Sat. Feb 21st, 2026

S-400 मचाएगा गदर, फाइटर जेट छोड़िए अब क्रूज मिसाइल-ड्रोन के भी उड़ेंगे परखच्‍चे, सुदर्शन चक्र को नई धार – S400 Triumf air defence system Pantsir S1 integration intercept Low Flying Drones Cruise Missiles Indian air force proposal

Pantsir 2026 02 27088a20b72a1f86472a70c2d05fabd3

Last Updated:

S-400 Triumf Air Defence System: भारत अपने एयर डिफेंस सिस्‍टम को अभेद्य बनाने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया है. S-400 उसका एक अहम हिस्‍सा है. S-400 सिस्‍टम ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया को अपनी ताकत से अवगत कराया था. इंडियन एयर फोर्स अब अपने इस ब्रह्मास्‍त्र को और ताकतवर बनाने पर काम कर रहा है. इससे जुड़े अहम प्रस्‍ताव पर यदि मुहर लग जाता है तो फाइटर जेट के साथ लो-फ्लाइंग ड्रोन और दिशा बदलकर रडार को चकमा देने वाली क्रूज मिसाइल को इंटरसेप्‍ट कर उसे तबाह करना आसान हो जाएगा.

S-400 मचाएगा गदर, अब क्रूज मिसाइल-ड्रोन के भी उड़ेंगे परखच्‍चेZoom

S-400 Triumf Air Defence System: S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम से पैंटसिर S-1 को इंटीग्रेट करने की योजना पर विचार किया जा रहा है. इसका उद्देश्‍य लो-फ्लाइंग ड्रोन और पाथ बदलने वाली क्रूज मिसाइल को इंटरसेप्‍ट कर उसे तबाह करना है. (फाइल फोटो/Reuters)

S-400 Triumf Air Defence System: भारत अपने एयर डिफेंस सिस्‍टम को मजबूत करने के लिए हजारों-लाखों करोड़ रुपये का इन्‍वेस्‍ट कर रहा है. देश को किसी भी तरह के आसमानी खतरे से महफूज रखने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र लॉन्‍च किया है. इसके तहत प्रोजेक्‍ट कुश जैसा सिस्‍टम डेवलप किया जा रहा है जो तीन लेयर तक एरियल थ्रेट से सुरक्षा देने में सक्षम है. आकाशतीर, आकाश-NG जैसे सिस्‍टम ने भी अपनी ताकत दिखाई है. इसके अलावा भारत ने मित्र देश रूस से S-400 एयर डिफेंस इंपोर्ट किया है. इसके तीन स्‍क्‍वाड्रन भारत पहुंच चुके हैं, जबकि बाकी के दो स्‍क्‍वाड्रन की सप्‍लाई इस साल के अंत तक करने की संभावना है. इन सबका उद्देश्‍य आसमानी खतरे को न्‍यूट्रालाइज करना है. फाइटर जेट और मिसाइल को बीच रास्‍ते में ही इंटरसेप्‍ट कर उसे तबाह करना इनका लक्ष्‍य है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एक और एरियल थ्रेट से भारत को रूबरू होना पड़ा. पाकिस्‍तान की तरफ से बड़ी तादाद में ड्रोन अटैक किया गया, जिसे इंडियन एयर डिफेंस सिस्‍टम से इंटरसेप्‍ट कर उसे तबाह किया गया. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 के परफॉर्मेंस ने पूरी दुनिया को चकित कर दिया था. अब इसी S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम को और मजबूत बनाने की कवायद चल रही है, ताकि लो-फ्लाइंग ड्रोन और दिशा बदलने में माहिर क्रूज मिसाइल को इंटरसेप्‍ट किया जा सके. इसके लिए रूस से पैंटसिर S-1 सिस्‍टम खरीदने का प्रस्‍ताव है. पैंटसिर को S-400 के साथ इंटीग्रेट करने की प्‍लानिंग है, ताकि दोनों सिस्‍टम एक साथ काम कर सके. इंडियन एयरफोर्स इस प्रस्‍ताव का पुरजोर समर्थन कर रहा है.

भारत की वायु रक्षा क्षमता को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया जा रहा है. IAF ने रूस के Pantsir-S1 सिस्टम को शामिल करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसका उद्देश्य भारत के अत्याधुनिक S-400 Triumf एयर डिफेंस सिस्टम को कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन और क्रूज मिसाइल जैसे खतरों से सुरक्षित करना है. यह कदम आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप और उभरते हवाई खतरों को देखते हुए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव माना जा रहा है. रिपोर्ट्स की मानें तो पैंटसिर सिस्टम को स्वतंत्र रक्षा इकाई के रूप में तैनात करने के बजाय इसे सीधे S-400 रेजिमेंट के ऑपरेशनल स्‍ट्रक्‍चर में शामिल किया जाएगा. इस रणनीति का उद्देश्य S-400 जैसे लंबी दूरी के हाई-वैल्‍यू डिफेंस सिस्‍टम के चारों ओर एक विशेष सुरक्षा घेरा तैयार करना है. S-400 ट्रायम्फ दुनिया के सबसे एडवांस्‍ड एयर डिफेंस सिस्‍टम में से एक माना जाता है, जो लगभग 400 किलोमीटर तक की दूरी पर दुश्मन के विमान, बैलिस्टिक मिसाइल और अन्य एरियल टार्गेट को नष्ट करने में सक्षम है. हालांकि, तकनीकी और भौतिक सीमाओं के कारण यह सिस्टम बेहद कम ऊंचाई पर उड़ने वाले छोटे लक्ष्यों के खिलाफ कम प्रभावी साबित हो सकता है.

S-400 Triumf Air Defence System: पैंटसिर S-1 को S-400 के साथ इंटीग्रेट कर मिशन सुदर्शन चक्र को नई धार देने की कोशिश है. (फाइल फोटो/Reuters)

पैंटसिर क्‍यों जरूरी?

‘डिफेंस डॉट इन’ की रिपोर्ट के अनुसार, लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की मिनिमम डेटरेंस डिस्‍टेंस होती है, जिससे जमीन के बेहद करीब उड़ने वाले ड्रोन, क्रूज मिसाइल और छोटे हथियार इस सुरक्षा कवच को भेदने की कोशिश कर सकते हैं. यही वह कमजोरी है जिसे दूर करने के लिए पैंटसिर सिस्टम को शामिल करने की योजना बनाई जा रही है. पैंटसिर S-1 को विशेष रूप से कम ऊंचाई पर आने वाले खतरों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है. यह सिस्टम 30 MM की तेज फायर ऑटोमैटिक तोपों और कम दूरी की मिसाइलों से लैस होता है, जो इसे छोटे ड्रोन, क्रूज मिसाइल और अन्य कम लागत वाले एरियल वेपन के खिलाफ बेहद प्रभावी बनाता है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रोटेक्टिव एस्कॉर्ट मॉडल आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप है. इसका मतलब है कि S-400 जैसे लंबी दूरी के सिस्टम को एक निकट सुरक्षा परत प्रदान की जाएगी, जो उन खतरों को नष्ट करेगी जो बाहरी रक्षा परत को पार कर जाते हैं. आर्थिक दृष्टि से भी यह रणनीति महत्वपूर्ण है. किसी सस्ते ड्रोन या कम लागत वाले हथियार को नष्ट करने के लिए S-400 की अत्यधिक महंगी इंटरसेप्टर मिसाइल का उपयोग करना व्यावहारिक नहीं माना जाता. पैंटसिर सिस्टम इस असंतुलन को दूर करते हुए कम लागत में प्रभावी हार्ड किल सुरक्षा प्रदान करता है और S-400 के महंगे इंटरसेप्टर को हाई-वैल्‍यू टार्गेट के लिए सुरक्षित रखता है.

पैंटसिर: अभेद्य एयर डिफेंस

  1. मल्टी-लेयर एयर डिफेंस क्षमता: Pantsir-S1 मिसाइल और ऑटोमैटिक गनों का इंटीग्रेशन है. यह कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली के रूप में मिसाइल, ड्रोन, हेलीकॉप्टर और विमान को एक साथ निशाना बना सकता है.
  2. मिसाइल और गन का ज्‍वाइंट सिस्टम: इसमें 12 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और 30 मिमी की दो ऑटोमैटिक तोपें लगी होती हैं. मिसाइल लंबी दूरी के लक्ष्य को मारती है, जबकि गन नजदीकी खतरे को खत्म करती है.
  3. कम ऊंचाई वाले खतरों के खिलाफ प्रभावी: यह खास तौर पर लो-फ्लाइंग ड्रोन, क्रूज मिसाइल और प्रिसिजन गाइडेड हथियारों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है. आधुनिक युद्ध में ड्रोन हमलों से सुरक्षा के लिए बेहद कारगर माना जाता है.
  4. एडवांस रडार और ट्रैकिंग सिस्टम: सिस्टम में आधुनिक रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग तकनीक लगी होती है. यह एक साथ कई लक्ष्यों का पता लगाकर उन्हें ट्रैक और नष्ट कर सकता है.
  5. हाई मोबिलिटी और त्वरित तैनाती: Pantsir-S1 को ट्रक आधारित प्लेटफॉर्म पर लगाया जाता है, जिससे इसे तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर तैनात किया जा सकता है. यह चलते फिरते भी लक्ष्य पर हमला करने में सक्षम है.

सैचुरेशन स्‍ट्राइक क्‍या है?

आधुनिक युद्ध सिद्धांतों के अनुसार, विरोधी देश एक साथ कई मिसाइलों और ड्रोन के हमले कर एयर डिफेंस सिस्‍टम को निष्क्रिय करने की कोशिश कर सकते हैं. इसे सैचुरेशन स्ट्राइक कहा जाता है, जिसमें रक्षा प्रणाली के रडार और लॉन्चर को लक्ष्य बनाकर उसकी क्षमता को कमजोर किया जाता है. ऐसी स्थिति में S-400 बैटरी के साथ तैनात पैंटसिर सिस्टम अंतिम सुरक्षा पंक्ति के रूप में कार्य करेगा. यह रडार और लॉन्चर वाहनों पर आने वाले हमलों को रोककर लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली की प्रभावशीलता बनाए रखने में मदद करेगा. विदेशी रक्षा प्रणालियों की खरीद के साथ-साथ भारत अपनी स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को भी तेजी से विकसित कर रहा है. DRDO द्वारा विकसित Quick Reaction Surface-to-Air Missile (QRSAM) सिस्‍टम को भी स्‍ट्रैटजिक एसेट्स की सुरक्षा के लिए एक सप्‍लीमेंट्री डिफेंस लेयर के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है. भारतीय सेना और वायुसेना दोनों ने QRSAM में व्यापक आपरेशनल उपयोग के लिए रुचि दिखाई है. यह दर्शाता है कि पैंटसिर जैसे विदेशी सिस्टम की तत्काल आवश्यकता के बावजूद भारत दीर्घकालिक रूप से आत्मनिर्भर वायु रक्षा ढांचा तैयार करने के लक्ष्य पर कायम है.

नई रणनीति

डिफेंस एनालिस्‍ट का मानना है कि S-400 और पैंटसिर जैसे सिस्टम का इंटीग्रेटेड उपयोग भारत की मल्‍टी-लेयर एयर डिफेंस स्‍ट्रैटजी को और मजबूत करेगा. यह न केवल लंबी दूरी और निकट दूरी की सुरक्षा परतों के बीच समन्वय बढ़ाएगा, बल्कि आधुनिक हवाई खतरों के खिलाफ एक अधिक लचीला और लागत प्रभावी रक्षा ढांचा भी तैयार करेगा. विशेषज्ञों के अनुसार, कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन और क्रूज मिसाइलों के बढ़ते उपयोग ने पारंपरिक वायु रक्षा अवधारणाओं को चुनौती दी है. ऐसे में भारत का यह कदम भविष्य के युद्ध परिदृश्यों को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है. S-400 की सुरक्षा के लिए पैंटसिर सिस्‍टम को शामिल करने का प्रस्ताव भारत की रक्षा नीति में तकनीकी आधुनिकीकरण, आर्थिक दक्षता और मल्‍टी-लेयर सुरक्षा व्यवस्था के समन्वित दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो आने वाले समय में देश की सामरिक क्षमता को और सुदृढ़ कर सकता है.

About the Author

authorimg

Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

By uttu

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *