अंतरिक्ष से जमीन तक चीर जाएंगे दुश्मन, भारत में बनेंगे देसी लड़ाके
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हवा में दुश्मनों को धूल चटाने की तैयारी हो गई है. भारत ने ‘स्वदेशी’ लड़ाकू ड्रोन बनाने का ऐलान किया है. सैमटेल एवियोनिक्स ने 200 करोड़ रुपये के निवेश का बड़ा ऐलान किया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार बताया है. उन्होंने कहा कि अब अंतरिक्ष से लेकर सरहद तक गरजेगा ‘मेक इन इंडिया’.

भारत स्वदेशी ड्रोन बनाने जा रहा है. (एआई से बनाया गया)
नई दिल्ली: आसमान की हदों को चीरते हुए भारत अब एक ऐसी उड़ान भरने जा रहा है, जिससे दुश्मनों के पसीने छूटना तय है. देश की रक्षा और एयरोस्पेस इलेक्ट्रॉनिक्स की दिग्गज कंपनी सैमटेल एवियोनिक्स (Samtel Avionics) ने मेक इन इंडिया की ताकत दुनिया को दिखाने के लिए एक ऐतिहासिक घोषणा की है. कंपनी स्वदेशी लड़ाकू ड्रोन (Combat Drones), काउंटर-ड्रोन सिस्टम और अत्याधुनिक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (Space Tech) विकसित करने के लिए 200 करोड़ रुपये से अधिक का विशाल निवेश करने जा रही है.
यह रणनीतिक कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब राजधानी दिल्ली में हाल ही में नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव 2026 संपन्न हुआ है. इस महासम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कड़े शब्दों में कहा था कि ‘भारत को अब रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भर नहीं रहना है, हमें एक ऐसा स्वदेशी ड्रोन इकोसिस्टम चाहिए जो पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो.’
रक्षा मंत्री के इस आह्वान को प्रेरणा मानकर सैमटेल एवियोनिक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक पुनीत कौरा ने ऐलान किया कि कंपनी ने मानव रहित प्रणालियों के लिए एक विशेष इकाई स्थापित की है. यह प्रभाग पूरी तरह से भारतीय बौद्धिक संपदा पर आधारित लड़ाकू ड्रोन बनाएगा.
काउंटर-ड्रोन और MRO का भी जाल
पुनीत कौरा ने बताया कि भविष्य के युद्ध सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि हवा में लड़े जाएंगे. ऐसे में मानव रहित प्रणालियों में आत्मनिर्भरता अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक मजबूरी और अनिवार्यता बन चुकी है. इस महा-प्रोजेक्ट के तहत सिर्फ लंबी दूरी तक उड़ने वाले ड्रोन ही नहीं बनाए जाएंगे, बल्कि दुश्मनों के ड्रोन्स को मार गिराने वाले काउंटर-ड्रोन सिस्टम भी तैयार किए जाएंगे. इसके अलावा, कंपनी एक मजबूत ‘मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल’ (MRO) इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार करेगी, ताकि युद्ध के मैदान में ये स्वदेशी हथियार कभी धोखा न दें.
अंतरिक्ष में भी भारत का ‘ब्रह्मास्त्र’
जमीन और हवा के बाद सैमटेल की नजरें अब सीधे अंतरिक्ष पर हैं. कंपनी लो अर्थ ऑर्बिट (Low Earth Orbit -LEO) सैटेलाइट्स और छोटे उपग्रहों के निर्माण में भी एंट्री मार रही है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनी स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस (Space Situational Awareness) और ‘अंतरिक्ष मलबा प्रबंधन’ (Space Debris Management) जैसी भविष्य की तकनीकों पर भी काम कर रही है. उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले कुछ ही महीनों में सैमटेल का पहला ‘स्पेस प्रोग्राम’ लॉन्च हो जाएगा.
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दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें
