कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के सिरसी शहर में इन दिनों एक अनोखा मेहमान आया है. दिखने में बालों से ढका, ठंडी जगहों में रहने वाला और बहुत ही प्यारा सा — याक! अब आप सोच रहे होंगे, “याक यहाँ कैसे पहुंच गया?” चलिए, इसकी दिलचस्प कहानी जानते हैं.
दरअसल, सिरसी के ‘पेट प्लैनेट’ में पहली बार हिमालय से एक याक लाया गया है. हिमाचल प्रदेश की बर्फीली घाटियों से आई ये जोड़ी, एक 14 साल की मादा याक, एक 2 साल का नर याक और एक 10 महीने की छोटी मादा याक, अब दक्षिण भारत की गर्म जलवायु में ढलने की कोशिश कर रहे हैं.
जानवरों की देखभाल करने वाले डॉ. राजेंद्र शिरसीकर फरवरी में हिमाचल गए थे. उन्होंने वहां के लोगों को बताया कि कैसे सिरसी में ‘पेट प्लैनेट’ बेघर और घायल जानवरों की देखभाल करता है. हिमाचल के लोगों को उनका यह काम इतना पसंद आया कि उन्होंने अपनी तरफ़ से ये याक तोहफ़े में भेज दिए.
असल में, हिमाचल में सर्दियों में जब बर्फ गिरती है, तो याकों पर हिम तेंदुओं का खतरा बढ़ जाता है. ऊपर से वहाँ के लोग छोटे घरों में रहते हैं, जिनमें इतने बड़े जानवरों को रखना मुश्किल होता है. इसलिए एक बुज़ुर्ग याक और दो छोटे याकों को सुरक्षित रखने के लिए सिरसी भेजा गया.
यहां आकर इन याकों की ज़िंदगी में भी कुछ मज़ेदार बदलाव हुए हैं, उनके लिए खास ठंडी हवा वाले पंखे लगाए गए हैं, हरी घास और पौष्टिक खाना दिया जा रहा है. धीरे-धीरे वे यहाँ की जलवायु के आदी हो रहे हैं और खुले में मस्ती से घूमते नज़र आते हैं.
‘पेट प्लैनेट’ पिछले दस सालों से घायल और बेसहारा जानवरों का घर बना हुआ है. अब तक यहाँ 1600 से ज़्यादा जानवरों, गाय, कुत्ते, बिल्लियां, उल्लू और यहाँ तक कि घोड़े, का इलाज हो चुका है. यह जगह अब एक छोटे से शौक़ से बढ़कर ‘पेट अमेजिंग प्लैनेट’ नाम के बड़े संरक्षण अभियान में बदल चुकी है.
अब इस जगह पर याक के आने से न सिर्फ स्थानीय लोग, बल्कि बच्चे भी ख़ूब उत्साहित हैं. जिन्हें अब टीवी पर नहीं, बल्कि सामने से याक देखने का मौका मिल रहा है. कर्नाटक में यह पहली बार है जब ऐसा कोई हिमालयी मेहमान यहाँ आया है, और सिरसी अब सच में ‘रोएंदार याकों का नया घर’ बन गया है.
