नई दिल्ली: भारतीय उपमहाद्वीप की दो सबसे बड़ी नदी प्रणालियां, सिंधु (Indus) और गंगा, अब विपरीत दिशाओं में बह रही हैं. एक तरफ जहां सिंधु नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी देखी जा रही है, वहीं गंगा बेसिन तेजी से सूख रहा है. ‘अर्थ्स फ्यूचर’ जर्नल में प्रकाशित आईआईटी गांधीनगर की एक ताजा स्टडी ने दक्षिण एशिया की जल सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है. रिसर्चर्स ने 1980 से 2021 के बीच के डेटा का विश्लेषण किया है. इसमें पाया गया कि पिछले चार दशकों में सिंधु बेसिन के प्रवाह में 8% की वृद्धि हुई है, जबकि गंगा बेसिन के जल प्रवाह में 17% की भारी गिरावट दर्ज की गई है.
यह स्टडी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें हाई-रिजॉल्यूशन भौतिक मॉडल का उपयोग किया गया है. इसमें बारिश, भूजल, नदियों के बहाव और सिंचाई के लिए होने वाली पंपिंग के बीच के संबंध को बारीकी से परखा गया है. आईआईटी गांधीनगर के प्रोफेसर विमल मिश्रा के अनुसार, यह बदलाव न केवल पर्यावरण के लिए चिंताजनक है, बल्कि यह भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने जल समझौतों पर भी पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करता है. गंगा का इस तरह सूखना पिछले 1,300 सालों में सबसे तेज गिरावट मानी जा रही है, जो करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकती है.
सिंधु नदी में क्यों बढ़ रहा है पानी का बहाव?
सिंधु नदी प्रणाली में पानी बढ़ने का मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) और मानसून के बदलते पैटर्न को माना जा रहा है. स्टडी के अनुसार, मुख्य सिंधु नदी और उसकी पश्चिमी सहायक नदियों जैसे झेलम और चिनाब में जलस्तर बढ़ा है. हालांकि, यह बढ़ोतरी पूरे बेसिन में एक समान नहीं है. सिंधु की पूर्वी सहायक नदियां, जैसे रावी और सतलुज, बेसिन में कुल वृद्धि के बावजूद गिरावट का सामना कर रही हैं. सिंधु जल संधि के तहत ये नदियां भारत के हिस्से में आती हैं, जिनका सूखना खेती के लिए एक बड़ा संकट बन सकता है.
गंगा बेसिन के सूखने के पीछे असली विलेन कौन?
- गंगा बेसिन में जल प्रवाह कम होने के पीछे सिर्फ कम बारिश ही एकमात्र कारण नहीं है. स्टडी बताती है कि इस क्षेत्र में बारिश में करीब 10% की कमी आई है, लेकिन सबसे बड़ा कारण सिंचाई के लिए भूजल (Groundwater) का अंधाधुंध दोहन है.
- गंगा बेसिन के कई हिस्सों में नदियों के कुल प्रवाह का 50% से 70% हिस्सा भूजल से आता है. जब किसान बड़े पैमाने पर पंपिंग करते हैं, तो नदियों तक पहुंचने वाला पानी कम हो जाता है.
- यमुना और ऊपरी गंगा के कुछ हिस्सों में तो स्थिति इतनी खराब है कि नदियों का पानी ही जमीन के नीचे सूख चुके एक्विफर्स (Aquifers) में समा रहा है.
क्या सिंधु जल संधि पर पड़ेगा इसका असर?
नदियों के बदलते मिजाज का सीधा असर 1960 की सिंधु जल संधि पर पड़ सकता है. भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस संधि को निलंबित कर दिया था. अब भारत अपनी पश्चिमी नदियों के हिस्से का उपयोग करने के लिए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को तेजी से मंजूरी दे रहा है. प्रोफेसर मिश्रा का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और पानी के मानवीय उपयोग ने पुराने जल बंटवारे के समझौतों पर दोबारा नजर डालने की जरूरत पैदा कर दी है. पाकिस्तान की कृषि काफी हद तक सिंधु के मुख्य प्रवाह पर टिकी है, जबकि भारतीय पंजाब में भूजल का स्तर गिरने से स्थिति नाजुक होती जा रही है.
जल संकट से बचने के लिए क्या हैं उपाय?
रिसर्चर्स ने चेतावनी दी है कि अगर नदियों और भूजल को अलग-अलग सिस्टम मानकर मैनेज किया गया, तो संकट और गहरा जाएगा. गंगा बेसिन को बचाने के लिए सिंचाई के तरीकों में बदलाव और कम पानी वाली फसलों (Crop Diversification) को बढ़ावा देना अनिवार्य है. हमें पानी को एक मुफ्त संसाधन समझने की भूल बंद करनी होगी. स्टडी में सुझाव दिया गया है कि भूजल के नियमन और जलवायु के अनुकूल प्रबंधन के बिना गंगा के सूखने की प्रक्रिया को रोकना नामुमकिन होगा.
