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मिडिल ईस्ट तनाव का क्या भारतीय निवेशकों को होगा बड़ा नुकसान?

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दुबई :मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव ने सिर्फ तेल बाजार ही नहीं, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर को भी चिंता में डाल दिया है। खासकर दुबई, जो पिछले कुछ सालों में दुनिया के अमीरों का पसंदीदा निवेश केंद्र बन चुका है, अब अनिश्चितता के दौर से गुजर सकता है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष का असर यूएई तक पहुंचने की खबरों ने निवेशकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

अमीरों की पहली पसंद बना दुबई
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शून्य इनकम टैक्स और कारोबारी सहूलियतों के कारण वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करता रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल करीब 9,800 अमीर लोगों ने यूएई का रुख किया। इनमें बड़ी संख्या भारतीय निवेशकों की भी रही। दुबई के रियल एस्टेट बाजार ने 2025 में 187 अरब डॉलर की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की। 2.15 लाख से अधिक प्रॉपर्टी डील्स हुईं, जिसने इसे दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते प्रॉपर्टी मार्केट्स में शामिल कर दिया।

हमले की खबरों से बढ़ी बेचैनी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुबई के प्रतिष्ठित इलाकों में सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया। पाम जुमेराह में कथित हमले की खबरों के बाद चार लोगों के घायल होने की बात सामने आई। वहीं एहतियातन बुर्ज खलीफा को भी खाली कराया गया। हालांकि इन घटनाओं की आधिकारिक पुष्टि सीमित है, लेकिन इन खबरों ने बाजार की धारणा पर असर डाला है।

क्या डील्स रुकेंगी?
स्थानीय ब्रोकर्स का कहना है कि फिलहाल स्थिति सामान्य है, लेकिन जो खरीदार प्रॉपर्टी डील फाइनल करने वाले थे, वे कुछ समय के लिए इंतजार कर सकते हैं। दुबई के दो एयरपोर्ट अस्थायी रूप से बंद होने से भी निवेशकों के मन में आशंका बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकाल में प्रॉपर्टी सेल में गिरावट देखी जा सकती है, लेकिन लंबे समय में दुबई की मजबूत बुनियाद बाजार को संभाल सकती है।

कीमतें बढ़ेंगी या स्थिर रहेंगी?
रियल एस्टेट विश्लेषकों का कहना है कि दुबई में पहले से कुछ ओवरसप्लाई की स्थिति है। इसलिए अचानक कीमतों में भारी उछाल या गिरावट की संभावना कम है। अगर संघर्ष लंबा खिंचता है, तो निवेशकों की धारणा प्रभावित हो सकती है, जिससे बाजार में अस्थायी सुस्ती आ सकती है।

By uttu

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