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Cyber Fraud with MP : पश्चिम बंगाल के सांसद कल्याण बनर्जी के साथ 55 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. एसबीआई में स्थित उनके खाते में इस धोखाधड़ी के बाद बैंक ने मामला दर्ज कराया है.
तृणमूल कांग्रेस के खाते से साइबर ठगों ने 55 लाख रुपये उड़ा दिए. नई दिल्ली. अभी तक आम आदमी को निशाना बना रहे साइबर ठगों ने इस बार माननीय के खाते में सेंध लगा दी. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सांसद कल्याण बनर्जी के साथ साइबर ठगी का मामला सामने आया है. यह पूरी घटना एसबीआई के ब्रांच मैनेजर की नाक के नीचे हुई और सांसद के खाते से 55 लाख रुपये ठगों ने उड़ा दिए. इस घटना के बाद एसबीआई ने साइबर पुलिस के पास मामला दर्ज कराया है. सवाल यह उठता है कि आखिर ठगों ने यह पूरा खेल कैसे किया और आम आदमी इससे सबक लेकर कैसे खुद को सुरक्षित बना सकता है.
आनंदबाजार न्यूज पोर्टल के मुताबिक, एसबीआई के ब्रांच मैनेजर ने खुद फोन करके सांसद को ठगी की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सांसद के साल 2001 में खोले गए खाते में पहले उनके मौजूदा खाते से राशि ट्रांसफर की गई और फिर ठगों ने सारा पैसा निकाल लिया. सांसद का पुराना खाता काफी समय से इस्तेमाल न होने की वजह से निष्क्रिय हो गया था, लेकिन ठगों ने पहले सांसद की फोटो और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करके खाते की केवाईसी अपडेट की और फिर इसमें से 55 लाख रुपये ट्रांसफर करके पैसे उड़ा दिए.
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा
न्यूज पोर्टल के अनुसार, इस फर्जीवाड़े को ठगों ने सांसद की फोटो और मोबाइल नंबर का उपयोग करके इंजाम दिया है. साइबर ठगों ने पहले सांसद की कोलाकाता के कालीघाट शाखा स्थित एसबीआई के मुख्य बैंक खाते से 55 लाख रुपये उनके असेंबली स्थित एसबीआई सब-ब्रांच के निष्क्रिय खाते में ट्रांसफर किए. फंड ट्रांसफर होने के बाद ठगों ने सारा पैसा खाते से निकाल लिए. इसकी जानकारी होने पर एसबीआई के ब्रांच मैनेजर ने सांसद को इसकी जानकारी और साइबर पुलिस के पास मामला दर्ज कराया.
क्यों निष्क्रिय हुआ सांसद का बैंक खाता
कल्याण बनर्जी ने एसबीआई के असेंबली सब-ब्रांच में यह खाता तब खुलवाया था, जब वह साल 2001 से 2006 तक विधायक थे. यह सब ब्रांच एसबीआई की हाईकोर्ट ब्रांच के अंतर्गत ही आती है. बनर्जी का खाता भी अन्य विधायकों के साथ खोला गया था, क्योंकि एमएलए रहने के दौरान सभी अलाउंस इसी खाते में आते थे. बनर्जी ने बताया कि काफी लंबे समय से सांसद ने इस खाते से कोई लेनदेन नहीं किया, यही कारण है कि इस खाते को निष्क्रिय अकाउंट में बदल दिया गया. हालांकि, नियमों के तहत बैंकों को भी ऐसे अकाउंट इनएक्टिव घोषित करने पड़ते हैं.
5 स्टेप में समझें पूरा फर्जीवाड़ा
- पहले टार्गेट चुना : बैंकों के निष्क्रिय खातों की निगरानी कम होती है, लिहाजा यह साइबर ठगों का आसान शिकार बना. ठगों के पास सांसद का मोबाइल नंबर, नाम और फोटो पहले से उपलब्ध था.
- केवाईसी अपडेट : ठगों ने बनर्जी के नाम से नकली पैन और आधार कार्ड बनाए और फोटो किसी अन्य की इस्तेमाल की. मोबाइल नंबर असली था जिससे खाते का ओटीपी वेरिफाई हो गया और केवाईसी कर दी गई.
- खाता एक्टिवेट : ठगों ने फर्जी केवाईसी के जरिये सांसद के निष्क्रिय पड़े खाते को एक्टिवेट कर दिया और उसमें पैसे ट्रांसफर करा लिए. ट्रांसफर भी ओटीपी के जरिये वेरिफाई हो गया और मौजूदा खाते से पैसा पुराने खाते में चला गया.
- कई खातों से निकाले पैसे : साइबर ठगों ने पुराने खाते में आए 55 लाख रुपये को कई अन्य खातों में ट्रांसफर किया और फटाफट उसे खर्च कर डाले. कई छोटे-छोटे ट्रांजेक्शन में पैसे निकालने पर उसे पकड़ना भी मुश्किल होता है.
- बैंक ने किया अलर्ट : एसबीआई को कई बार ट्रांजेक्शन होने पर शक हुआ, जिसके बाद सांसद को अलर्ट किया गया और ठगी का खुलासा हुआ.
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि… और पढ़ें
