिस्तान के मुख्य भूभाग में स्थित था, जो इस स्ट्राइक को और भी अहम बनाता है.

भारतीय वायुसेना ने यहां स्थित जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े आतंकी ट्रेनिंग कैंप को निशाना बनाया. इस हमले में स्पाइस-2000 प्रिसिजन गाइडेड बमों का इस्तेमाल किया गया, जो बेहद सटीक माने जाते हैं और तय लक्ष्य को न्यूनतम कोलेटरल डैमेज के साथ तबाह करने में सक्षम होते हैं.

इस एयर स्ट्राइक में जैश-ए-मोहम्मद का सबसे बड़ा ट्रेनिंग कैंप पूरी तरह तबाह कर दिया गया. वहीं बड़ी संख्या में आतंकी, ट्रेनर और उनके सीनियर कमांडर मारे गए. यह कार्रवाई पूरी तरह नॉन-मिलिट्री टारगेट पर केंद्रित थी, ताकि आम नागरिकों को कोई नुकसान न पहुंचे. अब, जनरल उपेंद्र द्विवेदी के बयानों से यह संकेत भी मिल रहा है कि अगर पाकिस्तान की तरफ से एक और उकसावे की कोशिश हुई, तो भारत सिर्फ जवाब ही नहीं देगा, बल्कि ऐसा जवाब देगा जो आतंक के पूरे इकोसिस्टम को तबाह कर सकता है.

By uttu

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