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पापा के टाइम में चीन से डबल अमीर थे हम, मगर आज हमारा इनकम 6 गुना कम, आखिर कहां पिछड़ गया भारत?

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पापा के टाइम में चीन से डबल अमीर थे हम, आज इनकम 6 गुना कम, कहां पिछड़ा भारत?

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India-China Growth Comparison: चीन इस वक्त वर्ल्ड इकोनॉमिक पावर है. लेकिन, ऐसा नहीं है कि वह सदियों से अमीर मुल्क था. गरीबी के मामले में उसकी हालत भारत से भी खराब थी. उसकी गिनती अफ्रीकी देशों के साथ की जाती थी. लेकिन, बीते करीब चार दशक में इस मुल्क अपना नक्शा बदल दिया है.

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चीन के हांगकांग की गगनचुंबी इमारतें. फोटो- रायटर

India-China Growth Comparison: चीन दुनिया में विकास के मानक का प्रतिमान बन गया है. वह अमेरिका के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी है. आज चीन के बगैर दुनिया में कारोबार की कल्पना नहीं की जा सकती है. उसकी आर्थिक प्रगति का असर वहां के जीवन स्तर में सुधार और उसकी मिलिट्री पावर में दिखती है. लेकिन ऐसा नहीं था कि चीन हमेशा या सदियों से अमीर था. वह एक बहुत गरीब मुल्क हुआ करता था. यह बात बहुत पुरानी भी नहीं है. हमारे-आपके पापा-दादा के वक्त यानी 1980 के दशक के वक्त चीन में आर्थिक क्रांति की इबादत लिखने का काम शुरू हुआ और आज यह मुल्क दुनिया का बादशाह बनने की कगार पर है. उस वक्त तमाम आर्थिक मानकों पर भारत, चीन से आगे था.

दरअसल, आज की कहानी में हम भारत और चीन के लोगों की प्रति व्यक्ति आय की तुलना करने जा रहे हैं. बीते करीब तीन दशक में भारत ने भी शानदार आर्थिक प्रगति की है. ग्लोबलाइजेशन और उदारीकरण के साथ खुले बाजार की नीति से भारत में काफी फायदा हुआ. भारत में उच्च मध्यवर्ग श्रेणी के लोगों का एक तबका विकसित हो गया है. बावजूद हम विकास के तमाम मानकों में चीन से बहुत पीछे हैं.

चीन की प्रति व्यक्ति आय $13,800

आज चीन में प्रति व्यक्ति आय 13,806 डॉलर है जबकि भारत में यह आंकड़ा केवल 2,878 डॉलर का है. रुपये में देखें तो चीन के हर एक व्यक्ति की सालाना आय करीब 12.50 लाख रुपये है. वहीं भारत में प्रति व्यक्ति आय 2.62 लाख रुपये के आसपास बैठता है.

लेकिन, ऐसा नहीं है कि हमेशा से चीन भारत से कोसो आगे रहा. एक वक्त ऐसा भी था जब भारत में प्रति व्यक्ति आय, चीन की तुलना में करीब-करीब डबल थी. यानी भारत के इंसान चीन के लोगों से करीब-करीब दोगुना अमीर थे. यह बात बहुत पुरानी भी नहीं है. हमारे पापा-दादा यानी 60-70 साल के भारतीय लोगों ने इस स्थिति को बखूबी देखा है. यह पूरा फासला 1960 से 1990 के दशक की गतिविधियों से पैदा हुआ.

1970-80 के दशक चीन में प्रति व्यक्ति आय करीब-करीब दुनिया में सबसे कम थी. उसकी तुलना अफ्रीकी देशों से की जाती थी. वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक 1980 में चीन में प्रति व्यक्ति (पीपीपी आधारित) आय 307 डॉलर सालाना था. यानी उस वक्त चीन के लोग औसतन दिन के एक डॉलर भी नहीं कमा पाते थे. वहीं उस वक्त भारत में प्रति व्यक्ति आय 582 डॉलर थी, जो चीन के लोगों की औसत आय से करीब-करीब दोगुनी थी. लेकिन, इसी दौरान चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था को दुनिया के लिए खोल दिया. उसने 1978 में आर्थिक सुधार की नीति लागू की और फिर देश में तेज गति से औद्योगिक प्रगति हुई. इसका सीधा लाभ वहां लोगों के जीवन स्तर में सुधार के रूप में देखा गया. और देखते ही देखते चीन में एक तरह की क्रांति आ गई. इस क्रांति के असर को आप इसी से समझ सकते हैं कि 1981 में चीन की 88 फीसदी आबादी बेहद गरीब श्रेणी (Extreme Poverty) में आती थी.

कैसे आगे निकला चीन

चीन ने 1978 में आर्थिक सुधार लागू करने के साथ स्पेशल इकोनॉमिक जोन बनाए. कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार किया. इस कारण महज पांच साल में ग्रामीण इलाकों की आय दोगुनी हो गई. 1991 में भारत और चीन के लोगों की आय करीब-करीब बराबर हो गई. चीन में आर्थिक सुधार लागू होने के करीब 13 साल भारत भी इसी राह पर चल निकला. भारत में 1991 में आर्थिक सुधार लागू हुए. लेकिन, तब तक चीन की गाड़ी पूरी रफ्तार पकड़ चुकी थी. दूसरी तरफ भारत में वह दौर राजनीतिक अस्थिरता का रहा. 1991 में प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव की सरकार में मनमोह सिंह वित्त मंत्री थे. उन्होंने इसे लागू किया लेकिन, उसकी रफ्तार कभी भी चीन की तरह मुकम्मल नहीं रही. चीन ने अपने आर्थिक सुधार के दौरान लार्ज स्कैल मैनुफैक्चरिंग पर फोकस किया. व्यापक स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया और पूरी अर्थव्यवस्था को निर्यात आधारित बनाया. इस दौरान उसकी जीडीपी विकास दर अधिकतर समय आठ फीसदी की रही. इस तहत 2000 के वक्त आते-आते चीन दुनिया की एक बड़ी आर्थिक ताकत बन गया.

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संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें

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