जतारा: पुजारी के पैरों के नीचे लेट जाते हैं लोग, मान्यता- इससे कष्ट मिटते हैं
Last Updated:
राजय्यापेट गांव में नुकताता जतारा में श्रद्धालु पुजारी के पैरों तले लेटते हैं, मान्यता है इससे बीमारियां और दुख दूर होते हैं. यह परंपरा आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली जिले में प्रसिद्ध है.

जतारा आंध्र प्रदेश की खास परंपराओं में शामिल है.
ये जो लोग आप तस्वीर में देख रहे हैं, वो श्रद्धालु हैं. एक के ऊपर एक लेटकर इन सभी की कोशिश है कि ये पुजारी के पैरों तले आ जाएं. इनका विश्वास है कि ऐसा करने से ये लोग बीमारियों और दुखों से मुक्त हो जाएंगे. ये आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली जिले की एक ऐसी अनोखी परंपरा है, जहां लोग बीमारियों और कष्टों से मुक्ति पाने के लिए खुद को पुजारी के पैरों तले कुचलवाते हैं. नक्कापल्ली मंडल के राजय्यापेट गांव में आयोजित होने वाली ‘नुकताता जतारा’ अपनी इसी खास विशेषता के कारण हर साल चर्चा में रहती है.
सैकड़ों साल पुरानी मान्यता और ‘नुकताता’ का इतिहास
ग्रामीणों के अनुसार, यह जतारा सैकड़ों साल पुरानी है. कहा जाता है कि प्राचीन काल में ‘नुकताता’ नाम के एक बुजुर्ग गांव के मुखिया हुआ करते थे. उस दौर में जब मौसम की जानकारी देने वाली कोई तकनीक नहीं थी, तब नुकताता अपनी सूझबूझ से मछुआरों को समुद्र में आने वाले खतरों, तूफान और भारी बारिश की सटीक चेतावनी पहले ही दे देते थे. मछुआरों का मानना है कि नुकताता ने कई बार उनकी जान बचाई. उनकी मृत्यु के बाद, गांव वालों ने उन्हें देवतुल्य मान लिया और उनकी याद में इस जतारा का आयोजन शुरू किया.
समुद्र स्नान और अनोखी पदयात्रा
हर साल महाशिवरात्रि के बाद आने वाली अमावस्या पर यह उत्सव मनाया जाता है. इस वर्ष भी 17 फरवरी को मछुआरा समुदाय ने इसे बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया.
मूर्तियों का अभिषेक: गांव की देवी और नुकताता की मूर्तियों को समुद्र में स्नान कराया जाता है.
7 किलोमीटर की पदयात्रा: मूर्तियों को वापस लाते समय, मुख्य पुजारी और पांच अन्य महिलाएं गांव की सड़क पर करीब 7 किलोमीटर तक चलते हैं.
पैरों तले कुचलने की प्रथा: इस लंबी दूरी के दौरान, सड़क पर 5 साल के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक लेटे रहते हैं. पुजारी इन सभी श्रद्धालुओं के ऊपर से पैर रखकर गुजरते हैं.
खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव
QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें

login
