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बेल मिलने के बाद भी ‘जेल’ को बनाया आशियाना! 13 साल बाद आजाद शारदा का मास्टरमाइंड, जानें वो अनसुना राज!

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बेल मिलने के बाद भी जेल को बनाया आशियाना! 13 साल बाद आजाद शारदा का मास्टरमाइंड

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Sharda Chitfund Accused: करोड़ों के शारदा चिटफंड घोटाले के मुख्य आरोपी सुदीप्तो सेन आखिरकार 13 साल बाद जेल से बाहर आ रहे हैं. 2013 में कश्मीर से गिरफ्तारी के बाद से वे लगातार हिरासत में थे. दिलचस्प बात यह है कि लगभग 300 मामलों में पहले ही जमानत मिल चुकी थी, फिर भी वे जेल से बाहर नहीं आए. इसके पीछे दो केस और कानूनी पेचीदगियां थीं. जानिए सुदीप्तो सेन की रिहाई के पीछे के कानूनी समीकरण.

बेल मिलने के बाद भी जेल को बनाया आशियाना! 13 साल बाद आजाद शारदा का मास्टरमाइंडZoom

13 साल बाद जेल से बाहर आ रहे हैं सुदीप्तो सेन.

Sudipto Sen Jail News: साल 2013 का वो अप्रैल महीना, जब कश्मीर की ठंडी वादियों से सुदीप्तो सेन की गिरफ्तारी हुई थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि ‘शारदा’ का यह साम्राज्य ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा. उसका मुखिया अगले 13 साल तक जेल की रोटी तोड़ेगा. अब, जाकर 2026 में उनकी रिहाई हो रही है. सबसे बड़ा रहस्य यह है 300 केसों में जमानत मिलने के बाद भी वह बाहर क्यों नहीं आए? दरअसल, उत्तर 24 परगना जिले के बारासात थाने से जुड़े दो मामलों में कोर्ट से राहत नहीं मिलने की वजह से जेल में थे. इसी दो केस में जमानत मिलने के बाद वे 5000 रुपये के मुचलके पर जेल से सशर्त बाहर आ रहे हैं.

बेल मिली, पर रिहाई क्यों नहीं? कानूनी जानकारों की मानें तो सुदीप्तो सेन का मामला ‘कानूनी चक्रव्यूह’ जैसा था. इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण थे:

  • सैकड़ों मुकदमों का जाल: सुदीप्तो सेन के खिलाफ केवल एक नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में सैकड़ों एफआईआर दर्ज थीं. कानून के मुताबिक, अगर किसी आरोपी को 99 मामलों में बेल मिल जाए और 100वें मामले में ‘प्रोडक्शन वारंट’ लंबित हो, तो वह जेल से बाहर नहीं आ सकता. सेन के साथ यही हुआ; एक राज्य की पुलिस उन्हें छोड़ती, तो दूसरे राज्य की पुलिस तैयार खड़ी होती.
  • सुरक्षा का सवाल: राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा आम थी कि सुदीप्तो सेन खुद जेल से बाहर आने के लिए बहुत उत्सुक नहीं थे. शारदा घोटाले में लाखों गरीब लोगों के पैसे डूबे थे. लोगों के बीच जो आक्रोश था, उसे देखते हुए सेन को शायद लगता था कि जेल की चारदीवारी बाहर की अनियंत्रित भीड़ से ज्यादा सुरक्षित है.
  • भारी भरकम मुचलका: कई मामलों में अदालत ने बेल तो दी, लेकिन उसके साथ भारी भरकम मुचलके की शर्त भी रखी. संपत्तियां कुर्क होने के बाद सेन के लिए कानूनी रूप से इतनी बड़ी रकम का इंतजाम करना और गारंटर ढूंढना भी एक बड़ी चुनौती थी.

शारदा घोटाला: एक नजर में

  1. कुल घोटाला: अनुमानित ₹2,500 करोड़ से ₹10,000 करोड़ के बीच.
  2. प्रभावित लोग: बंगाल और पड़ोसी राज्यों के लगभग 17 लाख छोटे निवेशक.
  3. राजनीतिक घमासान: इस घोटाले ने बंगाल की राजनीति को हिला कर रख दिया था, जिसमें कई बड़े नेताओं के नाम सामने आए थे.

13 साल बाद अब क्या बदला?

अब जबकि 13 साल बीत चुके हैं, सुदीप्तो सेन के खिलाफ चल रहे अधिकांश मामलों में उन्होंने सजा की अधिकतम अवधि (जितनी सजा उन्हें दोषी पाए जाने पर हो सकती थी) का एक बड़ा हिस्सा जेल में ही काट लिया है. भारतीय कानून के तहत, यदि कोई विचाराधीन कैदी (Under-trial) अपनी संभावित सजा की आधी या उससे अधिक अवधि जेल में बिता लेता है, तो उसे रिहा करना अनिवार्य हो जाता है.

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