भारत–कनाडा रिश्तों को नई रफ्तार: सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा और व्यापार पर फोकस
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India Canada relations: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा से भारत-कनाडा संबंधों में नया दौर शुरू हुआ है. सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा, व्यापार और टेक्नोलॉजी में सहयोग को नई ऊंचाई मिलने की उम्मीद है.

मार्क कार्नी कनाडा के पीएम बनने के बाद पहली भारत यात्रा पर हैं.
भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय संबंध अब एक नए, मजबूत और गतिशील दौर में प्रवेश कर चुके हैं. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी अपने पहले आधिकारिक द्विपक्षीय दौरे पर भारत पहुंचे हैं. वह मार्च 2025 में कनाडा के पीएम बने थे. यह यात्रा फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुई और दोनों देशों के बीच पिछले कुछ सालों की तनावपूर्ण स्थिति को पीछे छोड़ते हुए व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और टेक्नोलॉजी में सहयोग को नई ऊंचाई देने का मौका लेकर आई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मुलाकात पहले भी हो चुकी है. दोनों नेता जून 2025 में कनाडा में G-7 शिखर सम्मेलन और नवंबर 2025 में G-20 में मिल चुके हैं. इन बैठकों ने रिश्तों में तेजी लाई है. अब कार्नी की इस यात्रा से भारत-कनाडा साझेदारी को रणनीतिक स्तर पर और मजबूत करने की उम्मीद है. दोनों देश लोकतंत्र, कानून का शासन, प्रेस की आजादी और मानवाधिकार जैसे साझा मूल्यों पर खड़े हैं.
सुरक्षा सहयोग में नया जोर
हाल ही में दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों भारत के अजीत डोभाल और कनाडा की नाथाली जी. ड्रूइन की ओटावा में बैठक हुई. इसमें ड्रग्स तस्करी (खासकर फेंटेनिल प्रीकर्सर), संगठित अपराध, साइबर सुरक्षा और ट्रांसनेशनल क्राइम पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी. दोनों पक्षों ने सुरक्षा और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों में लियाजन ऑफिसर तैनात करने, सूचना साझा करने और साइबर पॉलिसी पर सहयोग को औपचारिक रूप देने का फैसला किया. 1997 के काउंटर-टेररिज्म जॉइंट वर्किंग ग्रुप और 2018 के नए ढांचे के बाद यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आतंकवाद, उग्रवाद और साइबर थ्रेट्स से निपटने में मदद करेगा.
परमाणु ऊर्जा में नया समझौता संभव
परमाणु क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों की पुरानी ताकत रही है. 2010 का परमाणु सहयोग समझौता 2013 में लागू हुआ था. 2015 में CAMECO और भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग के बीच यूरेनियम सप्लाई का करार हुआ. अब दोनों पक्ष नए 10 साल के समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं. भारत अपनी न्यूक्लियर क्षमता को 2047 तक 100 गीगावॉट तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता है और कनाडा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक होने के नाते इसमें अहम भूमिका निभा सकता है. कार्नी की यात्रा के दौरान करीब 2.8 बिलियन डॉलर की यूरेनियम सप्लाई डील संभव है, जो भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करेगा.
व्यापार और अन्य क्षेत्र
दोनों देश व्यापार को दोगुना करने (2030 तक 60 बिलियन डॉलर) के लिए CEPA (कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट) वार्ता को फिर से शुरू करने पर सहमत हैं. शिक्षा, AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, क्रिटिकल मिनरल्स, ऑयल-गैस और लोगों के आपसी संबंध भी फोकस में हैं. कनाडा में बड़ी भारतीय डायस्पोरा दोनों देशों को जोड़ती है. कुल मिलाकर, मार्क कार्नी की यह यात्रा भारत-कनाडा रिश्तों में ‘रिसेट’ का प्रतीक है. सुरक्षा, क्लीन एनर्जी और आर्थिक साझेदारी के नए दौर में दोनों देश मिलकर वैश्विक चुनौतियों का सामना करने को तैयार हैं.
