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Trump:ईरान से बातचीत का नहीं निकला नतीजा, ट्रंप ने पश्चिम एशिया युद्ध का खतरा स्वीकारा; क्यूबा पर भी बोले – Trump Says He’s ‘not Happy’ With Iran Talks But Will Wait To See What Happens In Further Rounds

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ बातचीत ‘उम्मीद के अनुसार नहीं चल रही’ और वे इससे खुश नहीं हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान वे चीजें देने को तैयार नहीं है जो अमेरिका चाहता है, इसलिए अभी तक कोई अंतर्निहित समझौता नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि आगे और बातचीत होनी है लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए। अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा दी है, इससे क्षेत्र में युद्ध के जोखिम की बातें भी हो रही हैं।

जिनेवा में बेनतीजा रही बातचीत

गुरुवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच एक और दौर की परमाणु वार्ता हुई, लेकिन कोई बड़ा समझौता नहीं हो पाया। अब तकनीकी स्तर की चर्चा अगले हफ्ते विएना में होने वाली है। अमेरिका की तरफ से सख्त रुख अपनाया गया है। ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि अगर ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर बड़ा समझौता नहीं किया, तो सैन्य कार्रवाई भी की जा सकती है। वहीं ईरान का कहना है कि उसे शांतिपूर्ण उद्देश्य से यूरेनियम समृद्ध करने का अधिकार है और वह परमाणु हथियार नहीं बना रहा।

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‘सैन्य विकल्प का हो सकता है इस्तेमाल’

ट्रंप ने यह स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है और अगर ईरान सही तरीके से बातचीत नहीं करेगा तो सैन्य विकल्प भी इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वे ‘दुनिया की सबसे बड़ी सेना’ रखते हैं और अगर जरूरत पड़ी तो इसका उपयोग कर सकते हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि इसका इस्तेमाल न हो।

ईरान हमला और पश्चिम एशिया संघर्ष का खतरा

जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या अमेरिका का ईरान पर हमला पूरे मध्य पूर्व युद्ध में बदल सकता है, तो ट्रंप ने कहा कि ‘जोखिम सदैव रहता है’, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अच्छा होगा यदि दोनों पक्ष बातचीत ईमानदारी से करें। ट्रंप ने कहा कि वे चाहते हैं कि ईरान परमाणु हथियार न बनाए, लेकिन ईरान के साथ बातचीत में बड़ी रुकावटें हैं। अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी नौसेना और एयर स्ट्राइक समूहों को तैनात किया है ताकि दबाव बनाया जा सके। 

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क्यूबा के बारे में ट्रंप की टिप्पणी

ट्रंप ने कहा है कि क्यूबा की सरकार आर्थिक संकट में है, उनके पास पैसे नहीं हैं और सब कुछ कठिन है, लेकिन वे अमेरिका के साथ बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने एक दिलचस्प बात कही कि क्यूबा के साथ बातचीत ‘दोस्ताना तरीके से नियंत्रण बदलने’ वाली हो सकती है, जिसे उन्होंने मैत्रीपूर्ण अधिग्रहण कहा।

अमेरिका-ईरान विवाद में इस्राइल की भूमिका

इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू लंबे समय से अमेरिका से ईरान के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग करते रहे हैं। उनका कहना है कि अगर ईरान ने हमला किया तो इस्राइल जवाब जरूर देगा। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले हफ्ते इस्राइल का दौरा करेंगे। माना जा रहा है कि यह दौरा आने वाले कदमों को लेकर अहम हो सकता है।

पश्चिम एशिया में बढ़ता सैन्य तनाव

पश्चिम एशिया में तनावपूर्ण हालात में एक तरफ जहां अमेरिका ने अपने युद्धपोत और एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात किए हैं। वहीं ईरान ने भी चेतावनी दी है कि अगर उस पर हमला हुआ, तो वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा। इसी बीच संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी की एक गोपनीय रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल ही में हुए बम हमलों के बाद ईरान ने अपने कुछ संवेदनशील परमाणु ठिकानों पर निरीक्षकों को पहुंच की अनुमति नहीं दी है। इससे यह साफ नहीं हो पा रहा कि ईरान ने वास्तव में यूरेनियम संवर्धन रोका है या नहीं। इधर, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों देशों से अपील की है कि वे सैन्य रास्ते के बजाय कूटनीतिक बातचीत पर ध्यान दें।

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By uttu

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