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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तैर रहे हजारों मर्चेंट शिप, जानिए इनके कर्मचारियों को क्या ट्रेनिंग मिलती है, लाखों में है सैलरी – indian seafarers merchant navy career salary training hormuz strait ntcpmm

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की लहरों पर खड़े ये विशालकाय जहाज किसी छोटे शहर से कम नहीं हैं. जब एक जहाज महीनों के लिए समंदर में निकलता है, तो उस पर एक पूरी टीम होती है जिसका काम और रैंक पहले से तय होता है. विदेश मंत्रालय (MEA) के पिछले बयानों के अनुसार, दुनिया के हर 10वें कमर्शियल जहाज पर कम से कम एक भारतीय जरूर होता है. अगर आप भी मर्चेंट नेवी में करियर देख रहे हैं तो जानिए ये डिटेल. 

जहाज पर कौन-कौन से कर्मचारी होते हैं?  

एक कमर्शियल जहाज मुख्य रूप से 3 विभागों में बंटा होता है:
डेक विभाग (नेविगेशन): इनका काम जहाज चलाना और रास्ता तय करना है.
कैप्टन (Master): जहाज का सर्वोच्च अधिकारी. पूरी जिम्मेदारी इन्हीं की होती है.
चीफ ऑफिसर: कार्गो (माल) की लोडिंग और अनलोडिंग के इंचार्ज.
सेकंड और थर्ड ऑफिसर: नेविगेशन और सुरक्षा उपकरणों की देखरेख.
इंजन विभाग (टेक्निकल): इनका काम इंजन और मशीनरी को चालू रखना है.
चीफ इंजीनियर: इंजन रूम का बॉस.
सेकंड, थर्ड और फोर्थ इंजीनियर: इंजन की मरम्मत और रखरखाव.
ETO (इलेक्ट्रो-टेक्निकल ऑफिसर): जहाज के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को संभालना.
कैटरिंग विभाग (सर्विस): चीफ कुक और स्टीवर्ड: खाने-पीने और साफ-सफाई की जिम्मेदारी.

कहां से और कैसे होता है सिलेक्शन? 

भारत में मर्चेंट नेवी जॉइन करने के लिए DG श‍िप‍िंग (भारत सरकार) द्वारा मान्यता प्राप्त कोर्सेज करने होते हैं. 
प्रवेश परीक्षा: 12वीं (PCM) के बाद IMU-CET (Indian Maritime University Common Entrance Test) पास करना अनिवार्य है.

कोर्सेज
B.Sc. नॉटिकल साइंस (डेक ऑफिसर के लिए).
B.Tech मरीन इंजीनियरिंग (इंजीनियर के लिए).
GP Rating (10वीं के बाद रेटिंग/क्रू बनने के लिए).

स्पॉन्सरशिप: बड़ी कंपनियां (जैसे Anglo-Eastern, Maersk) अपना खुद का एग्जाम और इंटरव्यू लेकर छात्रों को ट्रेनिंग के लिए चुनती हैं और बाद में प्लेसमेंट देती हैं.

क्या होता है वेतन? 
मर्चेंट नेवी में सैलरी डॉलर में भी मिलती है और यह पूरी तरह टैक्स-फ्री (अगर आप 183 दिन से ज्यादा समंदर में हैं) हो सकती है.

कैडेट (Trainee): ₹40,000 से ₹80,000 प्रति माह.
जूनियर ऑफिसर: ₹1.5 लाख से ₹3 लाख प्रति माह.
चीफ ऑफिसर/इंजीनियर: ₹5 लाख से ₹8 लाख प्रति माह.
कैप्टन: ₹10 लाख से ₹20 लाख प्रति माह (जहाज के प्रकार पर निर्भर).

क्या होते हैं खतरे, जानिए जरूरी फैक्ट 
होर्मुज जैसे इलाकों में फंसे जहाजों पर इस वक्त ‘पायरेसी’ (समुद्री डकैती) से ज्यादा मिसाइल और ड्रोन हमलों का डर है. अपनी ट्रेन‍िंग के अनुसार ड्यूटी पर तैनात हर कर्मचारी को इसका सामना करना पड़ता है. 

ईरान-इजरायल तनाव के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य इस वक्त दुनिया का सबसे खतरनाक ‘वॉर जोन’ बन चुका है. वैश्विक तेल आपूर्ति का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है, जो अब सीधे खतरे में है. जानिए सेलर्स के सामने क्या चैलेंज हैं. 

ये हैं चैलेंज 

ड्रोन व मिसाइल हमले: जहाजों पर अचानक होने वाले हवाई हमलों का डर.
शिप हाईजैकिंग: ईरानी सुरक्षा बलों द्वारा जहाजों को कब्जे में लेने का जोखिम.
मानसिक तनाव: महीनों तक युद्ध क्षेत्र में फंसे रहने से नाविकों का मनोवैज्ञानिक दबाव.
नेविगेशन बाधा: जीपीएस जामिंग और समुद्री डकैती का दोहरा खतरा.

होर्मुज जैसे ‘वॉर ज़ोन’ के लिए विशेष ट्रेनिंग 
चूंकि अभी हॉर्मुज में स्थिति तनावपूर्ण है, इसलिए नाविकों को अब ‘हार्डन‍िंग ऑफ श‍िप’ की ट्रेनिंग काम आएगी. जानिए इस ट्रेन‍िंग में क्या शामिल है. 

रेजर वायर लगाना: जहाज के चारों तरफ कटीले तार लगाना ताकि कोई ऊपर न चढ़ सके.
सिटाडेल (Citadel): जहाज के अंदर एक गुप्त और बुलेटप्रूफ कमरा होता है, जहां हमला होने पर पूरा क्रू छिप जाता है और वहीं से जहाज कंट्रोल करता है.
लाइट्स ऑफ ड्रिल: रात में हमलावर ड्रोन से बचने के लिए जहाज की सभी लाइटें बंद करके यात्रा करना.

STCW कोर्सेज यानी ‘सेफ्टी ट्रेनिंग’ क्या है

PST (पर्सनल सर्वाइवल टेक्नीक्स) यानी जहाज डूबने पर समंदर में कैसे जिंदा रहना है.
PSSR (पर्सनल सेफ्टी एंड सोशल रेस्पांस्बिल‍िटी)में जहाज पर अनुशासन और आपसी तालमेल स‍िखाया जाता है. 
Fire Prevention & Fire Fighting: अगर बीच समंदर में जहाज पर आग लग जाए, तो उसे कैसे बुझाना है. 
EFA (एलिमेंट्री फर्स्ट एड): इसमें मेडिकल इमरजेंसी में प्राथमिक उपचार स‍िखाया जाता है. 
सिक्योरिटी अवेयरनेस: होर्मुज जैसे इलाकों में समुद्री डकैतों (Pirates) या बाहरी हमलों से बचने की ट्रेनिंग.

कब और कैसे मिलती है ट्रेनिंग 
मर्चेंट नेवी के कर्मचारियों को मुख्य रूप से दो तरह की ट्रेनिंग दी जाती है. सबसे पहले प्री-सी ट्रेनिंग (जहाज पर जाने से पहले) कैंपस या एकेडमी में दी जाने वाली यह ट्रेनिंग 6 महीने (GP Rating) से लेकर 4 साल (B.Tech) तक की होती है.

दूसरी, ऑन-बोर्ड ट्रेनिंग (जहाज पर काम के दौरान) जब छात्र कैडेट के रूप में जहाज पर जाते हैं, तो उन्हें ‘लाइव’ माहौल में काम सिखाया जाता है. इसमें नेविगेशन यानी रडार, जीपीएस और नक्शों (Charts) के जरिए जहाज का रास्ता तय करना सिखाया जाता है. इसके अलावा कार्गो हैंडलिंग में खतरनाक गैसों, तेल या भारी कंटेनरों को लोड और अनलोड करने की बारीकियां सिखाई जाती हैं. इन कैडेट्स को इंजन मेंटेनेंस सिखाया जाता है. इसमें ये विशाल इंजनों की सर्विसिंग और इमरजेंसी में उन्हें ठीक करना सीखते हैं.  ड्रिल के जरिये हर हफ्ते जहाज पर अलार्म बजाकर रिहर्सल की जाती है कि अगर हमला हो या जहाज डूबे, तो लाइफबोट तक कैसे पहुंचना है. 

(नोट: ऊपर बताई गई सैलरी के आंकड़े अंदाजन (Approximate) हैं और यह पूरी तरह से आपकी कंपनी, अनुभव और जहाज के प्रकार (जैसे ऑयल टैंकर, कार्गो शिप या क्रूज लाइनर) पर निर्भर करती है. जैसे बड़ी इंटरनेशनल कंपनियां (जैसे Maersk या MSC) छोटी कंपनियों के मुकाबले काफी ज्यादा वेतन देती हैं. जैसे-जैसे आपकी रैंक और ‘सी-टाइम’ (समंदर में बिताया वक्त) बढ़ता है, सैलरी में लाखों का इजाफा होता है. मर्चेंट नेवी की सैलरी का सबसे बड़ा आकर्षण ‘टैक्स फ्री’ होना है, लेकिन इसके लिए आपको एनआरआई (NRI) स्टेटस की शर्तों (साल में कम से कम 183 दिन जहाज पर) को पूरा करना होता है.) 

—- समाप्त —-

By uttu

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