नई दिल्ली (IPS Training Process). देश के लाखों युवा भारतीय पुलिस सेवा का हिस्सा बनने का सपना देखते हैं. इसके लिए यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास करना बस एक शुरुआत है. असली चुनौती और रोमांच तो इसके बाद शुरू होने वाली ट्रेनिंग में छिपा है. आम नागरिक से लेकर अनुशासित पुलिस अधिकारी बनने का यह सफर शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत सख्त होता है. आईपीएस की ट्रेनिंग केवल कानून सिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि धैर्य, साहस और नेतृत्व क्षमता की असली परीक्षा है.
ट्रेनी आईपीएस अफसर का रूटीन क्या होता है?
सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी का रूटीन बहुत सख्त होता है. आईपीएस अधिकारी की ट्रेनिंग सुबह सूरज उगने से पहले ही शुरू हो जाती है. घुड़सवारी से लेकर हथियार चलाने और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में जीवित रहने तक, ट्रेनी आईपीएस को वह सब कुछ सिखाया जाता है जो उसे फील्ड पर जांबाज अफसर बनाता है. समझिए आईपीएस की ट्रेनिंग का पूरा रोडमैप और पहली पोस्टिंग का गणित.
आईपीएस ट्रेनिंग: मसूरी से पहली पोस्टिंग तक का पूरा सफर
अगर आप यूपीएससी परीक्षा पास करके आईपीएस अफसर बनने का सपना देख रहे हैं तो मसूरी से पहली पोस्टिंग तक का पूरा सफर पता होना चाहिए.
ट्रेनिंग की अवधि: ट्रेनिंग कितने साल की होती है?
आईपीएस अधिकारी की कुल ट्रेनिंग लगभग 2 साल (अंदाजन 100-105 हफ्ते) की होती है. इसे अलग-अलग चरणों में बांटा गया है:
- फाउंडेशन कोर्स (3 महीने): मसूरी में आईएएस और अन्य सेवाओं के साथ.
- फेज-1 (11 महीने): हैदराबाद की पुलिस एकेडमी में बेसिक ट्रेनिंग.
- डिस्ट्रिक्ट प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (6 महीने): अलॉट किए गए कैडर (राज्य) के किसी जिले में ऑन-फील्ड ट्रेनिंग.
- फेज-2 (1 महीने): वापस एकेडमी में अनुभव शेयर करना और एडवांस स्किल्स सीखना.
आईपीएस ट्रेनिंग में क्या-क्या सिखाया जाता है?
आईपीएस ट्रेनिंग को दो हिस्सों में बांटा जाता है: इनडोर और आउटडोर.
- आउटडोर: इसमें पीटी, परेड, ड्रिल, हथियारों का इस्तेमाल (AK-47, पिस्तौल), घुड़सवारी, तैराकी, जंगल सर्वाइवल और रॉक क्लाइम्बिंग जैसी एक्टिविटीज शामिल हैं.
- इनडोर: इसमें भारतीय दंड संहिता (IPC), सीआरपीसी, एविडेंस एक्ट, मानवाधिकार, साइबर क्राइम और फॉरेंसिक साइंस जैसे विषयों की गहरी जानकारी दी जाती है.
सुबह 5 बजे से शुरू होता है सख्त रूटीन
आईपीएस कैडेट का दिन सुबह 4:30 या 5:00 बजे शुरू हो जाता है. सुबह की शुरुआत पीटी या दौड़ से होती है, जिसके बाद ड्रिल और परेड होती है. नाश्ते के बाद दोपहर तक इनडोर क्लासेज चलती हैं. शाम को फिर से आउटडोर गतिविधियां (जैसे खेल या घुड़सवारी) होती हैं. रात में डिनर के बाद सेल्फ-स्टडी और अगले दिन की तैयारी के साथ दिन खत्म होता है.
मसूरी के बाद का अगला पड़ाव
मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में 3 महीने बिताने के बाद आईपीएस अधिकारी हैदराबाद जाते हैं. सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA) ही वह जगह है, जहां उन्हें पुलिसिंग की बारीकियां सिखाई जाती हैं. यहां से पासिंग आउट परेड के बाद उन्हें उनके निर्धारित राज्य (कैडर) में भेज दिया जाता है.
आईपीएस की पहली पोस्टिंग: कब, कहां और कैसे?
ट्रेनिंग के दौरान ही आईपीएस अधिकारियों को उनका राज्य (कैडर) मिल जाता है. फेज-1 की ट्रेनिंग खत्म होने के बाद उन्हें उनके कैडर राज्य के एक जिले में प्रोबेशनर के तौर पर भेजा जाता है. यहां उन्हें आमतौर पर ASP (Assistant Superintendent of Police) के पद पर पहली पोस्टिंग मिलती है. यहां वे थाने के कामकाज से लेकर जिले की सुरक्षा व्यवस्था को करीब से समझते हैं. प्रोबेशन पीरियड (आमतौर पर 2 साल) सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद उन्हें स्वतंत्र प्रभार दिया जाता है.
