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बांग्लादेश में नरक भोगने वाली दिपाली दास बनीं पहली ‘CAA नागरिक’, 2 साल जेल का टॉर्चर और 36 साल की जिल्लत के बाद मिली इज्जत

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36 साल की जिल्लत के बाद मिली पहचान, दिपाली दास बनीं पहली CAA नागरिक

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First CAA Citizenship: असम के कछार जिले की 60 साल की दिपाली दास CAA के तहत नागरिकता पाने वाली पहली महिला बन गई हैं. बांग्लादेश से 1988 में भारत आई दिपाली को कभी अवैध विदेशी घोषित कर डिटेंशन कैंप में रखा गया था, जहां उन्होंने दो साल बिताए. 36 साल के लंबे संघर्ष और कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार उन्हें भारतीय नागरिकता का प्रमाणपत्र मिला है.

36 साल की जिल्लत के बाद मिली पहचान, दिपाली दास बनीं पहली CAA नागरिकZoom

दिपाली दास को असम में CAA के तहत पहली बार भारतीय नागरिकता मिली. (फोटो NW18)

नई दिल्ली: 36 साल का इंतजार, दो साल का जेल जैसा जीवन और पहचान के लिए लगातार संघर्ष. असम के कछार जिले की 60 साल की दिपाली दास की कहानी कुछ ऐसी ही है. बांग्लादेश में कथित उत्पीड़न के बाद वह 1988 में अपने पति के साथ भारत आई थीं. उम्मीद थी कि यहां उन्हें सुरक्षित जीवन मिलेगा. लेकिन इसके बाद उनकी जिंदगी में संघर्ष का लंबा दौर शुरू हो गया. उन पर अवैध विदेशी होने का आरोप लगा. मामला विदेशी न्यायाधिकरण तक पहुंचा और आखिरकार 2019 में उन्हें सिलचर के डिटेंशन कैंप में भेज दिया गया. वहां उन्होंने दो साल तक हिरासत में रहकर मुश्किल हालात झेले. लेकिन अब वही दिपाली दास इतिहास बना चुकी हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार दिपाली दास को 6 मार्च को भारतीय नागरिकता का प्रमाणपत्र मिला. वह असम में नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी CAA के तहत नागरिकता पाने वाली पहली महिला बन गई हैं. यह उनके लिए सिर्फ एक दस्तावेज नहीं बल्कि 36 साल के संघर्ष का अंत है. सालों तक ‘विदेशी’ कहे जाने का दर्द और सामाजिक अपमान सहने के बाद आखिरकार उन्हें भारतीय नागरिक के रूप में पहचान मिल गई. यह घटना CAA के लागू होने के बाद उसकी पहली बड़ी मिसाल के रूप में देखी जा रही है और इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है.

दिपाली दास को नागरिकता मिलने की कहानी क्या है?

दिपाली दास का जन्म बांग्लादेश के सिलहट जिले के दिप्पुर गांव में हुआ था. उन्होंने 1987 में अभिमन्यु दास से शादी की और 1988 में दोनों भारत आ गए. वे असम के कछार जिले में बस गए. लेकिन 2013 में पुलिस ने विदेशी अधिनियम के तहत जांच शुरू की और उन पर अवैध तरीके से भारत में प्रवेश करने का आरोप लगा. मामला विदेशी न्यायाधिकरण में गया और बाद में उन्हें 2019 में सिलचर के डिटेंशन कैंप में भेज दिया गया. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद महामारी के दौरान उन्हें जमानत मिली. इसके बाद उन्होंने कानूनी प्रक्रिया के जरिए CAA के तहत नागरिकता के लिए आवेदन किया.

प्रश्न 2: CAA के तहत उन्हें नागरिकता कैसे मिली?

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) उन लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान करता है जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए और यहां लंबे समय से रह रहे हैं. दिपाली दास का मामला इसी श्रेणी में माना गया. कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनका आवेदन स्वीकार किया गया और 6 मार्च को उन्हें आधिकारिक नागरिकता प्रमाणपत्र दे दिया गया.

डिटेंशन कैंप में उनका अनुभव कैसा रहा?

रिपोर्ट्स के अनुसार दिपाली दास ने सिलचर के डिटेंशन कैंप में करीब दो साल बिताए. यह समय उनके लिए बेहद कठिन था. परिवार से दूर रहना, कानूनी लड़ाई और समाज में ‘विदेशी’ कहे जाने का दर्द इन सबने उनकी जिंदगी को प्रभावित किया. महामारी के दौरान सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें जमानत मिली, जिसके बाद वह घर लौट सकीं और अपनी नागरिकता के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखी.

नागरिकता से मिली इज्जत

  • दिपाली दास की नागरिकता पर सवाल 2013 में उठा था, जब पुलिस को शिकायत मिली कि वह 1971 के बाद बांग्लादेश से भारत आई हैं. असम समझौते के अनुसार 25 मार्च 1971 के बाद आने वाले लोगों को नागरिकता के लिए अलग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. इसी कारण उनका मामला विदेशी न्यायाधिकरण तक पहुंचा और उन्हें डिटेंशन कैंप भेज दिया गया.
  • सिलचर के सामाजिक कार्यकर्ता कमल चक्रवर्ती और अधिवक्ता धर्मानंद देब की मदद से दिपाली दास ने कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई. आखिरकार CAA के तहत उनका आवेदन स्वीकार हुआ. उनके छह बच्चे हैं और अब नागरिकता मिलने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली है. वर्षों की अनिश्चितता के बाद उन्हें आखिरकार वह पहचान मिल गई जिसकी वह लंबे समय से इंतजार कर रही थीं.

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Sumit Kumar

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें

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