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मार्शल आउट… गाली गलौज विवाद पर क्या सुनील सिंह की सदस्यता रद्द हो सकती है? मंत्री अशोक चौधरी से नोंकझोंक पर सियासी उबाल

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पटना. बिहार विधान परिषद में आज (10 फरवरी) की कार्यवाही विवाद और नोंकझोंक के बीच शुरू हुई. तय समय से 15 मिनट देरी से सत्र शुरू हुआ था, तभी राजद के विधान पार्षद सुनील सिंह और मंत्री अशोक चौधरी के बीच तीखी बहस हुई और बात गाली-गलौज तक पहुंच गई. सदन में उठते विवाद को रोकने के लिए सभापति ने विपक्ष के सदस्यों को मार्शल आउट करने का आदेश दिया. यह पूरा दृश्य सदन में मौजूद सदस्यों के साथ ही वर्चुअल सदस्यों के लिए भी रिकॉर्ड किया गया है और जल्द ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है.

सवाल और जवाब की तेज बहस

मंत्री अशोक चौधरी ने आरोप लगाया कि राजद के कुछ लोग लगातार सदन में हंगामा करते रहते हैं. उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष खुद सदन की मर्यादा भूलकर ट्रेजरी बेंच के पास आकर हंगामा कर रहे थे. मंत्री ने यह भी कहा कि राजद के एक सदस्य ने मर्यादाओं को तार-तार कर दिया और भाषा का प्रयोग असभ्य तरीके से किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन की अपनी मर्यादा होती है और सदस्यों से उम्मीद की जाती है कि वे शालीन भाषा में बात करें. अशोक चौधरी ने कहा कि मर्यादा और नियमावली का उल्लंघन करने वाले सदस्यों के खिलाफ भविष्य में कार्रवाई हो सकती है.

सुनील सिंह ने क्या कहा?

इस बहस के बाद राजद एमएलसी सुनील सिंह ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सत्ता के लोग उन पर हावी होना चाहते हैं. उनका कहना था कि विधान परिषद में वे सिर्फ चर्चा और वास्तविक मुद्दों को उठाना चाहते थे. जब सभापति ने अनुमति नहीं दी, तब वे नारेबाजी कर रहे थे. सुनील सिंह ने यह भी कहा कि मंत्री द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा असभ्य और अनुचित थी. उन्होंने यहां तक कहा कि मंत्री नशे में थे और पॉकेटमार की तरह व्यवहार कर रहे थे. यह टिप्पणी सदन में फिर से विवाद का कारण बनी.

सभापति ने क्या कार्रवाई की

सदन में भिड़ंत और गाली-गलौज के बढ़ते स्वर के बीच सभापति ने विपक्ष के कुछ सदस्यों को मार्शल आउट करने का आदेश दिया. इसका लक्ष्य सदन की कार्यवाही को सुचारु बनाना था. मार्शल आउट का मतलब है कि उन सदस्यों को सदन से बाहर कर दिया गया और वे प्रश्नकाल के आगे के सत्र में प्रत्यक्ष भाग नहीं ले पाए. सदन के नियमावली के तहत किसी भी सदस्य द्वारा असभ्य भाषा, आचार विपरीत व्यवहार या सदन की मर्यादा को तोड़ने पर ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं. अब विवाद यह है कि क्या नियमावली का यह उल्लंघन सदस्यता रद्द की कार्रवाई का कारण बन सकता है.

क्या सुनील सिंह की सदस्यता रद्द हो सकती है?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सुनील सिंह की विधान परिषद सदस्यता रद्द हो सकती है? नियम के अनुसार अगर कोई सदस्य विधान परिषद की मर्यादा का गंभीर उल्लंघन करता है तो नियमावली 194 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है. इसमें चेतावनी, निलंबन या गंभीर मामलों में सदस्यता रद्द जैसे कदम शामिल हैं. हालांकि, इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक नोटिस जारी नहीं हुआ है. पार्टी स्तर पर भी यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है. दूसरी ओर राजद इसे सत्ता पक्ष का प्रतिशोध बता रहा है, जबकि सरकार इसे मर्यादा और अनुशासन का पालन कराना बता रही है.

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

बिहार की राजनीति में यह मामला तेजी से फैल रहा है. सोशल मीडिया पर विधायक और मंत्री के बीच की बहस को लेकर अलग-अलग समूहों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. कुछ लोगों का कहना है कि विधान परिषद का माहौल अत्यधिक तनावपूर्ण हो गया है, जबकि अन्य का सुझाव है कि ऐसे मामलों को सदन के भीतर ही हल किया जाना चाहिए. जानकारों का मानना है कि अगर किसी सदस्य ने नियमावली का गंभीर उल्लंघन किया है तो सदस्यता रद्द की प्रक्रिया संभव है, लेकिन इसके लिए सदन की आधिकारिक रिपोर्ट और अनुशासन कमेटी की सिफारिश जरूरी होगी.

जानकार क्या बताते हैं, अब क्या होगा?

जानकार कहते हैं कि आने वाले दिनों में यह मामला विधान परिषद की अनुशासन समिति के पास जाएगा. समिति जांच करेगी कि क्या सुनील सिंह ने मर्यादा का गंभीर उल्लंघन किया या नहीं. इसके बाद रिपोर्ट सभापति के पास जाएगी और फिर निर्णय लिया जाएगा कि क्या किसी सदस्य के खिलाफ गंभीर कार्रवाई होनी चाहिए. इस पूरे मामले से स्पष्ट है कि विधान परिषद की कार्यशैली, सदस्यों की मर्यादा और राजनीतिक बहस अब बिहार की सियासत में एक नई दिशा ले रही है. जनता की नजर अब इस पर टिकी है कि आखिर में क्या निर्णय आता है और क्या सुनील सिंह की सदस्यता रद्द होती है या नहीं.

By uttu

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