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एकसाथ डबल इस्तीफे से बदल जाएगी बिहार की राजनीति, नीतीश कुमार MLC तो नितिन नवीन छोड़ेंगे MLA पद, डेडलाइन आज

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Bihar Politics: बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं. वहीं, भारतीय जनता पार्टी के नेता नितिन नवीन भी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं. नीतीश कुमार के परिषद से इस्तीफा देने के बाद जदयू के भीतर नए समीकरण बन सकते हैं. जबकि भाजपा में भी नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद विधानसभा सीट खाली होगी, जिससे उपचुनाव की स्थिति बन सकती है. दोनों ही दलों के लिए यह राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण समय माना जा रहा है.

नए मोड़ पर बिहार की राजनीति, CM नीतीश MLC तो नितिन नवीन MLA पद से देंगे इसतीफाZoom

राज्यसभा चुनाव के बाद बिहार में इस्तीफों की तैयारी. नीतीश कुमार और नितिन नवीन पर नजर

पटना. बिहार की राजनीति में एक साथ दो बड़े इस्तीफों की आहट ने सियासी हलचल तेज कर दी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बीजेपी नेता नितिन नवीन, दोनों ही राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद अपनी-अपनी वर्तमान सदन की सदस्यता छोड़ने की तैयारी में हैं. खास बात यह है इसके लिए आज ही डेडलाइन है. ऐसे में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए नए राजनीतिक समीकरण बनने तय माने जा रहे हैं. बता दें कि सीएम नीतीश पिछले करीब दो दशकों से लगातार परिषद के सदस्य रहे हैं और उनका कार्यकाल 6 मई 2030 तक निर्धारित था, लेकिन राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद अब उन्हें एक सदन चुनना अनिवार्य हो गया है. इसी तरह भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन भी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं. वह भी राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं, और इस कारण उन्हें भी विधानसभा की सीट छोड़नी होगी.

नीतीश कुमार का परिषद से राज्यसभा तक सफर

बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार वर्ष 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं. वह चौथी बार 7 मई 2024 को परिषद पहुंचे थे और उनका कार्यकाल 2030 तक था. लेकिन 16 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद अब उन्हें परिषद की सदस्यता छोड़नी होगी. माना जा रहा है कि वह 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं.

चारों सदनों का अनुभव, लेकिन नई राजनीतिक भूमिका

नीतीश कुमार अब उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा-चारों सदनों का अनुभव हासिल किया है. 1985 में हरनौत से विधायक और 1989 में लोकसभा सदस्य बनने के बाद अब उनकी राज्यसभा एंट्री को राष्ट्रीय राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

जदयू में रणनीतिक मंथन तेज

रविवार शाम मुख्यमंत्री आवास पर जदयू के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई, जिसमें केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार चौधरी और अशोक चौधरी समेत कई नेता शामिल हुए. इस बैठक को आगामी राजनीतिक रणनीति और संभावित बदलावों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

नितिन नवीन का इस्तीफा और BJP की रणनीति

दूसरी ओर बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन भी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने की तैयारी में हैं. वह बांकीपुर सीट से लगातार विधायक रहे हैं और बीते 16 मार्च को सीएम नीतीश कुमार के साथ ही राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं. हालांकि उनका इस्तीफा रविवार को प्रस्तावित था, लेकिन वह असम चुनाव प्रचार के लिए रवाना हो गए, जिसके कारण इस्तीफा टल गया.

गठबंधन की नई परीक्षा और राजनीति को नई दिशा

दोनों नेताओं के इस्तीफे के बाद परिषद और विधानसभा की सीटें खाली होंगी, जिससे उपचुनाव की स्थिति बन सकती है. राजनीति के जानकारों के अनुसार, नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना सिर्फ संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संकेत भी है. इसे राष्ट्रीय राजनीति में उनकी सक्रियता और भूमिका बढ़ने के रूप में देखा जा रहा है, जबकि नितिन नवीन का कदम भाजपा की संगठनात्मक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

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Vijay jha

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By uttu

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