बलूचिस्तान के नुश्की, अहमदवाल, कलात और डेरा बुगती जैसे इलाकों में पाकिस्तान की सेना ने चीन के लिए बलूच घरों पर बुलडोजर चला दिया है. बलूचिस्तान के लोगों ने पाकिस्तान को आतंकवादी देश कहा है. उन्होंने दुनिया भर के देशों और संगठनों से मदद मांगी है. फ्री बलूचिस्तान मूवमेंट से जुड़े प्रतिनिधि, लेखक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने हमें बताया कि पाकिस्तान की सेना और उसके साथी बलूच लोगों पर हमले तेज कर रहे हैं. इसमें घर तोड़ना, संसाधनों की चोरी और लोगों की संख्या में बदलाव शामिल है. यह बात ऐसे समय आई है जब इलाके में तनाव बहुत बढ़ गया है.
सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान की उग्रवादी और तानाशाही ताकतें बलूचिस्तान के आम लोगों पर हमले बढ़ा रही है. बलूचिस्तान के खनिज और अन्य संसाधनों की लगातार लूट, लोगों का कत्लेआम, उनकी संस्कृति मिटाना, आर्थिक शोषण और बलूच भाषा को दबाने के अलावा, अब आजादी चाहने वाले बलूच नागरिकों के घरों को सीधे तोड़ा जा रहा है. ये काम कथित तौर पर चीन की सेना और विदेशी कंपनियों के लिए जमीन साफ करने के लिए किए जा रहे हैं.
सूत्रों के मुताबिक बलूचों ने ने चेतावनी दी है कि यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पूरे बलूचिस्तान में इसका विरोध होगा. ग्वादर और बलूचिस्तान की 800 किलोमीटर लंबी समुद्री किनारे पर बलूच गांवों को तोड़े जा रहे हैं. सूत्रों ने पाकिस्तान और चीन के गठबंधन को चिंताजनक बताया है, और कहा गया कि दोनों देश बलूच विरोधी नीतियों से लोगों की संख्या बदल रहे हैं, जिससे बलूच अपनी ही जमीन पर कम हो रहे हैं.
नुश्की, अहमदवाल, कलात, पंजगुर, खुजदार, कोहलू, काहन, डेरा बुगती जैसे इलाकों से सेना की हिंसा और दमन की खबरें हैं. खास तौर पर पनवान के ग्वादर क्षेत्र में नूर बख्श कलमाती बलूच के घर को तोड़ दिया गया. यह काम रात में किया गया, जिसमें बड़ी-बड़ी मशीनें लगाई गईं और अभियान सुबह 3 बजे तक चला. इसे डराने-धमकाने, आतंक और सामूहिक सजा बताया गया है.
सूत्रों ने कलमाती परिवार की पुरानी घटनाओं के बारे में भी बताया है, परिवार के तारिक कलमाती को पिछले साल पाकिस्तान की सेना और आईएसआई ने गायब कर दिया था, बाद में उनका शव मिला. परिवार के बाकी सदस्यों को भी गायब किए जाने की खबरें हैं. बलूचों ने कहा कि पिछले हफ्ते बलूच लड़ाकों द्वारा रक्षात्मक हमलों में पाकिस्तान की हार के बाद, पाकिस्तान ने युद्ध के नियमों का पालन करने के बजाय घर तोड़ने और बदले की कार्रवाई शुरू कर दी है.
फ्री बलूचिस्तान मूवमेंट से जुड़े प्रतिनिधि, लेखक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने वालों ने दुनिया भर के राजदूतों और अंतरराष्ट्रीय लोगों से पाकिस्तान को साफ संदेश देने की अपील की है. सूत्रों के मुताबिक उन्होंने स्थानीय बलूच लोगों की मर्जी के खिलाफ सेना रखना बलूचिस्तान की सुरक्षा और आजादी का बड़ा उल्लंघन बताया है.
इन लोगों ने चेतावनी दी कि आम लोगों के घर तोड़ना जारी रहा तो भारी नुकसान होगा. बलूच लोग अपने घर बार-बार बना सकते हैं, लेकिन पाकिस्तान की सेना, जो बलूच संसाधनों से अमीर हो गई है, अपने बड़े-बड़े महल नहीं बचा पाएगी. अगर बलूच लड़ाके जवाब देंगे, तो पाकिस्तान को बहुत बड़ा नुकसान होगा. फ्री बलूचिस्तान मूवमेंट से जुड़े प्रतिनिधि, लेखक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ को पत्र भेजा गया है. पाकिस्तान की तरफ से अभी कोई जवाब नहीं आया है. इलाके में बढ़ते तनाव पर पूरी दुनिया की नजर है.
