सुप्रीम कोर्ट का वह जज कौन था जिससे जवाहरलाल नेहरू ने मांगी थी माफी?
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Jawaharlal Nehru News: जयराम रमेश ने नेहरू का 1959 का पत्र साझा किया जिसमें उन्होंने जस्टिस विवियन बोस से माफी मांगी थी. विवियन बोस संविधान और नागरिक स्वतंत्रता के लिए प्रसिद्ध थे. 1951 में, जब सुप्रीम कोर्ट नया-नया बना था, तब ‘एस. कृष्णन बनाम मद्रास राज्य’ मामले में जस्टिस विवियन बोस ने जो कहा, उसने न्यायिक जगत में तहलका मचा दिया था.

जवाहरलाल नेहरू ने पूर्व जस्टिस विवियन बोस से माफी मांगी थी. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शुक्रवार को भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को एक ‘असाधारण संस्था-निर्माता’ बताते हुए 1959 का एक ऐतिहासिक पत्र साझा किया. इस पत्र में नेहरू ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज विवियन बोस से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए जयराम रमेश ने लिखा कि कार्यपालिका और न्यायपालिका के रिश्तों पर आज खूब चर्चा होती है, लेकिन 26 जून 1959 को लिखा गया यह पत्र लोकतांत्रिक मर्यादाओं की मिसाल है. उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि नेहरू जैसे नेता संस्थाओं की गरिमा को कितनी अहमियत देते थे.
साझा किए गए पत्र में नेहरू ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जस्टिस बोस को लेकर की गई अपनी टिप्पणी पर ‘गहरा खेद’ जताया. उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी टिप्पणी अनुचित थी और उन्हें ऐसा कहने से खुद को रोकना चाहिए था. कांग्रेस का कहना है कि यह पत्र नेहरू की संवैधानिक नैतिकता, न्यायपालिका के प्रति सम्मान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने की उनकी सोच को जाहिर करता है.
Much gets talked about on the relationship between the executive and the judiciary. Here is an extraordinary letter of apology written by the Prime Minister on June 26 1959 to Justice Vivian Bose – who was a former judge at the Supreme Court.
