पश्चिम एशिया का पूरा इलाका इन दिनों बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है। ताजा मामला इराक के कुर्दिस्तान से आया है, जहां राष्ट्रपति के आवास को निशाना बनाकर एक बड़ा ड्रोन हमला किया गया। इस हमले ने न सिर्फ कुर्दिस्तान बल्कि अंतरराष्ट्रीय गलियारों में भी हड़कंप मचा दिया है। घटना के बाद से अमेरिका बेहद तल्ख तेवर में नजर आ रहा है। वहीं, ईरान भी चुप नहीं है। दोनों देशों के बीच का पुराना विवाद एक बार फिर सामने आ गया है।
अमेरिका ने दी चेतावनी
जैसे ही राष्ट्रपति आवास पर हमले की खबर आई, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बिना देर किए एक बयान जारी किया। अमेरिका ने हमले को ‘कायरतापूर्ण आतंकवादी कृत्य’ बताते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। अमेरिका ने साफ लफ्जों में कहा है कि वह कुर्दिस्तान और इराक की संप्रभुता और सुरक्षा के साथ मजबूती से खड़ा है। अमेरिका ने इराकी प्रशासन से मांग की है कि इस साजिश के पीछे जो भी चेहरे हैं, उन्हें बेनकाब कर सख्त से सख्त सजा दी जाए।
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अमेरिका-ईरान में ठनी
इस एक हमले ने जितनी दहशत जमीन पर नहीं फैलाई, उससे कहीं ज्यादा इसने कूटनीतिक गलियारों में तनाव पैदा कर दिया है। हमले के कुछ ही घंटों के भीतर अमेरिका और ईरान के बीच आरोपों के तीर चलने लगे। अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों का दावा है कि इस हमले के पीछे उन उग्रवादी गुटों का हाथ है, जिन्हें सीधे तौर पर ईरान से खाद-पानी और हथियार मिलते हैं। अमेरिका ने कहा कि ईरान समर्थित ये गुट क्षेत्र में अपनी धमक बनाए रखने के लिए ऐसे हमलों को अंजाम देते रहते हैं।
ईरान ने किया पलटवार
दूसरी तरफ, ईरान ने भी इन आरोपों पर चुप रहना ठीक नहीं समझा। ईरान ने अमेरिका के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका बिना किसी पुख्ता सबूत के ईरान को बदनाम करने की साजिश रच रहा है। ईरान ने कहा कि अमेरिका ऐसे बेबुनियाद इल्जाम लगाकर पश्चिम एशिया में अपनी नाकामियों को छिपाना चाहता है।
फिलहाल, कुर्दिस्तान में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। हमले की कड़ियां जोड़ने की कोशिश हो रही है। लेकिन एक बात तो साफ है कि इस एक ड्रोन हमले ने अमेरिका और ईरान के बीच की कड़वाहट को कई गुना और बढ़ा दिया है।
