पानी की कमी में भी करें इस फसल की खेती, मवेशी भी नहीं करेंगे नुकसान
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Agriculture New: रबी सीजन में किसान कुसुम की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. रबी सीजन में चना सहित अन्य फसलों में अधिक सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है. लेकिन कुसुम ऐसी फसल है. जिसे केवल एक बार पानी देने पर भी तैयार किया जा सकता है. कुसुम की एक खासियत यह भी है कि इसे जानवरों से किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता है.
पलामू जिले में कम वर्षा और शुष्क भूमि की समस्या के कारण किसानों को हर साल खेती में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे हालात में कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली फसलों की खेती किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन सकती है. इसी दिशा में कृषि वैज्ञानिक डॉ. डी. एन. सिंह किसानों को कुसुम की खेती अपनाने की सलाह दे रहे हैं.
डॉ. डी. एन. सिंह इन दिनों पलामू में चल रही शुष्क भूमि परियोजना पर मुख्य वैज्ञानिक के रूप में कार्य कर रहे हैं. इस परियोजना का उद्देश्य कम खेत और कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली खेती की तकनीकों को बढ़ावा देना है, ताकि कम बारिश वाले क्षेत्रों में भी किसानों को अच्छी आमदनी मिल सके.
कुसुम फसल कम पानी वाले इलाकों उपयुक्त
रबी सीजन में किसान कुसुम की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. सामान्यतः रबी सीजन में चना सहित अन्य फसलों में अधिक सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है. लेकिन कुसुम ऐसी फसल है. जिसे केवल एक बार पानी देने पर भी तैयार किया जा सकता है. यह फसल कम पानी वाले इलाकों के लिए काफी उपयुक्त मानी जाती है.कुसुम की एक खासियत यह भी है कि इसे जानवरों से किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता है. इसके पौधे कंटीले होते हैं, इसलिए मवेशी इसे नुकसान नहीं पहुंचाते. इससे किसानों को फसल की सुरक्षा को लेकर भी ज्यादा चिंता नहीं करनी पड़ती.
कुसुम का ए–300 प्रभेद काफी बेहतर
डॉ. सिंह ने बताया कि पलामू जैसे कम वर्षा वाले क्षेत्र में किसानों को ऐसी फसलों की ओर ध्यान देना चाहिए, जो कम पानी में भी अच्छी उपज दें. कुसुम इसी श्रेणी की एक महत्वपूर्ण तिलहनी फसल है. इसकी खेती से किसानों को अतिरिक्त आय भी प्राप्त हो सकती है. कुसुम का ए–300 प्रभेद किसानों के लिए काफी बेहतर है. किसान इस किस्म के बीज क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र से प्राप्त कर इसकी खेती शुरू कर सकते हैं. सही तकनीक अपनाने पर यह फसल किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है.
