Jamshedpur Traditional Sweets: चॉकलेट और बर्गर के इस दौर में जमशेदपुर की गलियों में आज भी एक ऐसी मिठाई जीवित है. जो स्वाद से ज्यादा यादों का अहसास कराती है. हम बात कर रहे हैं ‘मुंबई मिठाई’ की. जिसे पिछले 45 वर्षों से जीतन जी अपनी बांस की छड़ी पर लपेटे शहर के कोनों-कोनों तक पहुंचा रहे हैं. दूध और चीनी के मेल से बनी इस लचीली मिठाई को जीतन जी अपने हाथों की जादूगरी से मिनटों में घड़ी, चिड़िया, मोर या साइकिल का आकार दे देते हैं. लोकल 18 से बातचीत में वे बताते हैं कि कभी शहर में 100 से ज्यादा लोग इसे बेचते थे. लेकिन अब गिनती के 20-25 लोग ही बचे हैं. सुबह 8 से रात 8 बजे तक गलियों की खाक छानकर वे रोजाना लगभग 1000 रुपये कमा लेते हैं. जीतन जी कहते हैं कि आज भी कई बड़े लोग मुझे रोककर कहते हैं भैया, बचपन वाली घड़ी बना दीजिए. यह मिठाई महज एक व्यंजन नहीं, बल्कि जमशेदपुर की सांस्कृतिक विरासत का वह हिस्सा है जो आधुनिकता के शोर में भी अपनी पहचान बनाए हुए है.

