6. एलपीजी और पीएनजी- दोनों तरह के गैस हम कहां से और कितना आयात करते हैं?
एलपीजी और पीएनजी (प्राकृतिक गैस) दोनों ही मामलों में भारत अपनी जरूरतों के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) और अन्य व्यापारिक डेटाबेस के आंकड़े इस निर्भरता और आपूर्ति शृंखला की असलियत बताते हैं।
पिछले एक दशक में भारत में एलपीजी की मांग बहुत तेजी से बढ़ी है। इसका मुख्य कारण सरकार की ओर से ग्रामीण भारत में स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन उपलब्ध कराने के लिए ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ (पीएमयूवाई) का सफलतापूर्वक विस्तार करना रहा है । हालांकि, इस भारी मांग को पूरा करने के लिए घरेलू उत्पादन में आनुपातिक रूप से वृद्धि नहीं हुई है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली छमाही के पीपीएसी डेटा के अनुसार, भारत ने कुल 6,219 टीएमटी एलपीजी का उत्पादन किया, जबकि इसी अवधि में खपत 16,200 टीएमटी दर्ज की गई । इस बड़े अंतर को पाटने के लिए भारत को 10,731 टीएमटी एलपीजी का आयात करना पड़ा, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भारत अपनी कुल एलपीजी मांग का 62 प्रतिशत विदेशों से आयात करता है । वर्ष 2024 में, भारत पेट्रोलियम गैस के आयात पर लगभग 30.7 बिलियन डॉलर खर्च करके दुनिया का 5वां सबसे बड़ा आयातक देश बन गया था । भारत की एलपीजी आयात आपूर्ति शृंखला पूरी तरह से पश्चिम एशिया पर केंद्रित है। नीचे दी गई तालिका भारत के शीर्ष पेट्रोलियम गैस आपूर्तिकर्ताओं को दर्शाती है।
स्रोत: OEC World 2024 / PPAC
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प्राकृतिक गैस
दूसरी ओर, भारत अपनी प्राकृतिक गैस की मांग का लगभग 50 प्रतिशत घरेलू उत्पादन से पूरा करता है, जबकि शेष 50 प्रतिशत की पूर्ति तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के आयात के जरिए पूरी की जाती है । 2023 के आंकड़ों के अनुसार, भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एलएनजी आयातक देश है, इसने 2.2 ट्रिलियन क्यूबिक फीट (Tcf) प्राकृतिक गैस की खपत की । एलएनजी आयात का यह परिमाण निरंतर बढ़ रहा है। दिसंबर 2024 तक के चालू वित्तीय वर्ष के लिए संचयी आयात 28,586 MMSCM दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 24.1 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि को दर्शाता है । एलएनजी आयात के मोर्चे पर भारत की स्थिति एलपीजी की तुलना में अधिक सुरक्षित है क्योंकि इसके स्रोत भौगोलिक रूप से बहुत अधिक विविध हैं।

स्रोत: WITS विश्व बैंक व्यापार प्रवाह 2024
7. सुरक्षा के दृष्टिकोण से दोनों ईंधनों में से कौन सा अधिक सुरक्षित है?
सुरक्षा के लिहाज से पीएनजी निर्विवाद रूप से एलपीजी से अधिक सुरक्षित विकल्प है। एलपीजी हवा से भारी होती है; रिसाव होने पर यह फर्श के पास जमा हो जाती है जिससे विस्फोट का अत्यधिक जोखिम रहता है। वहीं, पीएनजी का मुख्य घटक मीथेन हवा से हल्का होता है, जो रिसाव की स्थिति में तेजी से ऊपर उठकर वातावरण में वाष्पित हो जाता है। इसके अलावा, एलपीजी को सिलेंडर में आठ बार के अत्यधिक उच्च दबाव पर रखा जाता है, जबकि पीएनजी घरेलू पाइपलाइनों में केवल 21 मिलीबार के बहुत ही कम दबाव पर वितरित की जाती है।
8. क्या पीएनजी का इस्तेमाल करना एलपीजी से सस्ता है?
हां, उपभोक्ता के नजरिए से पीएनजी को अपनाना आर्थिक रूप से अधिक फायदेमंद है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, समान मात्रा में खाना पकाने के लिए पीएनजी उपभोक्ता एलपीजी उपभोक्ताओं की तुलना में प्रति माह लगभग 300 से 400 रुपये कम भुगतान करते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि पीएनजी में बॉटलिंग, गैस एजेंसियों के कमीशन और ट्रकों द्वारा भारी सिलेंडरों के परिवहन का खर्च शामिल नहीं होता। साथ ही, पीएनजी मीटर-आधारित है, जहां उपभोक्ता केवल उपयोग की गई गैस का ही भुगतान करता है।
9. पीएनजी नेटवर्क के विस्तार से रसद और पर्यावरण को क्या फायदे होंगे?
पारंपरिक एलपीजी वितरण में लाखों भारी सिलेंडरों को ट्रकों के माध्यम से घुमाना पड़ता है, जो रसद के दृष्टिकोण से एक दुःस्वप्न है। पीएनजी इस पूरी लॉजिस्टिक (रसद) बाधा को खत्म कर देती है क्योंकि इसमें ईंधन भूमिगत पाइपलाइनों से 24/7 सीधे रसोई तक पहुंचता है। पर्यावरणीय मोर्चे पर भी, पीएनजी के दहन से प्रति मिलियन Btu केवल 53.06 किलोग्राम कार्बन डाई ऑक्साइड गैस (CO2) निकलती है। इसके अलावा, पाइपलाइन ट्रांसमिशन नेटवर्क की ऊर्जा दक्षता उच्च होने के कारण इसका ‘वेल-टू-बर्नर’ कार्बन फुटप्रिंट एलपीजी के समुद्री और सड़क परिवहन की तुलना में काफी कम होता है।
10. भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर पीएनजीआरबी की क्या योजना है?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) के अनुसार, सरकार का लक्ष्य भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को 2022 के 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 2030 तक 15 प्रतिशत करना है। 2030 तक शहरी गैस वितरण (सीजीडी) की खपत 2.5 से 3.5 गुना तक बढ़ने का अनुमान है। इसके लिए पूरे देश को जोड़ने हेतु लगभग 33,500 किलोमीटर के प्राकृतिक गैस पाइपलाइन (एनजीपीएल) नेटवर्क को अधिकृत किया गया है, जिसमें से लगभग 25,000 किलोमीटर का संचालन शुरू हो चुका है। चूंकि प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का आयात अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका जैसे विविध देशों से होता है, इसलिए यह भारत को एलपीजी की तरह किसी एक भौगोलिक बिंदु पर भू-राजनीतिक बंधक नहीं बनने देगा।

