Published on: 04-Mar-2026
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भारत की ट्रैक्टर इंडस्ट्री इस समय TREM V उत्सर्जन मानकों को लेकर महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है। केंद्र सरकार द्वारा 1 अप्रैल 2026 से इन सख्त मानकों को लागू करने की चर्चा ने किसानों, ट्रैक्टर निर्माताओं और डीलरों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। उद्योग संगठनों का कहना है कि नए नियमों के लागू होने से उत्पादन लागत में भारी बढ़ोतरी होगी, जबकि किसान संगठनों को चिंता है कि इससे ट्रैक्टरों की कीमतें बढ़ेंगी और खेती की लागत पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि TREM V मानक कब और किस रूप में लागू होंगे, क्या छोटे ट्रैक्टर भी इसके दायरे में आएंगे, और आखिर किसानों को नए ट्रैक्टर खरीदने के लिए कितनी अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
वर्तमान उत्सर्जन मानक: अभी कौन सा नियम लागू है?
वर्तमान समय में भारत में ट्रैक्टरों के लिए अलग-अलग हॉर्सपावर श्रेणियों के अनुसार उत्सर्जन मानक लागू हैं। 50 हॉर्सपावर (HP) से कम क्षमता वाले ट्रैक्टर TREM IIIA मानकों के अंतर्गत आते हैं, जिनमें उत्सर्जन नियंत्रण के अपेक्षाकृत कम सख्त प्रावधान हैं। वहीं 50 HP से अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टर TREM IV मानकों का पालन करते हैं, जिनमें इंजन तकनीक अधिक उन्नत और प्रदूषण नियंत्रण के उपाय अधिक प्रभावी होते हैं। अब सरकार की तैयारी है कि अप्रैल 2026 से सभी हॉर्सपावर श्रेणियों के ट्रैक्टरों को TREM V के तहत लाया जाए। इसका अर्थ है कि छोटे ट्रैक्टरों में भी एडवांस्ड एग्जॉस्ट आफ्टर-ट्रीटमेंट सिस्टम, बेहतर फ्यूल इंजेक्शन तकनीक और अतिरिक्त सेंसर जैसी आधुनिक तकनीकों को शामिल करना अनिवार्य हो सकता है।
TREM V लागू होने पर क्या होंगे बड़े बदलाव?
TREM V मानक लागू होने के बाद ट्रैक्टरों के इंजन डिज़ाइन और एग्जॉस्ट सिस्टम में व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे। कंपनियों को इंजन में पार्टिकुलेट मैटर (PM) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) उत्सर्जन को कम करने के लिए डीजल पार्टिकुलेट फिल्टर (DPF) और सेलेक्टिव कैटेलिटिक रिडक्शन (SCR) जैसी तकनीकों का उपयोग करना पड़ सकता है। इससे न केवल निर्माण लागत बढ़ेगी, बल्कि रखरखाव और सर्विसिंग की लागत भी बढ़ सकती है। छोटे ट्रैक्टर, जो अभी तक अपेक्षाकृत सरल इंजन तकनीक पर आधारित थे, उन्हें भी अब बड़े ट्रैक्टरों जैसी उन्नत तकनीक से लैस करना पड़ेगा। इससे छोटे और मध्यम किसानों पर सीधा आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है।
ट्रैक्टरों की कीमत में कितनी बढ़ोतरी संभव?
विशेषज्ञों का मानना है कि TREM V मानक लागू होने के बाद ट्रैक्टरों की कीमत में 5% से 15% तक की वृद्धि संभव है, हालांकि अंतिम आंकड़ा मॉडल और हॉर्सपावर श्रेणी पर निर्भर करेगा। उदाहरण के तौर पर, यदि वर्तमान में 45–50 HP श्रेणी का ट्रैक्टर 7 से 8 लाख रुपये के बीच मिलता है, तो नई तकनीक जुड़ने के बाद इसकी कीमत में 40,000 से 1,00,000 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। 60 HP से ऊपर की श्रेणी में यह अंतर और अधिक हो सकता है। इसके अलावा, उन्नत सिस्टम की वजह से फ्यूल क्वालिटी और नियमित सर्विसिंग पर भी विशेष ध्यान देना होगा, जिससे संचालन लागत में भी हल्की बढ़ोतरी हो सकती है।
किसानों और कंपनियों की मांग क्या है?
उद्योग संगठनों और ट्रैक्टर निर्माताओं का मानना है कि TREM V लागू करने के लिए कंपनियों को पर्याप्त समय और तकनीकी तैयारी की आवश्यकता है। वहीं किसान संगठनों की मांग है कि सरकार छोटे ट्रैक्टरों को कुछ समय तक छूट दे या सब्सिडी के माध्यम से कीमत वृद्धि का बोझ कम करे। कई विशेषज्ञ यह भी सुझाव दे रहे हैं कि चरणबद्ध तरीके से लागू करना अधिक व्यावहारिक रहेगा, ताकि बाजार में अचानक कीमतों का झटका न लगे।
आने वाला समय कैसा रहेगा?
स्पष्ट है कि TREM V उत्सर्जन मानक भारतीय ट्रैक्टर उद्योग के लिए एक बड़ा तकनीकी बदलाव साबित हो सकता है। इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण है, लेकिन इसके साथ-साथ किसानों की आर्थिक क्षमता को ध्यान में रखना भी आवश्यक है। आने वाले महीनों में सरकार की अंतिम अधिसूचना और उद्योग की तैयारियों पर बहुत कुछ निर्भर करेगा। फिलहाल किसानों के लिए यह जरूरी है कि वे ट्रैक्टर खरीदने की योजना बनाते समय संभावित कीमत वृद्धि और नई तकनीक से जुड़े रखरखाव पहलुओं को ध्यान में रखें, ताकि भविष्य में उन्हें किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
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