लाइव: ‘आप सरेंडर, हम धुरंधर…’ संबित पात्रा ने नक्सलवाद पर कांग्रेस को घेरा
Last Updated:
Sansad Live Updates: देश को वामपंथी उग्रवाद यानी नक्सलवाद से मुक्त करने के मुद्दे पर लोकसभा में अहम चर्चा शुरू हो गई है. चर्चा की शुरुआत शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने की. गृह मंत्री अमित शाह शाम करीब 5 बजे इस महत्वपूर्ण चर्चा का जवाब देंगे.

संबित पात्रा ने कांग्रेस पर नक्सलियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया.
लोकसभा में आज देश को वामपंथी उग्रवाद यानी नक्सलवाद से मुक्त करने के मुद्दे पर अहम चर्चा शुरू हो गई है. यह बहस नियम 193 के तहत हो रही है, जिसके अंतर्गत अल्पकालिक चर्चा में मतदान नहीं होता, लेकिन सरकार को सदन में जवाब देना अनिवार्य होता है. बीजेपी सांस
चर्चा की शुरुआत शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने की. उन्होंने देश में नक्सलवाद की स्थिति, सुरक्षा बलों की भूमिका और सरकार की रणनीति पर अपने विचार रखे और कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला. वहीं कांग्रेस ने बीजेपी को आड़े हाथों लिया.
इस दौरान सदन में विभिन्न दलों के सांसद भी इस मुद्दे पर अपनी बात रख रहे हैं. इस महत्वपूर्ण चर्चा का जवाब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शाम करीब 5 बजे देंगे. माना जा रहा है कि अपने जवाब में अमित शाह सरकार की अब तक की कार्रवाई, उपलब्धियों और आगे की रणनीति पर विस्तार से जानकारी देंगे.
लाइव अपडेट्स…
- संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों की माओवाद को लेकर सोच बेहद विचित्र रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर कांग्रेस का रुख स्पष्ट नहीं रहा और उसने हमेशा दोहरी नीति अपनाई. उन्होंने 2 अप्रैल 2010 को छत्तीसगढ़ में हुए नक्सली हमले का भी जिक्र किया, जिसमें 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे. पात्रा ने कहा कि यह भारतीय सुरक्षा बलों पर हुआ अब तक का सबसे बड़ा एकदिवसीय हमला था. उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं के बावजूद पार्टी ने अपनी सोच नहीं बदली और इस मामले में ‘पाप’ किया है. उनके इस बयान के बाद सदन में सियासी माहौल और गरमा गया.
- लोकसभा में नक्सलवाद पर चल रही चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह खुद माओवाद को देश की ‘सबसे घातक बुराई’ मानते थे. इसके बावजूद ‘कांग्रेस ने माओवाद को लेकर एक तरह से ‘रोमांटिसाइज’ करने का काम किया.’ उन्होंने कहा कि लेखिका अरुंधति रॉय, जिन्हें उन्होंने ‘कांग्रेस की बहन’ बताया, माओवादियों को ‘बंदूक वाले गांधीवादी’ कह चुकी हैं.
- कांग्रेस सांसद ने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ का जिक्र करते हुए कहा कि 2006 से 2009 के बीच कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं को माओवादियों ने निशाना बनाया और उनकी हत्या कर दी गई. उन्होंने फिर दोहराया कि ऐसे हालात में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या भाजपा का कोई नेता इन हमलों में शहीद हुआ है. सप्तगिरी शंकर के इस बयान के बाद सदन में सियासी माहौल और गरमा गया है और नक्सलवाद पर चल रही बहस में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं.
- लोकसभा में नक्सलवाद पर चल रही चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद सप्तगिरी शंकर ने सत्तारूढ़ दल पर तीखा हमला बोला. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या आज़ादी की लड़ाई के दौरान या फिर माओवादियों के हमलों में भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता शहीद हुआ है. सप्तगिरी शंकर ने कहा कि जिस तरह से सत्तापक्ष के सांसद दावे कर रहे हैं, उससे ऐसा लगता है मानो अमित शाह ने खुद बंदूक उठाकर माओवादियों को खत्म किया हो और बाकी किसी का कोई योगदान ही नहीं रहा. उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या पूर्ववर्ती सरकारों और पुलिस बलों के प्रयासों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि वह ऐसे क्षेत्र से आते हैं जहां वामपंथी उग्रवाद अपने चरम पर रहा है और वहां के लोगों ने नक्सली हिंसा का खामियाजा भुगता है. उन्होंने बताया कि उनके इलाके में कई लोगों की जान माओवादी हमलों में गई है.
- लोकसभा में नक्सल उन्मूलन पर जारी चर्चा के दौरान शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में चल रहे अभियानों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार गढ़चिरौली को माओवादी प्रभाव से मुक्त करने के लिए लगातार प्रभावी और ठोस प्रयास कर रही है. शिंदे ने कहा कि राज्य सरकार की रणनीति और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के चलते गढ़चिरौली में माओवाद को खत्म करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि जब एकनाथ शिंदे गढ़चिरौली के संरक्षक मंत्री थे, तब उन्होंने वहां जाकर स्थानीय लोगों और सुरक्षाबलों के साथ दिवाली भी मनाई थी, जिससे उनका मनोबल बढ़ा. उन्होंने आगे कहा कि केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति के तहत देश से माओवाद को पूरी तरह समाप्त करना संभव है.
- बीजेपी की तरफ से शून्यकाल में मुस्लिम समुदायों को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण से बाहर करने का मुद्दा उठाने पर आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा, ‘इनको ना संविधान की समझ है ना पिछड़ा वर्ग आयोग की समझ है. हमारे यहां आरक्षण की व्यवस्था बहुत स्पष्ट है… आप क्या कर रहे हैं? देश में आग लगाना चाहते हैं? संविधान में आग लगाना चाहते है? इस तरह के तरीके संविधान की मूल भावना के खिलाफ हैं और मंडल आयोग की लड़ाई को ये लोग मनुवादी दृष्टिकोण से खत्म करना चाहते हैं.’
- देश को वामपंथी उग्रवाद यानी नक्सलवाद से मुक्त करने के मुद्दे पर लोकसभा में अहम चर्चा शुरू हो गई है. चर्चा की शुरुआत शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने की. गृह मंत्री अमित शाह शाम करीब 5 बजे इस महत्वपूर्ण चर्चा का जवाब देंगे.
- नक्सलमुक्त भारत की समयसीमा पर संसद में चर्चा को लेकर बस्तर से बीजेपी सांसद महेश कश्यप ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में आतंकवाद और नक्सलवाद का खात्मा किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने से बस्तर को एक नई पहचान मिलेगी.
- राज्यसभा में बीजेपी सांसद के लक्ष्मण ने मुसलमानों को ओबीसी कैटेगरी से बाहर करने की मांग की, जिसके बाद विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया. उधर लोकसभा में भी भारी हंगामे के चलते कार्यवाही 12:30 बजे तक स्थगित करनी पड़ी.
निशिकांत दुबे के बयान पर बवाल, बीजेडी सांसदों का वॉकआउट
- राज्यसभा में आज उस वक्त माहौल गरमा गया जब बीजू जनता दल के सांसदों ने विरोध स्वरूप राज्यसभा से वॉकआउट कर दिया. यह विरोध निशिकांत दुबे द्वारा ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक पर की गई कथित विवादित टिप्पणी के खिलाफ किया गया. बीजेडी सांसदों के नेता सास्मित पात्रा ने कहा कि निशिकांत दुबे ने बीजू पटनायक को ‘CIA एजेंट’ बताया, जो न केवल अपमानजनक है बल्कि एक सम्मानित नेता की छवि को ठेस पहुंचाने वाला बयान है.
इसी मुद्दे को लेकर बीजेडी के सभी सांसदों ने एकजुट होकर राज्यसभा से वॉकआउट किया और सदन के बाहर अपना विरोध दर्ज कराया. यह विरोध केवल सदन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे पहले सास्मित पात्रा ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए संसदीय स्थायी समिति (आईटी) से इस्तीफा भी दे दिया था, जिसकी अध्यक्षता निशिकांत दुबे कर रहे हैं.
इसके अलावा लोकसभा में आज इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (संशोधन) बिल, 2025 पर भी चर्चा जारी रहेगी. इस विधेयक को 27 मार्च को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया था. बिल का उद्देश्य दिवालियापन से जुड़े मामलों के निपटारे में हो रही देरी को कम करना और प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है. सरकार का मानना है कि इस संशोधन से कारोबारी माहौल बेहतर होगा और निवेश को बढ़ावा मिलेगा.
वहीं, राज्यसभा में आज केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) बिल, 2026 पर चर्चा होगी. इस बिल को भी गृह मंत्री अमित शाह पेश करेंगे और इसे पारित कराने की कोशिश करेंगे. गौरतलब है कि 25 मार्च को जब इस बिल को राज्यसभा में पेश किया गया था, तब विपक्ष के भारी हंगामे के बीच कार्यवाही प्रभावित हुई थी.
कुल मिलाकर, संसद में आज का दिन न केवल सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर बहस के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े विधेयकों पर भी गंभीर चर्चा का गवाह बनेगा. खास तौर पर नक्सलवाद पर होने वाली बहस पर देश की नजरें टिकी होंगी, क्योंकि यह सीधे तौर पर आंतरिक सुरक्षा और सरकार के बड़े वादे से जुड़ा हुआ मामला है.
About the Author
An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T…और पढ़ें
