सुकमा। छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला एवं समूचा बस्तर क्षेत्र वर्ष 1980 के दशक से माओवाद के आतंक एवं हिंसक घटनाओं से प्रभावित रहा है। दशकों तक माओवादी हिंसा ने क्षेत्र के विकास, शांति एवं सामान्य जनजीवन को बाधित किया।
परंतु सुरक्षा बलों के अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा एवं सर्वोच्च बलिदान के परिणाम स्वरूप सुकमा ने इतिहास रचते हुए नक्सल मुक्त सुकमा – नक्सल मुक्त बस्तर के संकल्प को निर्धारित समय सीमा दिनांक 31 मार्च 2026 को पूर्ण कर लिया है, तथा सुकमा को नक्सल मुक्त घोषित किया गया है।
जिला सुकमा में शांति, सुरक्षा एवं विकास स्थापित करने के इस लंबे संघर्ष में सुरक्षा बलों ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, लगातार माओवादी हमलों, घात लगाकर किए गए आक्रमणों एवं आईईडी विस्फोटों का डटकर सामना किया।
इस संघर्ष के दौरान विभिन्न माओवादी घटनाओं में DRG/DEF/STF/COBRA/CRPF के 373 वीर जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया तथा लगभग 547 जवान घायल हुए। इन वीर सपूतों के त्याग, समर्पण एवं अदम्य साहस ने आज सुकमा को भयमुक्त और विकास की राह पर अग्रसर किया है।
आज जिन क्षेत्रों में कभी माओवादी हिंसा का प्रभाव था, वहां अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, प्रशासनिक सेवाएं एवं विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। यह उपलब्धि केवल सुरक्षा की सफलता नहीं, बल्कि उन अमर शहीदों की प्रेरक गाथा है, जिन्होंने देश की एकता, अखंडता एवं आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।
जिला सुकमा पुलिस सभी अमर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती है तथा उनके परिजनों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करती है। शहीदों का बलिदान सदैव प्रेरणा देता रहेगा और सुरक्षित, शांत एवं विकसित सुकमा ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार जिला सुकमा 1980 से 31 मार्च 2026 तक कुल मुठभेड़ – 469, कुल आईईडी विस्फोटों की घटनाएं –142, कुल जवान बलिदान – 399, कुल घायल जवान – 550
