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जब भक्त की लाज बचाने कौड़ी कामाख्या से खुद चली आईं मां, जिद्दी राजा का हो गया सर्वनाश, थावे दुर्गा मंदिर का चमत्कारिक रहस्य

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Gopalganj Thawe Durga Temple story: कथाओं और किंवदंतियों में प्राय: कहा जाता है कि सच्चे मन से पुकारने पर मां अपने भक्तों की लाज जरूर रखती हैं. थावे दुर्गा मंदिर की कथा भी इसी आस्था का जीवंत प्रमाण मानी जाती हैं, जहां मां के खुद चलकर आने और उनकी भक्ति को चुनौती देने वाले एक अहंकारी राजा के सर्वनाश की कहानी आज भी लोगों की जुबान पर है.

जब भक्त की लाज बचाने कौड़ी कामाख्या से चली आईं मां, जिद्दी राजा का हुआ सर्वनाशZoom

बिहार के गोपालगंज थावे दुर्गा मंदिर की अद्भुत कथा

गोपालगंज. कहा जाता है कि जब भक्ति सच्ची हो, तो देवी-देवता भी अपने भक्त की पुकार पर स्वयं प्रकट हो जाते हैं. बिहार के गोपालगंज स्थित थावे दुर्गा मंदिर की कथा भी ऐसी ही अद्भुत आस्था, चमत्कार और अहंकार के अंत की कहानी बताती है, जहां एक भक्त की पुकार पर मां ने स्वयं आकर उसके विश्वास की लाज रखी. गोपालगंज के थावे में स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्यमयी किंवदंतियों के लिए भी प्रसिद्ध है. मान्यता है कि हथुआ के अहंकारी राजा मनन सिंह और मां के परम भक्त रहषु भगत की कहानी यहीं से जुड़ी है, जिसने इस स्थान को चमत्कार और श्रद्धा का संगम बना दिया.

थावे में स्थित है मां दुर्गा का प्राचीन मंदिर

बिहार में गोपालगंज जिला मुख्यालय से करीब 6 किलोमीटर दूर सीवान जाने वाले मार्ग पर थावे प्रखंड के थावे में मां दुर्गा का प्राचीन मंदिर स्थित है. चैत्र नवरात्रि के अवसर पर यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इसी थावे में हथुआ के राजा रहे मनन सिंह का पुराना किला भी है. कहा जाता है कि राजा मनन सिंह को अपने ऊपर यह घमंड था कि उनसे बड़ा देवी का कोई भक्त हो ही नहीं सकता.

रहषु भगत की भक्ति और राजा की चुनौती

थावे दुर्गा मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति और अहंकार के परिणाम का जीवंत प्रतीक है. एक किवदंती के अनुसार एक बार राजा मनन सिंह के राज में भयंकर सूखा यानी अकाल पड़ा. लोग दाने-दाने को तरसने लगे. कई लोगों की भूख से मौत होने लगी. उसी समय थावे में मां कामाख्या देवी का एक सच्चा भक्त रहषु भगत रहता था. कथा के अनुसार रहषु मां की कृपा से दिन में घास काटता था और रात को उसी घास से अन्न निकल आता था, जिसे वह भूखों में बांट देता था.

जहां भक्त की जीत और अहंकार की हार हुई

जब राजा को यह पता चला तो उसने रहषु भगत को दरबार में बुलाया. अकाल के समय खेती-बारी की पूरी जानकारी ली और फिर उससे देवी को अपने दरबार में बुलाने को कहा. भक्त रहषु ने विनम्रता से मना किया और समझाया कि माता आएंगी तो सबकुछ बर्बाद हो जाएगा, राजपाट तहस-नहस हो जाएगा. लेकिन राजा अपने अहंकार में अड़ा रहा. रहषु की बात न मानने पर राजा क्रोधित हो गया और आदेश दिया कि यदि उसने देवी को नहीं बुलाया तो उसे और उसके पूरे परिवार को आग की भट्टी में जिंदा झोंक दिया जाएगा. रहषु समझ गया कि अब मरना तो तय है, चाहे राजा के आदेश से या फिर माता के प्रकट होने पर.

जब रहषु भगत ने दी पुकार और थावे आ गईं मां, देखते ही भस्म हो गया पूरा राजघराना, सच्चे भक्त की लाज बची, अहंकारी राजा का अंत हुआ.

कौड़ी कामाख्या से थावे तक मां की यात्रा

एक कथा के अनुसार, इसके बाद रहषु ने माता का आह्वान किया और थावे पधारने की प्रार्थना की. मां कौड़ी कामाख्या से चल पड़ीं और रास्ते में आमी पहुंचकर रुक गईं. कहा जाता है कि यहां मां ने अपने भक्त रहषु से राजा को एक बार फिर समझाने को कहा. लेकिन जिद्दी राजा मानने को तैयार नहीं हुआ. इसके बाद माता आमी से घोड़ाघाट पहुंचीं और फिर रहषु से राजा को समझाने को कहा. बावजूद इसके राजा अपनी हठ पर अड़ा रहा और बोला कि वह माता को देखे बिना नहीं मानेगा. उधर राजा के महल में हवन जारी था. इसी बीच आंधी-तूफान के बीच माता थावे पहुंचीं और भक्त रहषु के मस्तिष्क को चीरकर अपना कंगन दिखाया. कहते हैं कि माता को साक्षात देख कर उसी समय राजा मनन सिंह और उसका पूरा परिवार भस्म हो गया. राजपाट समाप्त हो गया और रहषु पाताल लोक को प्रस्थान कर गए.

जहां मां प्रकट हुईं, वहीं बना मंदिर, अटूट है आस्था

विशेष बात यह है कि जहां देवी प्रकट हुईं वहीं उनका भव्य मंदिर बना. जिस भक्त रहषु भगत के आह्वान पर मां खुद थावे चली आईं, उसे भी भुलाया नहीं गया. यही वजह है कि थावे दुर्गा मंदिर के पास ही रहषु भगत का भी मंदिर बनाया गया है. ऐसी कई कथाएं और मान्यताएं थावे दुर्गा मंदिर से जुड़ी हैं. श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और देवी के चमत्कारों की चर्चाओं ने इस स्थान को शक्ति की उपासना का प्रमुख केंद्र बना दिया है. यहां की कथा यह संदेश देती है कि सच्ची श्रद्धा में अपार शक्ति होती है, जबकि अहंकार अंततः विनाश का कारण बनता है. यही कारण है कि आज भी लाखों श्रद्धालु यहां आकर मां के चमत्कार और कृपा में अटूट विश्वास रखते हैं.

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Vijay jha

पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें

By uttu

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