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विजय से तलाक चाहती हैं सुनीता: कानून में बेवफाई जुर्म नहीं, फिर क्यों गले की फांस बन सकती है पत्नी की अर्जी

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नई दिल्‍ली. तलाक की इस कानूनी जंग में थलापति विजय की ‘रील लाइफ’ की चमक उनकी ‘रियल लाइफ’ के अंधेरे के आगे फीकी पड़ती नजर आ रही है. 27 साल के अटूट भरोसे, सात फेरों के वचन और एक आदर्श परिवार की छवि को तब तगड़ा झटका लगा, जब संगीता सोर्नालिंगम ने कोर्ट की दहलीज पर कदम रखा. स्पेशल मैरिज एक्ट की धारा-27 अब सुपरस्टार थलापति विजय के लिए वो कानूनी चक्रव्यूह बन गई है जिससे निकलना उनके फिल्मी स्टंट्स जैसा आसान नहीं होगा. 27 साल के वैवाहिक सफर के बाद पत्नी संगीता सोर्नालिंगम ने कोर्ट में जो अर्जी दी है वह केवल अलगाव की मांग नहीं बल्कि विजय के चरित्र और आचरण पर धारा-27 के तहत किया गया एक बड़ा प्रहार है. इस कानून की धारा 27(1)(a) और 27(1)(d) के तहत लगाए गए व्यभिचार यानी बेवफाई और क्रूरताके आरोपों ने विजय की रील लाइफ हीरो वाली छवि को रियल लाइफ के कठघरे में ला खड़ा किया है. चलिए हम आपको भारतीय न्याय संहिता (BNS) और स्‍पेशल मैरिज एक्‍ट के नजर से इस केस के मजबूत और कमजोर पक्ष के बारे में बताते हैं.

1. कानून की नजर में: क्या ‘धोखा’ देना अपराध है?
पुराने कानून (IPC) की धारा 497 के तहत एडल्ट्री (व्यभिचार) एक अपराध था, लेकिन 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक घोषित कर दिया था.

· BNS की स्थिति: नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) में भी एडल्ट्री को ‘अपराध’ की श्रेणी में नहीं रखा गया है. यानी विजय को अफेयर के लिए जेल नहीं भेजा जा सकता.

· तलाक का आधार: हालांकि एडल्ट्री अपराध नहीं है लेकिन यह सिविल कानून (Civil Law) के तहत तलाक का एक बहुत मजबूत आधार है. स्‍पेशल मैरिज एक्‍ट 1954 की धारा 27(1)(a) के तहत यदि पति या पत्नी में से कोई भी एक्स्ट्रा-मेरिटल अफेयर में शामिल है तो दूसरा पक्ष तलाक मांग सकता है.

2. संगीता (पत्नी) के लिए क्या मजबूत पक्ष हैं?

संगीता ने गंभीर आरोप लगाए हैं जिन्हें साबित करने पर उनका पक्ष मजबूत होगा:

· एडल्ट्री और निरंतरता: संगीता का दावा है कि अफेयर 2021 में शुरू हुआ और समझाने के बाद भी जारी रहा. कानून में निरंतर एडल्ट्री को बहुत गंभीरता से लिया जाता है.

· मानसिक क्रूरता: अभिनेत्री के साथ विजय की तस्वीरों का सोशल मीडिया पर आना और विजय का उन्हें न रोकना, पत्नी और बच्चों के लिए सार्वजनिक अपमान माना जा सकता है. यह मेंटल क्रूरिटी के तहत आता है.

· वित्तीय प्रतिबंध: संगीता ने आरोप लगाया है कि उनकी आवाजाही पर रोक लगाई गई और आर्थिक सुविधाएं छीनी गईं. यह घरेलू हिंसा और क्रूरता के दायरे में आता है.

· साक्ष्य: यदि संगीता के पास यात्रा टिकट, सोशल मीडिया पोस्ट या प्रत्यक्ष प्रमाण हैं तो कोर्ट उनके पक्ष में फैसला सुना सकता है.

3. थलापति विजय के लिए क्या मजबूत पक्ष हैं?

विजय के वकील इन प्‍वाइंट्स पर बचाव कर सकते हैं:

· सहमति या माफी: यदि विजय यह साबित कर दें कि 2021 के बाद भी वे एक साथ रह रहे थे और संगीता ने उस व्यवहार को स्वीकार कर लिया था तो कानून इसे माफी मान सकता है, जिससे एडल्ट्री का आधार कमजोर हो जाता है.

· पेशेवर संबंध बनाम अफेयर: विजय यह तर्क दे सकते हैं कि अभिनेत्री के साथ उनके संबंध केवल पेशेवर हैं और साथ यात्रा करना या कार्यक्रम में जाना काम का हिस्सा है.

· आरोपों की सत्यता: एक्स्ट्रा-मेरिटल अफेयर साबित करने का बर्डन ऑफ प्रूफ (साबित करने की जिम्मेदारी) पत्नी पर होता है. यदि ठोस सबूत (जैसे होटल बिल, निजी वीडियो या प्रत्यक्ष गवाह) नहीं हैं तो केवल सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर एडल्ट्री साबित करना मुश्किल होता है.

आगे क्या होगा?

कानून के अनुसार चूंकि यह मामला स्‍पेशल मैरिज एक्‍ट के तहत है, इसलिए कोर्ट पहले मध्यस्थता की कोशिश करेगा. यदि सुलह नहीं होती तो संगीता को विजय के ‘व्यभिचारी आचरण’ और ‘क्रूरता’ को साबित करना होगा. अगर आरोप सिद्ध होते हैं तो संगीता भारी भरण-पोषण और संपत्ति में हिस्से की हकदार होंगी.

सवाल-जवाब

क्या एडल्ट्री के आधार पर विजय को जेल हो सकती है?

नहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले और नए BNS कानून के तहत एडल्ट्री अब अपराध नहीं है. यह केवल तलाक लेने का एक कानूनी आधार है.

संगीता ने किन धाराओं के तहत अर्जी दी है?

उन्होंने विशेष विवाह अधिनियम, 1954 की धारा 27(1)(a) (एडल्ट्री) और 27(1)(d) (क्रूरता) के तहत तलाक मांगा है.

विजय के राजनीतिक करियर पर इसका क्या असर पड़ सकता है?

विजय ने हाल ही में अपनी पार्टी (TVK) लॉन्च की है. सार्वजनिक जीवन में ‘चरित्र’ और ‘पारिवारिक मूल्यों’ पर लगने वाले आरोप उनकी छवि को नुकसान पहुँचा सकते हैं, जिसे विपक्ष मुद्दा बना सकता है.

By uttu

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