भुवनेश्वर. शराब की नई दुकानें नहीं खुलेंगी, घर बैठे शराब मंगाने की सुविधा बंद होगी, ऊपर से सेस और लाइसेंस फीस में भी बढ़ोतरी की गई है.ये नई शराब नीति दिल्ली,यूपी की नहीं बल्कि ओडिशा की है. ओडिशा सरकार की नई शराबी नीति ने कई बड़े और सख्त फैसलों के साथ सुर्खियां बटोर ली हैं. ओडिशा सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2029 तक के लिए तीन साल की नई आबकारी नीति लागू करने का ऐलान किया है. यह पहली बार है जब राज्य ने सालाना नीति की जगह तीन साल की लंबी अवधि का ढांचा तैयार किया है.
नई शराब दुकानों पर पूरी तरह रोक
नई नीति के तहत सबसे बड़ा फैसला यह लिया गया है कि राज्य में कोई भी नई शराब दुकान नहीं खोली जाएगी. ‘ऑफ-शॉप’, देसी शराब की दुकान और आउट-स्टिल पर पूरी तरह रोक रहेगी. ग्रामीण इलाकों में नई ‘ऑन-शॉप’ खोलने की अनुमति नहीं होगी.हालांकि, कुछ छूट भी दी गई है औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित 3-स्टार या उससे ऊपर के होटल और क्लब में सीमित अनुमति दी जा सकती है.
होम डिलीवरी पर भी बैन
कोविड के बाद कई राज्यों में शराब की होम डिलीवरी शुरू हुई थी, लेकिन ओडिशा ने इसे पूरी तरह बंद करने का फैसला लिया है.नई नीति में साफ कहा गया है कि शराब की होम डिलीवरी की अनुमति नहीं होगी. इस फैसले को लेकर माना जा रहा है कि सरकार अनियंत्रित खपत को रोकना चाहती है.
सेस और फीस में बढ़ोतरी
राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ खपत नियंत्रित करने के लिए सरकार ने आर्थिक मोर्चे पर भी कदम उठाए हैं:
- – आबकारी शुल्क पर 0.5% ‘नशामुक्ति उपकर’ यानी सेस लगाया गया है.
- – लाइसेंस आवेदन फीस में 10% की बढ़ोतरी की गई है.
- – लाइसेंस फीस में हर साल 10–20% तक इजाफा करने का ऐलान किया गया है.
- – IMFL और देसी शराब पर भी टैक्स बढ़ाया गया है.
इससे शराब महंगी होने की संभावना है.
मंदिर क्षेत्र में सख्त पाबंदी
नई नीति में धार्मिक स्थलों का भी खास ध्यान रखा गया है. जगननाथ मंदिर के आसपास और ‘ग्रैंड रोड’ पर किसी भी तरह की शराब दुकान की अनुमति नहीं होगी. यह ग्रैंड रोड करीब 2.6 किलोमीटर लंबा रास्ता है, जो मुख्य मंदिर को गुंडिचा मंदिर से जोड़ता है. हालांकि, फिलहाल वहां कोई शराब दुकान नहीं है लेकिन नीति में इसे स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है.
‘ट्रैक एंड ट्रेस’ सिस्टम से निगरानी
सरकार ने अवैध बिक्री और राजस्व नुकसान रोकने के लिए टेक्नोलॉजी का सहारा लिया है.‘ट्रैक एंड ट्रेस’ सिस्टम लागू किया जाएगा. शराब की हर बोतल को उत्पादन से बिक्री तक ट्रैक किया जाएगा. सभी दुकानों और फैक्ट्रियों में CCTV अनिवार्य होगा और लाइव फीड एक्साइज विभाग से जुड़ी होगी. इससे पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है.
MGQ से MGER मॉडल की ओर बदलाव
नई नीति में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव भी किया गया है: पहले ‘मिनिमम गारंटेड क्वांटिटी’ (MGQ) सिस्टम था और अब अब ‘मिनिमम गारंटेड एक्साइज रिवेन्यू’ (MGER) लागू होगा. इसका मतलब अब दुकानदारों पर ज्यादा शराब बेचने का दबाव नहीं होगा, बल्कि सरकार अपने राजस्व को सुनिश्चित करेगी.
क्यों लाई गई 3 साल की नीति?
सरकार का कहना है कि तीन साल की नीति से स्थिरता और पारदर्शिता बढ़ेगी. बीच में जरूरत पड़ने पर सुधार की गुंजाइश रहेगी और राजस्व और जनस्वास्थ्य के बीच संतुलन बनेगा. ओडिशा में शराब से मिलने वाला राजस्व पिछले 25 सालों में तेजी से बढ़ा है.
– 2000-01: ₹135 करोड़
– 2024-25: ₹11,429 करोड़ से ज्यादा
यह दिखाता है कि आबकारी नीति राज्य की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाती है.
