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भगवान जगन्नाथ के रत्न भंडार में 111 जेवरात, आज फिर खुलेगा 12वीं सदी का खजाना, होगी हर चीज की वीडियोग्राफी

Jagannath

पुरी (Puri) की सुबह में हमेशा एक दिव्यता होती है… समुद्र (Sea) की लहरों की आवाज, शंखनाद की गूंज, और जय जगन्नाथ (Jagannath) के स्वर. भगवान जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार (Ratna Bhandar) आज फिर खुल रहा है. यह प्रक्रिया करीब आधी सदी बाद शुरू हुई है. यह वह स्थान है, जहां सदियों से भगवान के आभूषण, राजाओं के दान और अनगिनत भक्तों की आस्था सुरक्षित है. आखिरी बार 1978 में इस खजाने की गिनती हुई थी. उसके बाद समय बीतता गया, पीढ़ियां बदलती गईं, लेकिन रत्न भंडार अपने रहस्यों के साथ बंद ही रहा.

एजेंसी के अनुसार, मंदिर प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार (खजाने) की इन्वेंट्री का दूसरा चरण बुधवार को शुरू हुआ. यह 11 अप्रैल तक चलेगा. एक अधिकारी ने बताया कि इन्वेंट्री के सेकंड फेज में पहले दिन सात घंटे तक टीम ने काम किया.

रत्न भंडार समिति के अध्यक्ष जस्टिस विश्वनाथ रथ और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी ने बताया कि इन्वेंट्री का काम 9, 10 और 11 अप्रैल को होगा, जबकि इसके बाद के सत्र 13 अप्रैल को और फिर 16 से 18 अप्रैल तक होंगे. यह प्रक्रिया 48 साल में पहली बार हो रही है, जो 25 मार्च को शुरू हुई थी.

78 सोने के और 33 चांदी के आभूषण
2026 में जब प्रशासन ने तय किया कि इस धरोहर को नई तकनीक से सुरक्षित किया जाए. खजाने के दरवाजे खुले… और मानो 12वीं सदी की परछाइयां बाहर झांकने लगीं. रत्न भंडार तक पहुंच हर किसी के लिए संभव नहीं. सिर्फ चुनिंदा लोग ही वहां जा सके- इनमें सेवायत, रत्न विशेषज्ञ, सुनार और प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे. इस टीम का नेतृत्व कर रहे थे न्यायमूर्ति बिस्वनाथ रथ और एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी.

1978 की सूची के अनुसार, रत्न भंडार में कुल 111 आभूषण दर्ज हैं. इनमें 78 सोने से मिश्रित गहने और 33 चांदी के आभूषण हैं. किसी आभूषण को किसी राजा ने दान किया होगा, किसी को किसी भक्त ने अपनी मनोकामना पूरी होने पर चढ़ाया होगा. हर एक गहना, हर एक रत्न- एक कहानी है, जो सदियों से इस खजाने में सुरक्षित है.

‘सुनाबेशा… जब भगवान सोने से सजे होते हैं
इस बार की इन्वेंट्री में खास ध्यान उन आभूषणों पर है, जो सुनाबेशा के दौरान भगवान को पहनाए जाते हैं. रथ यात्रा के दौरान जब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित होते हैं, तो वह एक परंपरा के साथ आस्था का उत्सव होता है.

हर आभूषण की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और 3D मैपिंग की जा रही है. मतलब अब यह खजाना डिजिटल रूप में भी सुरक्षित हो जाएगा. यह एक तरह से अतीत और भविष्य का संगम है, जहां 12वीं सदी की धरोहर 21वीं सदी की तकनीक से जुड़ रही है. इस ऐतिहासिक प्रक्रिया के दौरान पुरी के गजपति महाराजा दिब्यसिंह देव भी वहां पहुंचे. उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में कोई जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए. सबसे जरूरी है- सटीकता और पारदर्शिता.

तीन हिस्सों में बंटा है रत्न भंडार
इस खजाने को तीन कैटेगरी में बांटा गया है. आंतरिक कक्ष- जहां सदियों पुराने और मूल्यवान आभूषण रखे हैं. दूसरा बाहरी कक्ष है, यहां त्योहारों में उपयोग होने वाले गहने रखे जाते हैं. वहीं तीसरी कैटेगरी में भगवान के रोजाना श्रृंगार में इस्तेमाल होने वाली चीजें शामिल हैं. पहले चरण में दैनिक उपयोग के गहनों की गिनती हो चुकी है. अब आज से सेकंड फेज में बाहरी कक्ष के खजाने की गिनती होगी.

रत्न भंडार की प्रक्रिया के दौरान मंदिर के सभी अनुष्ठान सामान्य रूप से जारी हैं. श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से उन्हें थोड़ी दूरी से ही भगवान के दर्शन करने पड़ रहे हैं. सेकंड फेज की यह प्रक्रिया 11 अप्रैल तक चलेगी.

48 साल बाद क्यों खुला खजाना?
यह सवाल हर किसी के मन में है. दरअसल, समय के साथ पारदर्शिता और संरक्षण की जरूरत बढ़ी है. 1978 के बाद पहली बार इस तरह का आधुनिक तकनीकों से इन्वेंटरी किया जा रहा है. अब सिर्फ यह जानना ही काफी नहीं कि क्या है, बल्कि यह भी जरूरी है कि वह कैसे सुरक्षित है, किस स्थिति में है, और आने वाली पीढ़ियों तक कैसे पहुंचेगा.

By uttu

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